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कोण्डागांव : क्षेत्र मे अलसी फसल बढ़ावा देने बड़ेठेमली में किसान मेले का हुआ आयोजन

कोण्डागांव : क्षेत्र मे अलसी फसल बढ़ावा देने बड़ेठेमली में किसान मेले का हुआ आयोजन

जिले मे तिलहन का रकबा बढ़ाने किसान मेले का आयोजन

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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के अंतर्गत भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना द्वारा आदिवासी उप योजना के तहत् अलसी फसल हेतु प्रशिक्षण सह किसान मेला का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र के द्वारा 26 मार्च को ग्राम बड़े ठेमली में आयोजित किया गया था। इस योजना के तहत जिले में कुल 170 एकड़ में अलसी के फसल का प्रदर्शन लगाया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपाध्यक्ष बस्तर विकास प्राधिकरण एवं विधायक केशकाल संतराम नेताम द्वारा शुभारंभ किया गया। इस दौरान श्री नेताम ने किसानो को बेहतर आय अर्जित करने हेतु फसल चक्र परिवर्तन करते रहने की सलाह दी। जिससे मृदा का स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है। बस्तर से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ में धान की खेती की जाती है, लेकिन धान के साथ साथ किसानों को दलहन तिलहन में अलसी की खेती भी करनी चाहिए। जिससे हमारे देश में तेल की आवश्यकता पूरी हो सके और स्वयं के शुद्ध तेल से ह्रदयघात जैसे बीमारियों से बचा जा सकता है साथ ही उन्होंने किसानो से फसल एवं वनोपज की बाज़ार मे मिलने वाली कीमतों पर भी चर्चा की।
इस दौरान उन्होंने 60 किसानों को स्प्रेयर का वितरण भी किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में केशकाल, कोण्डागाव, माकडी एवं बड़ेराजपुर विकाखण्डों के 211 किसानों ने भाग लिया साथ ही किसानों ने इस किसान मेले में विभिन्न कृषि प्रधान योजनाओं के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष देवचंद मातलाम ने भी एकीकृत कृषि प्रणाली मे जोर देते हुए किसानों से फसलों के साथ पशु पालन करने की सलाह दी। जिससे किसानों को वर्षभर आमदनी प्राप्त होगी।
नोडल अधिकारी डॉ संजय द्विवेदी ने अलसी फसल की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इस फसल के लिए पानी की आवश्कता कम होती है। जानवर भी इस फसल को खाते नहीं है अलसी का तेल व बीज बहुत गुणकारी होता है जिसमे ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो त्वचा व शरीर के लिए भुत फायदेमंद होता है। धान एवं मक्का की फसलें लगातार लेने से मृदा की उर्वरा शक्ति लगातार कमजोर हो रही है मृदा की उर्वरा बढ़ाने के लिए खाद्यान्न फसलों के साथ संतुलित रूप से तिलहन और दलहन फसले लगाना चाहिए।
इस अवसर पर जपं केशकाल अध्यक्ष महेंद्र नेताम, उपाध्यक्ष गिरधारीलाल सिन्हा, सरपंच जशोदा वट्टी, उपसरपंच गुड्डू राम मरकाम, उपसंचालक पशु सेवाए डॉ0 शिशीरकांत पांडे, केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ ओमप्रकाश, वैज्ञानिक डॉ हितेश मिश्रा, सहायक संचालक मत्स्य विभाग एमएस कमल, सहायक संचालक उद्यानिकी लोकेश धु्रव, पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ नीता मिश्रा, डॉ बिंदिया पैकरा, योगेश देवांगन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण तथा जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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