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जैव उर्वरकों से बढ़ेगी गौठानों में निर्मित कम्पोस्ट की पोषकता

रायपुर : जैव उर्वरकों से बढ़ेगी गौठानों में निर्मित कम्पोस्ट की पोषकता

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कृषि वैज्ञानिकों ने गौठान समितियों को कम्पोस्ट समृद्ध बनाने का प्रशिक्षण दिया

कम्पोस्ट समृद्ध बनाने का प्रशिक्षण दिया

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा राज्य शासन के कृषि विभाग के सहयोग से अक्षय तृतीया के अवसर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित समस्त महाविद्यालयों, अनुसंधान केन्द्रों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों में अक्ती तिहार का आयोजन किया जा रहा है। अक्ती तिहार के अवसर पर किसानों को उन्नत बीज, पौध सामग्री एवं उन्नत कृषि यंत्रों के वितरण के साथ ही राज्य शासन की नरवा, गरूवा, घुरवा और बाड़ी योजना के तहत स्थापित गौठानों में निर्मित कम्पोस्ट को बायोफर्टिलायजर के द्वारा समृद्ध बनाने का कार्य भी किया जा रहा है। इसी परिपेक्ष्य में विभिन्न कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा अपने-अपने जिले के गौठानों में वर्मिकम्पोस्ट को समृद्ध बनाने के लिए गौठान समितियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने डॉ. तापस चौधरी के नेतृत्व में रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक में गोइन्दा और बनचरौदा स्थित गौठानों में गौठान समिति के सदस्यों को कम्पोस्ट को जैव उर्वरकों के द्वारा समृद्ध बनाने का प्रशिक्षण दिया।

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उल्लेखनीय है कि गौठानों में निर्मित जैविक खाद, वर्मिकम्पोस्ट में पोषक तत्वों के मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ाने एवं रासायनिक उर्वरता कम करने हेतु इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी के संयुक्त प्रयास से प्रभावी मित्र सूक्ष्म जीवों युक्त उर्वरा शक्ति नामक तरल जैविक कल्चर तैयार किया गया है, जिसके उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ेगी साथ ही रासायनिक खाद की आवश्यकता में कमी आएगी। इन जैव उर्वरकों में राइजोबियम कल्चर, फास्फोरस सोल्यूब्लाईजिंग बैक्टीरिया कल्चर, एजोस्पाइरिलम, जिंक सोल्यूब्लाईजिंग बैक्टीरिया कल्चर एवं पोटेशियम सोल्यूब्लाईजिंग बैक्टीरिया कल्चर शामिल हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में 15 हजार लीटर बायोफर्टिलायजर का वितरण गौठानों में तैयार वर्मिकम्पोस्ट को समृद्ध बनाने के लिए किया जा रहा है। इस कल्चर के उपयोग का प्रशिक्षण देने के लिए विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रांे के सहयोग से गौठानों में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें गौठान समितियों के सदस्यों के साथ-साथ महिला स्व-सहायता समूह के सदस्य भी शमिल हो रहीं हैं।

Ashish Sinha

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