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माइनिंग क्षेत्र के कई गांव आज भी प्यासे , हैंडपंप खुदवाने के नाम पर हिंडालको कर रही खानापूर्ति।

माइनिंग क्षेत्र के कई गांव आज भी प्यासे , हैंडपंप खुदवाने के नाम पर हिंडालको कर रही खानापूर्ति।

अमित सिंह/कुसमी/ हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड खान प्रभाग सामरी के द्वारा विगत 20 वर्षों से सामरी क्षेत्र में उत्खनन का कार्य कर रही है वर्तमान में अभी कुदाग के बाला पानी, बाटा, डूमर खोली, राजेंद्र पुर तो वही दूसरी ओर बांस टोली, खइंद पाठ , बेत पानी एवं टाटीझरिया में अपने अधीनस्थ अलग-अलग कंपनियों को उत्खनन कार्य एवं ट्रांसपोर्टिंग का जिम्मा दे रखी है।
हिंडालको कंपनी ने छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री के सामरी आगमन के कार्यक्रम से पूर्व मात्र दिखावा के लिए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय सेमरा वही टाटीझरिया के सुखवासी पारा के आंगनबाड़ी एवं पिपरा पाठ में हैंडपंप उत्खनन का कार्य कर रही है, यदि आंकड़ों की बात करें तो 20 वर्षों में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के द्वारा अपने उत्खनन क्षेत्र में आज तक 50 बोर भी नहीं खुदवा पाई है, वर्तमान से लेकर अभी तक कई उत्खनन क्षेत्रों में वहां के ग्रामीण पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, हमारे संवाददाता के द्वारा जब जीरो ग्राउंड रिपोर्ट पर जाकर लोगों की बुनियादी समस्याओं को जानना चाहा तो कई समस्याएं सामने आए जैसे हिंडालको के द्वारा जमीन बेचने वालों को नौकरी तो दी गई लेकिन वह भी माइनर अर्थात लेबर जो पत्थर फोड़ते हैं उनमें ही उनका नाम अंकित किया गया है बड़े पद पर हिंडाल्को के द्वारा लोकल स्तर में किसी भी ग्रामीण को अच्छे पद पर पदस्थ नहीं किया गया है । हिंडालको कंपनी के द्वारा प्रत्येक रविवार को भी माइनिंग का कार्य कराया जाता रहा है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के अगल-बगल से बेरोजगार युवा वर्ग जिनका माइनर में नाम नहीं है वह आकर ट्रकों को भरने का काम चंद रुपए कमाने के लिए वो भी बिना हेलमेट एवं जूते के यदि कोई घटना घट जाती है तो उसका जिम्मेदार कोन होगा ,जिसे प्रतिदिन रविवार को सभी माइंस क्षेत्र में देखा जा सकता है ।
इस संबंध में जब खान प्रबंधक विजय चौहान से संपर्क करना चाहा गया तो उनके द्वारा कई बार फोन रिसीव नहीं किया गया।
पेयजल की विकट समस्या की बात करे तो बेत पानी में किना के घर के पास ,पिपरा पाठ गांव में बिरजिया पारा में चुरहट खुर्द रोड में नल विगत 4 वर्षों से खराब है, टाटीझरिया पटेल के घर के पास एवं मलेरिया के घर के पास बीते 5 वर्षों से नल बंद पड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत बाटा के बंजू टोली पुराना पंचायत भवन के पास हैंडपंप बीते कई वर्षो से खराब है राजेंद्र पुर पंचायत में कामेश्वर के घर के पास एवं खास बांटा रूपन के घर के पास भी नल बीते 5 वर्षों से खराब है जिसकी सुधि लेने के लिए हिंडालको कंपनी के कोई भी अधिकारी वहां पर नहीं पहुंचे ,जैसे ही प्रदेश के यशस्वी मुखिया का कार्यक्रम सामरी में निर्धारित हुआ वैसे ही हिंडालको कंपनी के द्वारा अपनी गलती छुपाने के लिए छोटे-मोटे काम का ताना बाना बुनना जोरो पर है

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स्वास्थ्य सुविधाओं का भी है बुरा हाल।
हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के द्वारा सामरी में अस्पताल एवं टाटीझरिया में छोटा सा दवाखाना खोल रखा है इतने बड़े जगह में मात्र एक एमबीबीएस डॉक्टर एवं एक आरएमएस की स्थापना की गई है इससे अंदेशा लगाया जा सकता है कि इतने बड़े क्षेत्र में हिंडाल्को के द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए कितना सकारात्मक उपाय किया गया है।

20 वर्षों से कुसमी नगरवासी खा रहे हैं ट्रकों की धूल।

हिंडालको कंपनी विगत 20 वर्षों से उत्खनन का कार्य क्षेत्र में कर रही है ,प्रतिदिन दो सौ से ढाई सौ की संख्या में ट्रकों का आना जाना माइंस क्षेत्र में लगा रहता है जो कि मुख्यालय कुसमी से होकर ही गुजरती है , मुख्य मार्ग से गुजरते समय ट्रकों के द्वारा धूल का पूरा गुब्बारा सड़कों पर सुबह से लेकर शाम तक छाया रहता है ,वही एक ओर कई दुर्घटना मुख्य मार्ग पर घटित आए दिन होते रहते हैं तो स्वास्थ्य पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है खानापूर्ति के नाम पर हिंडालको के अनुदान द्वारा बाईपास सड़क का निर्माण कार्य कराया तो गया है लेकिन उसमें भारी वाहन ट्रकों का चलना असंभव है क्योंकि सड़क की चौड़ाई अत्यंत ही कम है । इन सभी बातों से अंदेशा लगाया जा सकता है की हिंडालको कंपनी क्षेत्र के विकास, विस्तार एवं जनजीवन के कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लाने में कितना सक्षम रही है, आज भी पाठ क्षेत्र के नगे सिया एवं बिरजिया जन जाति के लोगों का उत्थान नहीं हो पाया है और आज भी गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में ही जीवन यापन कर रहे हैं आखिर इसका जिम्मेदार कौन है ???जल ,जंगल और जमीन के हक की लड़ाई लड़ने वाले इन आदिवासियों को आज अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए भटकना पड़ रहा है और वही हिंडाल्को कंपनी अप्रत्यक्ष रूप से उनका शोषण किए जा रही है।

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