डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा छत्तीसगढ़ के सोनहा बिहान के स्वप्नदृष्टा थे: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर: डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा छत्तीसगढ़ के सोनहा बिहान के स्वप्नदृष्टा थे: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य-गीत के रचयिता डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को उनकी जयंती पर किया नमन

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रसिद्ध साहित्यकार, भाषाविद् और छत्तीसगढ़ राज्य-गीत के रचयिता डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को उनकी जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा को याद करते हुए कहा है कि डॉ. वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। कवि, चिंतक, उपन्यासकार, नाटककार, सम्पादक और मंच संचालक जैसी कई भूमिकाओं में उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। डॉ. वर्मा ने जो भी लिखा, वह लोगों की अंतरआत्मा में उतर गया। उनके हिंदी उपन्यास ‘सुबह की तलाश‘ जब छत्तीसगढ़ी में अनुवाद के बाद ‘‘सोनहा बिहान‘‘ के रूप में लोगों के बीच रंगमंच के माध्यम से पहुंचा, तब इसने आम लोगों में सुनहरी सुबह के साकार होने की आशा जगा दी। सही अर्थों में वे छत्तीसगढ़ के सोनहा बिहान के स्वप्नदृष्टा थे। उनका ओजपूर्ण व्यक्तित्व पल भर में लोगों को प्रभावित कर लेता था। अपने विचारों से उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को भी गहराई तक प्रभावित किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि डॉ. वर्मा ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाषा-अस्मिता को बनाए रखने और उसे पहचान दिलाने में महती भूमिका निभाई। ’अरपा-पइरी के धार, महानदी हे अपार……’ के रूप में उन्होंने अमर रचना दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ महतारी का वैभव जीवंत हो उठा है। अब यह गीत डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की पहचान और छत्तीसगढ़ का मान बन गया है। उनकी कलम से निकला यह गीत राज्य गीत के रूप में आज बस्तर से लेकर सरगुजा तक छत्तीसगढ़ वासियों की आत्मा का गान बन चुका है। छत्तीसगढ़ की ऐसी वंदना उनका सच्चा सपूत ही कर सकता है।
बघेल ने कहा डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा ने ‘‘छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य का उद्विकास‘‘ विषय पर शोध किया और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत संग्रह ‘अपूर्वा’, हिंदी उपन्यास ‘सुबह की तलाश’ जैसे कई ग्रंथों की रचना की। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ के जनजीवन तथा संस्कृति का सजीव चित्रण मिलता है। उनका लिखा ‘मोला गुरु बनई लेते छत्तीसगढ़ी प्रहसन’ अत्यंत लोकप्रिय हुआ। बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद किया जाता रहेगा।