Ambikapur : राजनीतिक एवं विकास के संवाद में बच्चों को मिले प्राथमिकता : श्याम सुधीर बंडी……….

राजनीतिक एवं विकास के संवाद में बच्चों को मिले प्राथमिकता : श्याम सुधीर बंडी……….

WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0
WhatsApp Image 2026-06-26 at 00.16.05 (1)

पी0एस0यादव/ब्यूरो चीफ/सरगुजा// राजनैतिक तथा विकास के संवाद में बच्चों को स्थान दिया जाये, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। इन विषयों को लेकर यूनिसेफ, छत्तीसगढ़ बाल अधिकार वेधशाला (सीसीआरओ) एवं सरगुजा संभाग की संस्थाओं ने एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन अम्बिकापुर के एवलॉन होटल में किया। इस संगोष्ठी में संभाग के सभी जिलों से विभिन्न धर्मों के प्रमुख, गांव एवं शहरों में कार्य करने वाले ओझा, गुनिया, बैगा सहित उन लोगों को आमंत्रित किया गया, जिनसे हमारे समाज के लोग प्रभावित होते हैं। इस संगोष्ठी में पत्रकार, जनप्रतिनिधियों, प्रोफेसर सहित कई अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों एवं प्रभावी लोगों को आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम को शुरू करते हुए सीसीआरओ सरगुजा के संयोजक चिराग सोशल वेलफेयर सोसायटी के मंगल पाण्डेय ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए कहा कि संगोष्ठी के माध्यम से समाज में बच्चों के प्रति एक माहौल बनाने की दिशा में बेहतर प्रयास करना है, जिसका मुख्य उद्देश्य है हमारे राजनीतिक संवाद में, विकास की कार्ययोजना में बच्चों के विषयों एवं बच्चों को प्राथमिकता दी जाये।

यूनिसेफ के श्याम सुधीर बंडी ने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए सर्वप्रथम बाल हितैषी ग्राम की परिकल्पना, बच्चों के लिये बने 54 अधिकारों तथा समाज में बच्चों को लेकर व्याप्त विषयों पर जानकारी दी गई। इस संगोष्ठी के माध्यम से श्याम सुधीर बंडी ने कहा कि हम बच्चों को लेकर, उनके विकास को लेकर क्या सोचते हैं। इस पर आज विचार करने हेतु एकत्रित हुए हैं। गांवों एवं शहरों के आप जैसे प्रभावी लोगों के आमंत्रित करने का उद्देश्य यह है कि समाज के लोग आपकी सुनते हैं, आपकी बातों को मानते हैं, वह चाहे धर्म से जुड़ा हो, जाति से जुड़ा हो, पारंपरिक लोक प्रचलन से जुड़ा हो अथवा ईलाज एवं रोग से जुड़ा हो। आप जो कहते हैं उसे जनसामान्य मानता है, सुनता है। इसलिये हमारा इस कार्यक्रम के जरिये आपसे अनुरोध है कि आप बच्चों के मुद्दों को लेकर समाज में बात करें। जैसे आपके पास जो भी वर्ग आता है, उससे उसके स्वास्थ्य की बात करें, उनके बच्चों की बात करें। आप जो भी पूजा-पाठ अन्य कार्य दवा-ईलाज करते हैं, उसके साथ-साथ उन्हें बच्चों के नियमित टिकाकरण, पोषण, गर्भवती महिलाओं के नियमित जांच, शिक्षा, चिकित्सा, विकास हर मामलों पर बात करें। हमारा उद्देश्य है कि बच्चों को सामने रख कर हमारी गांव के विकास का प्लान तैयार हो, हमारी सरकारें बच्चों के लिये सोचें। सिर्फ सड़क, पुल, पुलिया बनाने से विकास नहीं हो सकता, उस पर चलने वाले व्यक्ति का सर्वांगिण विकास चाहिए। बच्चें हमारे भविष्य हैं।

नवभारत के ब्यूरो चीफ सुधीर पाण्डेय ने कहा कि जब बच्चों के सर्वांगिण विकास की बात की जा रही है, तब नैतिक शिक्षा भी जरूरी चीज है। आज हम अपने बच्चों को अपनी संस्कृति के मुताबिक कितना नैतिक रूप से हर मामले में जिम्मेदार बना पा रहे हैं, यह हम सब की जिम्मेदारी है। पहले हम सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे, प्राईवेट स्कूल का ज्यादा चलन नहीं था, हर वर्ग के लोग एक साथ बैठ कर पढ़ना, खाना, खेलना, घुमना सब करते थे। गरीब-अमिर का भेदभाव नहीं था। किन्तु अब सरकारी एवं प्राईवेट स्कूल, कोचिंग जैसे कई चिजों में बंट गये हैं, जहां से अमिर-गरीब का भेदभाव शुरू हो गया है। अब इन चिजों का बदल पाना संभव नहीं है, लेकिन सुधार की दिशा में नियमित प्रयास करना बेहद जरूरी है। नई दूनिया के ब्यूरो चीफ अनंगपाल दीक्षित ने कहा कि बच्चों के सर्वांगिण विकास की जब बात की जाती है तो मेरा मानना है कि लड़का हो अथवा लड़की उसको सर्वप्रथम घर से ही प्रताड़ना मिलती है। वह ऐसे कि बच्चा चाहता है आर्टस लेना हम उसे जबरदस्ती सांईस लेने का दबाव डालते हैं और कोटा भेज रहे हैं। बच्चा चाहता है डॉक्टर बनना हम उसे जबरदस्ती पीएससी, यूपीएससी करने का दबाव डालकर कोचिंग में भेज रहे हैं। बच्चा दबाव में पढ़ रहा है कि उसका मन नहीं है, उसके मन मुताबिक नहीं है फिर भी जबरदस्ती पढ़ रहा है।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)

जब बच्चों के मामलों में हम शोषण एवं प्रताड़ना की बात करते हैं तो सबसे बड़ी प्रताड़ना तो यही है, बाकि बाहर बाद में कुछ होता है। बच्चों के लिये सरकार की तमाम योजनायें हैं, लेकिन हमारी निगरानी सिस्टम फेल है, क्योंकि हम स्वयं कुछ करना नहीं चाहते, हमें स्वयं निगरानी करनी होगी तभी योजनाएं अच्छी चलेंगी। ब्राम्हण समाज की ओर से कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने ग्रामीण पृष्ठ भूमि के कई समसामयिक विषयों पर नज़र डालते हुए एनिमिया, बाल विवाह एवं लड़कियों के पढ़ाई जल्द छोड़ने जैसे विषयों पर बात कि तथा कहा कि इस कार्य के बेहतर क्रियान्वयन में यहां आये हुए प्रभावी लोगों के माध्यम से अपने मैसेज को समाज तक पहुंचाना बेहतर कार्यक्रम है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रजापति ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सरगुजा की विद्या बहन ने नैतिक शिक्षा के पाठक्रम संचालित करने की दिशा में चर्चा करते हुए कहा कि आधुनिकता के दौड़ में हम इतने व्यस्त हैं कि बच्चों के लिये सबकुछ जुटाने हेतु लालायीत तो हैं, लेकिन उनका व्यवहार अच्छा हो, उनका कर्म अच्छा हो इसकी भी शिक्षा उन्हें दी जाये, यह भी मां-बाप एवं इस समाज की जवाबदेही है।

कार्यक्रम में गांवों से पहुंचे ओझा, गुनिया, बैगा, देवार, पटेल, वैद्य सहित अन्यों ने अपने अनुभव सांझा किये तथा आगामी समय में महंगी शिक्षा को लेकर गांव में मां-बाप को होने वाली परेशानियों पर भी प्रकाश डाला साथ ही शिक्षा व्यवस्था एक जैसा रखने के भी सुझाव दिये। इस दौरान सीसीआरओ छत्तीसगढ़ के प्रभारी मनोज भारती ने बच्चों के साथ घर एवं समाज में होने वाले शोषण को लेकर अपनी बात रखी और चाईल्ड हेप्ल लाईन नम्बर सहित गुड-टच एवं बेड टच की जानकारी भी सांझा की। सेवा भास्कर के उमाशंकर पाण्डेय ने कहा कि बेहतर समाज के निर्माण में हमारे गांवों के इन प्रभावी लोगों की विशेष भूमिका है, जिन्हें आज हमने यहां बुलाया है। जो वैद्य, ओझा, गुनिया, पटेल, देवार यहां हैं, इनके पास गांव के लोग तो अपने समस्या के निदान हेतु आते ही हैं, साथ ही त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्था के प्रतिनिधियों से लेकर विधायक और सांसद तक इनके पास आते हैं, क्योंकि ये एक बड़े वोट बैंक को प्रभावीत करते हैं। ऐसे में यदि ये किसी बात को समाज में एवं निति निर्धारण करने वाले जनप्रतिनिधियों को बोलेंगे तो उसका असर हम सबके बात से ज्यादा होगा।

इसलिये यह संगोष्ठी कई मायने में अच्छी है और बच्चों के लिहाज़ से बेहतर है। कार्यक्रम के समापन में आभार प्रदर्शन करते हुए सरगुजा साइंस ग्रुप के अंचल ओझा ने विश्व बाल दिवस को लेकर यूनिसेफ एवं सीसीआरओ द्वारा आयोजित बच्चों को लेकर 5 अलग-अलग कार्यक्रमों की जानकारी दी। राहुल मिश्रा ने बाल विवाह के मुद्दे पर समाज एवं धर्म प्रमुखों से बात की और उनका सहयोग मांगा। कार्यक्रम में सभी धर्मों एवं समाज के लोगों की भागीदारी एवं उपस्थिति रही। इस दौरान प्रोफेसर डॉ पीयूष पांडेय, पं. राधारमण पाण्डेय, सरदार नवराज सिंह बाबरा, सरदार महेन्द्र सिंह टूटेजा, एल्डरमैन इन्द्रजीत सिंह धंजल, एमसीसीआर से डी श्याम कुमार, छत्तीसगढ़ प्रचार एवं विकास संस्थान से अमृतलाल प्रधान, मुस्लिम महिला लोक सेवा समिति से सुल्ताना सिद्दीकी, सरस्वती विश्वकर्मा ने भी अपने अनुभव सांझा किये। इस दौरान एमसीसीआर से अमित सिंह, राजेश सोनी, अंजुलेश लकड़ा, जितेन्द्र बिन्दु सहित कई संस्थाओं के पदाधिकारी एवं गांव से आये हुए वैद्य, ओझा, गुनिया, पटेल, देवार सहित अन्य उपस्थित थे।