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अक्ति : कृषि का नव वर्ष….

अक्ति : कृषि का नव वर्ष….
छत्तीसगढ़ में जो अक्ति (अक्षय तृतीया) का पर्व मनाया जाता है, उसे कृषि के नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। पुतरा-पुतरी का बिहाव या उस दिन विवाह के लिए अखण्ड शुभमुहुर्त जैसी बातें तो उसका एक अंग मात्र है। वैसे पुतरा-पुतरी का इस दिन बच्चों के द्वारा विवाह करने के संबंध में एक धारणा यह है, कि बच्चों के अंदर गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों के प्रति बचपन से ही अहसास कराना, ताकि परिपक्व अवस्था आने पर वे आसानी से इस दायित्व का निर्वहन कर सकें.

हमारे यहां इस दिन किसान अपने-अपने खेतों में नई फसल के लिए बीजारोपण की शुरूआत करते हैं। इसे यहां की भाषा में “मूठ धरना” कहा जाता है। इसके लिए गांव के सभी किसान अपने यहां से धान का बीज लेकर एक स्थान विशेष पर एकत्रित होते हैं, जहां गांव का बैगा उन सभी बीजों को मिलाकर मंत्र के द्वारा अभिमंत्रित करता है, फिर उस अभिमंत्रित बीज को सभी किसानों में अापस में बांट दिया जाता है। कृषक इसी बीज को लेकर अपने-अपने खेतों में ले जाकर उसकी बुआई करते हैं।

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जिन गांवों में बैगा द्वारा बीज अभिमंत्रित करने की परंपरा नहीं है, वहां कृषक अपने बीज को कुल देवता, ग्राम देवता आदि को समर्पित करने के पश्चात बचे हुए बीज को अपने खेत में बो देता है। बीज बोनी यह का कार्य दिन में ही संपन्न कर लिया जाता है. फिर इसी दिन शाम को कृषि तथा पौनी- पसारी से संबंधित कामगारों की नई नियुक्ति भी की जाती है। इसके साथ ही इस दिन से कई अन्य कार्य की भी शुरूवात की जाती है। जैसे कई लोग नए घड़े में पानी पीना प्रारंभ करते हैं, कई लोग आम जैसे अन्य मौसमी फलों को इसी दिन से तोड़ने या खाने की शुरूवात करते हैं।

अक्ति म ढाबा भरे के घलो रिवाज हवय. किसान मन ए दिन अपन अंगना म गोबर के तीन ठिक खंचवा बनाथें जेला ढाबा कहे जाथे. ढाबा म धान , उन्हारी, जैसे-तिंवरा या राहेर अउ पानी भरे जाथे उहू म टिपटिप ले फेर ओकर आगू म हूमधूप देके पूजा करे जाथे तेकर बाद फेर बीजबोनी टुकनी म बीजहा, कुदारी, आगी पानी हूमधूप धर के खेत म बोंवाई के मूठ धरे जाथे। घर के देवाला म नवा फल ल नवा करसी के पानी ल चढ़ाय जाथे ।अउ अपन पुरखा मन ल सुरता कर के तरिया या नंदिया म उराई गड़ा के नवा करसी या फेर तांबा के चरु म पानी डारथें अउ पितर पुरखा मन ल पानी देहे जाथे अर्थात पितर तरपन वाला पानी दे जाथे.

अक्ति आगे घाम ठठागे चलव जी मूठ धरबो
हमर किसानी के शुरुवात सुम्मत ले सब करबो
बइगा बबा पूजा करके पहिली सबला सिरजाही
फेर पाछू हम ओरी-ओरी बिजहा ल ओरियाबो

* सुशील भोले संजय नगर रायपुर

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