गरियाबंद : आंगनबाड़ी में मिले अंडा, चिक्की, मूंग, चना एवं पौष्टिक आहार ने किया कमाल

गरियाबंद : आंगनबाड़ी में मिले अंडा, चिक्की, मूंग, चना एवं पौष्टिक आहार ने किया कमाल

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मुख्यमंत्री सुपोषण योजना से हर्षिता हुई सुपोषित

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महिलाओं एवं बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का संचालन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से अंडा, चिक्की, मूंग, चना, फल्लीदाना, गरम पका भोजन एवं अन्य पौष्टिक आहार का वितरण किया जा रहा है। इसके माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों को कुपोषण से उबरने में मदद मिल रही है। इसी कड़ी में फिंगेश्वर की तीन वर्षीय बालिका हर्षिता भी आंगनबाड़ी में मिले पौष्टिक आहारों के मदद से कुपोषण से मुक्त हो गई। हर्षिता पहले मध्यम कुपोषित वर्ग में थी, जो आज योजना का लाभ उठाकर मध्यम कुपोषित से मुक्त होकर सामान्य स्थिति में आ गई है।
ग्राम पंचायत किरवई में जन्मी हर्षिता तारक का वजन जन्म के समय 2.500 किलो ग्राम था। जन्म के बाद से ही बच्ची कमजोर होने लगी। मुख्यमंत्री सुपोषण योजना प्रारंभ के समय बच्ची की उम्र 2 वर्ष 4 माह की थी एवं वजन 7.800 किलो ग्राम था। इस दौरान बच्ची मध्यम श्रेणी कुपोषण वर्ग में थी । बढ़ती उम्र के साथ बच्ची का वजन नहीं बढ़ रहा था। घर में कुछ भी खाने में रूचि नहीं दिखा रही थी। मुख्यमंत्री सुपोषण योजनांतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती पुष्पलता कापसे द्वारा बच्ची को प्रतिदिन मीन्यू अनुसार गरम भोजन प्रदाय किया गया। भोजन में उन्हे प्रतिदिन चांवल, दाल, रोटी, हरी सब्जी, सोयाबीन बड़ी, अण्डा, अंकुरित मूंग, चना, फल्लीदाना का बना चिकी, आचार आदि दिया गया। साथ ही बाल संदर्भ शिविर में स्वास्थ जांच कराकर दवाई प्राप्त कर समय से सेवन कराया गया। प्रतिदिन गृह भेंट कर पोषण आहार व दवाई सेवन की निगरानी की गई। आईएलए प्रशिक्षण में पोषण संबंधी जानकारी एएनएम, मितानीन के साथ सामूहिक रूप से गृह भेंट के माध्यम से पालक को दी गई। इसके अलावा बच्ची को झिल्ली बंद (बाहरी चीज) न खिलाने तथा केवल घर का बना गरम भोजन खिलाने के लिए निर्देशित किया गया। इनसे बच्चे के वजन और ऊचांई में सुधार आया। वर्तमान में कु. हर्षिता तारक का वजन 11 किलो 100 ग्राम, ऊचांई 88 सेन्टीमीटर व ग्रेड सामान्य श्रेणी में है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत 15 से 49 आयु वर्ग के एनीमिक महिलाओं/गर्भवती तथा 02 से 03 वर्ष के कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से पौष्टिक गरम भोजन प्रदाय किया जा रहा है। जिससे कुपोषण को हराने में हितग्राहियों को मदद मिल रहीं है।