
खरोरा:—–आज 24 तारीख 2021 दिन शनिवार सुबह की बात है मै रविशंकर निषाद ग्राम बंगोली और मेरे मित्र योगेश निषाद ग्राम भरूवाडीह (कला)हम दोनों अपने कार्य पर जा रहे थे उसी समय रास्ते में एक बुजुर्ग आदमी मिला जो रोड पर चलती फिरती एक -दूसरे से सहायता मांग रहा था पर मनावता को शर्मसार करते हुए और दूसरे तरफ देखा जाए तो कोरोना के कहर (डर) से लोग एक -दुसरे का मदद करने को तैयार नही हो रहा है ।और उसी समय हम दोनों भी उसी रास्ते से अपने -अपने काम पर जा रहे थे। तो उस बुजुर्ग आदमी जिसका नाम फिरंता है जो कि सतनामी समाज का एक बुजुर्ग सदस्य है ,और ग्राम पचेड़ा का निवासी है। जो कि बहुत ही दुखी और असहाय नजर आ रहा था उनकी पीड़ा को देखकर हमें सहन नहीं हो पाया और जैसे बना हमने हमारे तरफ से उस बुजुर्ग का मनोबल को बड़ाते हुए उसके खाने के लिए व्यवस्था किया गया। जिससे उसके चेहरे पर खुशी नजर आया और हमे भी अपने आप में बहुत ही शांति महसूस हूवा,
हमारा प्रेस विज्ञप्ति करके किसी को ताना देना उद्देश्य नही है बल्कि जो सत्य है उसी को बता रहे हैं
जिस तरह बचपन मे हमे अपने-अपने माता -पिता का उंगलियों को पकड़ कर चलने की हमेशा चाहत रहता है और हम बचपन में जिस प्रकार जिद्दी रहते हैं ठीक उसी तरह बुढ़ापे में मा-बाप का होता हैं
और हाँ जिस प्रकार हमे अपने बच्चो पर जो प्रेम और दर्द होता है ठीक उसी तरह हमारे मां -बाप भी हम से उतना ही चाहत रखते हैं , इस बात का हमेशा ध्यान रखे।
लोगों से हम यह कहना चाहते कि इस लॉकडाउन में इतना भी डिस्टेंस मत रखो की किसी का जान ही चले जाए ।दुरी रखना है तो बिमारी से रखो बीमार से नहीं।
और माननीय मुख्यमंत्री जी से मेरा निवेदन है कि जितने भी बुजुर्ग है उसके पेंशन को उसके घर जाकर उसी के हाथों दिया जाए जिससे वह उस पैसे से अपने शरीर को स्वस्थ बनाने मे कुछ सहयोग हो सके कभी -कभी एक गरीब परिवार में एक रुपये भी नहीं होता उस समय उस पैसे का सही उपयोग हो सके।
जिस तरह चुनाव के समय ऐसे बुजुर्ग लोगों को वोटिंग के लिए गाडियो द्वारा लाया जाता है उसी तरह पेंशन लेने के लिए भी उसी तरह का व्यवस्था किया जाना चाहिए ।
लॉकडाउन मे पहले आदमी का हालात देखकर उनकी राशन की व्यवस्था कीजिए तथा सरकार उसके बाद जितना चाहे वो देश में 2 साल 4 साल 5 साल तक लॉकडाउन करना चाहते हो तो आप कर सकते हो उसमें कोई आपत्ति नहीं है । और हम लॉकडाउन का पालन करने के लिए भी तैयार है। सरकार से विनम्र निवेदन है कि किसी की तकलीफ को समझने की कोशिश करें। लॉकडाउन में सबसे पहले काम सभी के लिए राशन की व्यवस्था करना रहना चाहिए।
एक बात और जब हम ही बुढ़ापे में मां-बाप का सहारा नही बन सकते तो हमारा बुढ़ापा आने पर हमें अपने बच्चो से सहारा का उम्मीद भी नहीं रखना चाहिए
उदाहरण हम सब के सामने है :-जब हम ही वृक्ष लगा नहीं सकते तो बीना वृक्ष के आक्सीजन का उम्मीद क्यो करे और उसका नतीजा आज हमारे सामने है
हम प्लान्ट लगाये है तो प्रदुषण प्राप्त कर रहे हैं अगर वृक्ष लगाते तो आक्सीजन ग्रहण करते
कहावत है न जैस बोयेन्गे वैसा ही पायेन्गे
अब तो प्राकृतिक भी जवाब दे दिया है ।चलो अब तो सुधर जाये और एक संकल्प करे आओ मिलकर वृक्षा रोपण करे और हम सब स्वस्थ रहे और निरोगी रहे अपने और आने वाले अपने बच्चो की ज़िन्दगी को सुरक्षित बनाये।
समाज सेवी संस्था संजीवनी रक्तदाता संघ परिवार के हम सभी सदस्य आपसे यही विनती करते हैं ।कि आने वाले समय में इस तरह कि समस्यो का तकलीफो सामना ना करना पड रहा है।
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