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अंबिकापुर: एनीमिया मुक्त सरगुजा अभियान के तहत शिक्षकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

अंबिकापुर: एनीमिया मुक्त सरगुजा अभियान के तहत शिक्षकों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण

अंबिकापुर, 20 फरवरी 2026/ एनीमिया मुक्त भारत – एनीमिया मुक्त सरगुजा अभियान के अंतर्गत बच्चों, किशोरों एवं महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम और नियंत्रण हेतु जिले के शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण स्वास्थ्य विभाग द्वारा शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को ने बताया कि अभियान का उद्देश्य 01 से 19 वर्ष तक के बच्चों एवं किशोरों, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं, गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में एनीमिया के प्रसार को प्रतिवर्ष कम करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों में एनीमिया की रोकथाम में विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए जिले के सभी विकासखंडों के शिक्षकों को शत-प्रतिशत प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा अधिकारी सरगुजा के निर्देशन में आयोजित किया गया।

स्वास्थ्य विभाग के मास्टर ट्रेनर डीपीएम डॉ. पुष्पेन्द्र राम एवं सिकल सेल नोडल अधिकारी डॉ. श्रीकांत सिंह चौहान द्वारा अंबिकापुर, लखनपुर एवं उदयपुर विकासखंडों के प्राथमिक, माध्यमिक एवं हाई स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा व्याख्याताओं को प्रशिक्षण दिया गया।

क्या है एनीमिया और इसके लक्षण

डॉ. पुष्पेन्द्र राम ने बताया कि एनीमिया वह स्थिति है जब शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, जिससे शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती। सामान्य भाषा में इसे खून की कमी कहा जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में लगातार थकान, कमजोरी, सांस फूलना, त्वचा व नाखूनों का पीलापन, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना और हाथ-पैर ठंडे रहना शामिल हैं। इसके प्रमुख कारणों में आयरन, विटामिन-B12 एवं फोलेट की कमी, अत्यधिक रक्तस्राव और कुछ बीमारियां हैं।

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एनीमिया से बचाव के उपाय

डॉ. श्रीकांत सिंह चौहान ने बताया कि बच्चों को आयरन युक्त आहार जैसे पालक, मेथी, दालें, सोयाबीन, अंडा, मांस, मछली तथा विटामिन-C युक्त फल जैसे नींबू, संतरा एवं आंवला का सेवन कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुड़-चना, चुकंदर एवं अनार हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक होते हैं तथा आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह से आयरन एवं विटामिन-B12 की गोलियां ली जानी चाहिए।

स्कूलों में विशेष निर्देश

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को मिड-डे-मील में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें एवं विटामिन-C युक्त फल शामिल करने, बच्चों में संतुलित आहार की आदत विकसित करने तथा भ्रांतियां दूर करने के संबंध में जानकारी दी गई।

साथ ही एनीमिया मुक्त भारत रणनीति के तहत स्कूलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड (WIFS) गोलियां — किशोरों के लिए नीली एवं बच्चों के लिए गुलाबी — के सुरक्षित सेवन की जानकारी भी दी गई।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिरायु दल के माध्यम से विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं तथा खून की कमी की आशंका होने पर सीबीसी जांच कराने की सलाह दी गई। प्रशिक्षण में शिक्षकों से अपील की गई कि वे बच्चों को भोजन के बाद ही आयरन की गोली लेने और संतुलित आहार अपनाने के लिए प्रेरित करें, ताकि सरगुजा जिले को एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।

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