बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का काला चिठ्‌ठा: रमन सरकार के कार्यकाल में 34 घोटाले, मोदी सरकार से पूछे 85 सवाल

रायपुर। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय आंडिटोरियम में भूपेश सरकार के खिलाफ आरोप पत्र जारी करने वाले है। लेकिन उससे पहले कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई ने बीजेपी का काला चिठ्टा जारी किया है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने मोदी सरकार के नौ साल और छत्तीसगढ़ की रमन सरकार के 15 साल के कार्यकाल का काला चिठ्टा जारी किया।

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12 पेज के काले चिठ्टे में मोदी सरकार से 85 सवाल पूछे गए है और मोदी सरकार के कुशासन एवं जन विरोधी फैसले की 26 फेहरिश्त को शामिल किया गया है। इसी तरह से काला चिठ्टा में छत्तीसगढ़ के रमन सरकार के कार्यकाल के 34 घोटाले को शामिल किया गया है जबकि रमन सिंह सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ के शोषण की 54 फेहरिश्त को शामिल किया गया है। इसी तरह से काला चिठ्टा में भाजपा किसान, आदिवासी, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग विरोधी करार दिया गया है।

काला चिठ्टा की फेहरिश्त इस प्रकार हैः-मोदी के कुशासन एवं जन विरोधी फैसले

1. देश के 14 प्रधानमंत्रियों के कुल मिलाकर 67 साल में कुल 55 लाख करोड़ कर्ज लिया था। पिछले 9 साल में नरेन्द्र मोदी ने देश पर कर्जा 3 गुना कर दिया। 100 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज केवल मोदी ने लिया है। 2014 में देश पर कुल कर्ज 55 लाख करोड़ था जो अब बढ़कर 155 लाख करोड़ से अधिक हो गया है।

2. डीजल पर सेंट्रल एक्साइज 2014 में 3.54 पैसा था जिसे मोदी सरकार ने बढ़ाकर 31 रू. तक पहुंचा दिया। 410 का सिलेंडर 1100 के पार केवल पेट्रोलियम उत्पाद से 30 लाख करोड़ से अधिक अतिरिक्त मुनाफाखोरी। केंद्र की मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज के रूप में देश की आम जनता की जेब से 30 लाख करोड़ की डकैती की।

3. रूपये का सर्वाधिक अमूल्यन मोदी राज में हुआ। एक डॉलर की कीमत 2014 में 59 रू. थी जो आज बढ़कर 83 रू. हो गया है। अर्थात 41 प्रतिशत अमूल्यन केवल मोदी राज में। मोदी जी कहते थे रुपये का मूल्य जितना गिरता है उतना केंद्र की सरकार भ्रष्ट होती है।

4. चंद पूंजीपति मित्रों के 18 लाख करोड़ से अधिक का लोन राईट ऑफ कर दिये लेकिन किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी-2 फार्मूले पर 50 प्रतिशत लाभ का वादा करके भूल गये।

5. सेंट्रल एक्साइज जैसे केंद्रीय करो में कमी कर उसी अनुपात में सेस लगाया ताकि राज्यों को उसका हिस्सा न देना पड़े मोदी सरकार की नीतियां सहकारी संघवाद और राज्यों के आर्थिक हितों के खिलाफ।

6. अडानी की कंपनी ने लगाये गये फर्जी सेल कंपनियों के 20 हजार करोड़ किसके है?

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7. किसके दबाव में कंपनी एलआईसी और एसबीआई का पैसा अडानी की डूबती कंपनी में लगाया।

8. तमाम केंद्रीय योजनाओं में केंद्रांश कम करके राज्यांश बढ़ाया अर्थात राज्यों में अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया।

9. छत्तीसगढ़ उत्पादक राज्य है। जीएसटी लागू होने के बाद उत्पादक राज्यों को होने वाली क्षतिपूर्ति की भरपाई 30 जून 2022 से बंद कर दी गयी। लेकिन क्षतिपूर्ति की भरपाई के लिये वसूला जाने वाला जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस मोदी सरकार 31 मार्च 2026 तक वसूलेगी। उत्पादक राज्यों की उपेक्षा क्यों?

10. केंद्र की मोदी सरकार ने पहले नोटबंदी फिर गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) फिर कोविड मिस मैनेजमेंट से पूरे देश की अर्थव्यवस्था का बंटाधार कर दिया।

11. केंद्र की मोदी सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिये देश के अन्नदाता किसानों पर कृषि के 3 काले कानूनों को थोपने का प्रयास किया। देश के किसान 1 साल से ज्यादा समय तक सड़कों पर आंदोलन करते रहे, कभी उन्हें अरबन नक्सली, आतंकवादी और पाकिस्तानी जैसे शब्दों से संबोधित कर अपमान किया गया। जब देश के 750 किसान परिवारों ने अपने परिवार के 1 सदस्य को खोया तब जाकर केंद्र की मोदी सरकार नींद से जागी।

12. वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को शिथिल कर आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन से वंचित करने केंद्र की मोदी सरकार षड़यंत्र रच रही है।

13. केंद्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण भारत देश भूखमरी इंडेक्स में पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका से भी पिछड़ चुका है। महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता शिखर पर पहुंच चुका है।

14. यूपीए सरकार में देश के 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आये। जबकि केंद्र की मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण 23 करोड़ लोग मध्यम वर्ग से गरीबी रेखा के नीचे चले गये।

15 दैनिक उपभोग की वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाकर आम जनता से बेरहमी से कर वसूली करके कुल कर संग्रहण तो 3 गुना बढ़ा लिये लेकिन उसका लाभ और सुविधायें न राज्यों को, न ही आम जनता को।

16. 10 दिन के भीतर अडानी की कंपनियों में निवेशकों के 15 लाख करोड़ की अधिक की राशि कैसे लूट गये? किसके संरक्षण में अडानी की कंपनियों एसेट बढ़ाकर बताये गये।

17. अपने पूंजीपतियों मित्रों के लाभ के लिये पहली बार देश में कमर्शियल माइनिंग मोदी सरकार ने प्रारंभ किया। कोल इंडिया लिमिटेड और एसईसीएल जैसे सरकारी कंपनियों और नवरत्न कंपनियों में खनन का काम अडानी को किसके दबाव में दिया गया।

18. भूपेश सरकार ने 27 जुलाई 2022 को हसदेव अरण्य के पांच कोल ब्लॉक आवंटन निरस्त करने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र की मोदी सरकार को भेजा है। विगत एक वर्ष से मोदी सरकार खामोश क्यों है?

19. यूपीए के समय तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य और तमोर पिंगला को अति जैव विविधता महत्वपूर्ण क्षेत्र मानते हुये नो गो एरिया घोषित कर खनन गतिविधियां प्रतिबंधित की गयी थी। जिसे मोदी सरकार ने संकुचित कर माइनिंग शुरू कराया।

20. कोरोना महामारी के समय अपने पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने श्रम विरोधी दर्जनों कानून सदन में बिना चर्चा के ही पारित कर दिये।


21. 2 दिसंबर 2022 से 76 प्रतिशत आरक्षण विधेयक विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर राजभवन भेजा गया है, 9 माह से आखिर किसके इशारे पर और किसके दबाव में रोका गया है?

22. सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार द्वारका एक्सप्रेसवे 18 करोड़ रुपये प्रति किमी की लागत से बनना था, लेकिन मोदी सरकार ने इसकी लागत बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये प्रति किमी कर दी।

23. भारत माला प्रोजेक्ट के तहत 75 हजार किमी सड़क बन रही है। ये सड़क 15 करोड़ प्रति किमी की लागत से बननी थी,लेकिन मोदी सरकार ने लागत 15 से 25 करोड़ रुपये प्रति किमी बढ़ाकर 7.5 लाख करोड़ रुपये का घोटाला किया और अधिकांश काम अडाणी की कंपनियों को दे दिया।

24. जनवरी 2015 से मार्च 2022 के बीच स्वदेश दर्शन योजना का ऑडिट किया था, जिसकी रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश की गई और कहा गया कि छह राज्यों की छह परियोजनाओं में ठेकेदारों को 19.73 करोड रुपये का गलत तरीके से लाभ दिया गया। अयोध्या स्वदेश दर्शन योजना के तहत रामायण सर्किट का हिस्सा है। इसके लिए 27 सितंबर 2017 को 127 करोड़ 21 लाख का बजट मंजूर हुआ था। इसमें से 115 करोड़ रुपये अभी तक जारी किए जा चुके हैं।

25. एनएमडीसी द्वारा निर्मित नगरनार स्टील प्लांट जिससे बस्तर के लोगों की सीधी भावनायें जुड़ी हुई है उसे केंद्र सरकार अपने मित्र अडानी को सौप कर निजीकरण करने की साजिश कर रही है। इसके अलावा एसईसीएल की 80 प्रतिशत से अधिक खदानों को पूंजीपति मित्र अडानी को सौपने की पूरी तैयारी कर चुकी है।

26. छत्तीसगढ़ में केंद्र की मोदी सरकार अपने मुनाफे और पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिये यात्री ट्रेनों के बजाय कोयले परिवहन को प्राथमिकता देते हुये लगातार बिना किसी पूर्व सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के ट्रेनों को लगातार रद्द कर रही है। भाजपा के नौ लोकसभा सांसद केंद्र की मोदी सरकार के सामने छत्तीसगढ़ की हकों की बात करने में पूरी तरह असमर्थ है।