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कोयला चोरी के तथ्यों को छिपा रहा खनिज विभाग, कोल डिपो में 50 हजार टन की जगह मिला 5 हजार टन

रायगढ़ जुलाई 2022 में राज्य सरकार की ज्वाइंट टीमों ने जिले के छह कोयला भंडारण अनुज्ञप्तिधारकों की जांच की थी। इसकी फाइल अब जाकर निकाली गई है। दो कोल डिपो में सबसे ज्यादा गड़बड़ी मिली है। बताया जा रहा है कि अब नोटिस के बाद मामले में सांठगांठ का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के कोयला कारोबारियों पर आयकर विभाग की छापेमारी के कुछ दिनों बाद राज्य सरकार ने भी ज्वाइंट टीम बनाकर कोयला भंडारण लाइसेंसियों के यहां जांच की थी। कोल डिपो और कोल वॉशरीज में जांच हुई थी। करीब सात दिनों तक जांच की गई जिसमें भारी अनियमितता पाई गई।

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इसकी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर जिला खनिज विभाग को सुपुर्द कर दी गई। इस रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। रायगढ़ में केएल एनर्जी देहजरी, भाटिया एनर्जी छोटे डुमरपाली खरसिया, शिव शक्ति स्टील चक्रधरपुर रायगढ़, नवदुर्गा फ्यूल्स बरपाली तमनार, सारडा एनर्जी तमनार और फिल कोल बेनीफिकेशन नवापारा टेंडा में जांच की गई थी।

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सूत्रों के मुताबिक केएल एनर्जी और फिल कोल में ऑनलाइन रिकॉर्ड में हजारों टन कोयले का स्टॉक दिख रहा था, लेकिन मौके पर उसका दस प्रतिशत भी नहीं था। जमीनों के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी मिली थी। कोयले के स्टॉक में भारी हेराफेरी सामने आई थी। रिपोर्ट में सभी तथ्य दर्ज किए गए थे। अब खनिज विभाग के पास मामला लटका हुआ है।

▪️जांच के बहाने सांठगांठ की कोशिश

सूत्रों के मुताबिक छह कोल भंडारण की जांच के बाद छह महीने तक फाइल दबाकर रखी गई है। जिस तरह की अनियमितता पाई गई है, वह लाइसेंस निरस्त करने के लिए काफी है। उप संचालक खनिज योगेंद्र सिंह ने अब सहायक खनिज अधिकारी प्रवीण चंद्राकर को जांच का जिम्मा दिया है। इधर कोल डिपो संचालक सांठगांठ में लग गए हैं। जांच के तथ्यों को नजरअंदाज करने का प्रयास किया जा रहा है।

▪️लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के करीब

छह में से तीन वॉशरीज की लाइसेंस अवधि 2023 में ही समाप्त होने वाली है। केएल एनर्जी, फिल कोल बेनीफिकेशन और भाटिया एनर्जी की अनुज्ञप्ति अवधि समाप्त होने के बाद दोबारा अनुमति के लिए आवेदन किया जा रहा है। हैरत की बात है कि जिसका लाइसेंस निरस्त होना चाहिए, उसे दोबारा अनुमति दी जा रही है।

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