साधारण गृहिणी से सफल उद्यमी बनने तक का सफर : मेहनत और लगन से आत्मनिर्भर बनीं सुरेखा

सफलता की कहानी

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महतारी वंदन योजना की राशि से भविष्य गढ़ने की कवायद

उत्तर बस्तर कांकेर/ नरहरपुर ब्लॉक के सरोना गांव में रहने वाली श्रीमती सुरेखा साहू ने अपनी मेहनत और लगन से एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। साधारण गृहिणी से लेकर एक सफल उद्यमी बनने तक का सफर सुरेखा ने अपने पति के सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प से तय किया है।

शिक्षा और परिवार से मिला आगे बढ़ने का सहारा

सुरेखा ने केवल 12वीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन शिक्षा की अहमियत को समझते हुए उन्होंने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने का संकल्प लिया। उनके परिवार में कुल छह सदस्य हैं, जिनमें उनके दो बच्चे भी शामिल हैं, जो अभी कक्षा 7वीं में पढ़ाई कर रहे हैं।

पति का सहयोग बनी प्रेरणा

सुरेखा के पति ने न केवल उन्हें पढ़ने-लिखने में मदद की, बल्कि फोटो फ्रेमिंग, फोटो एडिटिंग और फोटोग्राफी का हुनर भी सिखाया। दोनों ने मिलकर सरोना गांव में एक फोटो स्टूडियो की शुरुआत की। उनकी टीमवर्क और मेहनत का नतीजा है कि आज यह फोटो स्टूडियो उनकी आय का मुख्य स्रोत बन चुका है।

20-25 हजार की मासिक आय

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सुरेखा और उनके पति की मेहनत का नतीजा है कि वे अपने फोटो स्टूडियो से हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक कमा लेते हैं। यह आय न केवल उनके परिवार का पालन-पोषण करती है, बल्कि उनके बच्चों की शिक्षा और भविष्य की तैयारी में भी मददगार है।

भविष्य सहेजने का जरिया बनी महतारी वंदन योजना

श्रीमती सुरेखा महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत समय पर राशि मिलती है, जिसे वह अपने व अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए उस राशि की बचत कर रही हैं। इसके लिए वह मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करती हैं।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल

सुरेखा साहू की कहानी यह दर्शाती है कि अगर मन में इच्छाशक्ति हो और परिवार का साथ मिले, तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। वह आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो अपनी मेहनत और कौशल के दम पर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। श्रीमती सुरेखा साहू की कामयाबी का यह सफर इस बात का प्रतीक है कि मेहनत और लगन से किसी भी मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है। उनके जैसे लोग आज देश के ग्रामीण इलाकों में विकास और सशक्तिकरण का नया अध्याय लिख रहे हैं।