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अम्बिकापुर नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत सड़क के किनारे खुलेआम बिना लाइसेंस, बिना जांच के रोज काटे जा रहे मुर्गे, भेड़, बकरे और सुअर

अंबिकापुर नगर निगम की लापरवाही का बड़ा खुलासा : आशीष सिन्हा RTI कार्यकर्ता

अम्बिकापुर नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत सड़क के किनारे खुलेआम बिना लाइसेंस, बिना जांच के रोज काटे जा रहे मुर्गे, भेड़, बकरे और सुअर

अम्बिकापुर// जब हमने यह जानना चाहा की अम्बिकापुर नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत शहर के साथ रिंग रोड़ में मुर्गे, भेड़, बकरे और सुअर कसाईयों की कुल कितनी ऐसी दुकान है। जिसमें मांस की विक्रय किया जाता है। दूकानों को लाईसेंस दी गई है। और कितनी बिना लाईसेंस की दुकान है। लाईसेंस बनाने में अनियमितता हुई हो तो संबंन्धित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही के जवाब में नगरनिगम के द्वारा कोई जवाब नही दिया गया !

सरकार ने मांस विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि किसी भी धार्मिक स्थान पर 100 मीटर की दूरी पर मांस की दुकान होनी चाहिए और पशु चिकित्सा अधिकारी काटे जाने वाले जानवर का स्वास्थ प्रमाणपत्र जारी करेंगे। मांस बिकने वाली दुकान कैसी होनी चाहिए, नियम कहते हैं कि दुकान में सही उपकरणों का उपयोग, 5 फीट की ऊंचाई तक टाइल्स लगी होनी चाहिए और पक्का फर्श होना चाहिए। अम्बिकापुर नगर निगम से जब हमने यह जानना चाहा तो कोई जवाब नही दिया गया !

नगर निगम अंबिकापुर क्षेत्रान्तर्गत शहर के साथ रिंग रोड़ क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्र में बिना लाइसेंस कसाईयों की मांस.मछली की दुकानें रोजाना लगती है अंबिकापुर क्षेत्रान्तर्गत में मांस विक्रेताओं द्वारा खुलेआम नियमों की धज्जी उड़ाई जा रही है अम्बिकापुर नगर निगम से जब हमने यह जानना चाहा तो कोई जवाब नही दिया गया!और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है!

नियमों का उल्लंघन करते हुए सड़क के किनारे खुलेआम दुकान लगाई जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी व्यक्ति लाइसेंस नहीं है। ऐसे में लाइसेंसी दुकानदारों द्वारा स्वच्छता के मानकों का पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। दुकान के अंदर और बाहर गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। स्वास्थ्य के लिए इन दुकानों से मीट खरीदना खतरनाक हो सकता है। बीमार और संक्रमित मांस अवैध दुकानों में बेचा जा रहा है। इसका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है। अम्बिकापुर नगर निगम से जब हमने यह जानना चाहा तो कोई जवाब नही दिया गया !

सरकारी आदेशों के बावजूद, नगर निगम ने अंबिकापुर क्षेत्र के रिंग रोड़ क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में वधशाला के स्थानों का चयन नहीं किया है. मांस विक्रेता सड़कों के किनारे मानक के विपरीत दुकान लगाकर मांस काट बेचते हैं और मांस के अवशेषों को नालियों में बहवा देते हैं, जिससे संक्रमित बीमारी फैलने का भय बना रहता है, लेकिन विभाग चुप है। अम्बिकापुर नगर निगम से जब हमने यह जानना चाहा तो कोई जवाब नही दिया गया !

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नगर निगम, पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर मांस दुकान का संचालन करते हैं। किसी अधिकृत बूचड़खाना में किसी जानवर को मार डाला जाता है वध करने से पहले और बाद में मांस खाने योग्य होने की जांच की जाती है। स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग को इसका प्रमाण पत्र देना होगा। नगर निगम, उनकी रिपोर्ट के आधार पर इसे मान्यता देता है। अम्बिकापुर नगर निगम से जब हमने यह जानना चाहा तो कोई जवाब नही दिया गया !

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के विनियम 2011 (2-1-2 (1) (5)) में मांस विक्रय के लिए लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन के नियम और शर्तों को निर्धारित किया है। संबंधित विभागों की एनओसी के साथ-साथ कारोबारी का मेडिकल सर्टिफिकेट सीएमओ, सीएमएस निर्गत करेंगे। मीट की दुकान किसी भी धार्मिक स्थान से 100 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए और पशु चिकित्सा अधिकारी काटे जाने वाले जानवर का स्वास्थ प्रमाणपत्र भरेंगे। नियमों के अनुसार, एक मांस बिकने वाली दुकान में 5 फीट की ऊंचाई तक टाइल्स लगानी चाहिए और पक्का फर्श और सफाई की आवश्यकता होती है। दुकान के अंदर पशु, बकरा, पक्षी, या मुर्गा हो, और गेट पर चिक और काले शीशे का दरवाजा हो, दुकान के अंदर पशु, बकरा, या पक्षी, मुर्गा नहीं काटा जाएगा.दुकान में एक डिप रेफ्रिजरेटर होना अनिवार्य है। इसमें कटा हुआ तैयार मीट रखा जाएगा। मीट को कपड़े में लपेटकर रखना गैरकानूनी है। मीट केवल प्राधिकृत स्लाटर हाउस से ही लेना चाहिए। दुकान में वैंटीलेशन के साथ-साथ एग्जास्ट फैन भी हो। ढक्कन वाले कूड़ेदान भी होने चाहिए। हर दिन गर्म पानी से सभी उपकरण, औजार और दुकान को धोना चाहिए। लेकिन इस मानक से बाहर मांस मछलियों की दुकान खुलेआम चल रही हैं, बिना जांच पड़ताल के बिना बिमार पशुओं का मांस काट रहे हैं।अम्बिकापुर नगर निगम से जब हमने यह जानना चाहा तो कोई जवाब नही दिया गया !

लेकिन विभाग मौन हैं.अब देखना यह है कि नगर निगम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर अंकुश कब लगता है. या इसी तरह लोग दूषित मांस खाने पर विवश रहते हैं. सरकारी नियमों का उल्लंघन करके मांस-मटन की बिक्री करने पर कार्रवाई की जाती है. भारत में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत मांस-मटन की बिक्री के लिए नियम बनाए गए हैं. इन नियमों का उल्लंघन करने पर दुकान मालिक के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है. अम्बिकापुर नगर निगम से जब हमने यह जानना चाहा तो कोई जवाब नही दिया गया !

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