
असम व्यापार शिखर सम्मेलन 2025: 5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव से औद्योगिक विकास को नई उड़ान
असम व्यापार शिखर सम्मेलन 2025: 5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव से औद्योगिक विकास को नई उड़ान
गुवाहाटी, 27 फरवरी: असम सरकार द्वारा आयोजित असम व्यापार शिखर सम्मेलन 2025 में निवेशकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने बताया कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान राज्य को पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह असम की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि असम को पूर्वोत्तर भारत का औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें बुनियादी ढांचा, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मा, पेट्रोकेमिकल्स और खनन शामिल हैं।
इस सम्मेलन में देश और विदेश के कई प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रमुख उद्योगपतियों में मुकेश अंबानी (रिलायंस इंडस्ट्रीज), गौतम अडानी (अडानी ग्रुप), नवीन जिंदल (जिंदल स्टील एंड पावर), संजीव पुरी (आईटीसी लिमिटेड) और किरण मजूमदार शॉ (बायोकॉन) जैसी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस मौके पर रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी ग्रुप, टाटा ग्रुप, जेएसडब्ल्यू स्टील, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा समेत कई कंपनियों ने असम में निवेश की प्रतिबद्धता जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान 100 से अधिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनसे लाखों नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
प्रमुख क्षेत्रों में निवेश
बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स – 1.2 लाख करोड़ रुपये
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण – 75,000 करोड़ रुपये
ऊर्जा (हाइड्रो, सौर और हरित ऊर्जा परियोजनाएं) – 60,000 करोड़ रुपये
पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र – 40,000 करोड़ रुपये
आईटी और स्टार्टअप्स – 30,000 करोड़ रुपये
फार्मा और हेल्थकेयर – 25,000 करोड़ रुपये
खनन और पेट्रोकेमिकल्स – 20,000 करोड़ रुपये
असम सरकार ने इस सम्मेलन से पहले ही निवेशकों को लुभाने के लिए कई आकर्षक नीतियों की घोषणा की थी, जिसमें टैक्स में छूट, आसान भूमि अधिग्रहण, बिजली दरों में रियायत, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) का विकास और पूंजीगत अनुदान जैसी सुविधाएं शामिल थीं। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि असम को निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य बनाया जाए।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया कि सभी निवेश परियोजनाएं पर्यावरण-संवेदनशील और स्थायी विकास के सिद्धांतों का पालन करें। इस दिशा में हरित ऊर्जा परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है, जिससे असम को एक पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक केंद्र बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इस निवेश से असम में स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। खादी, हस्तशिल्प, पर्यटन, जैविक कृषि और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को भी इस निवेश का लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए असम सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत को देश के आर्थिक ग्रोथ इंजन में परिवर्तित करने के लिए यह शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह निवेश असम को नए औद्योगिक युग में प्रवेश करने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निवेश प्रस्तावों को तेजी से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में असम देश के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले राज्यों में शामिल हो सकता है। इस निवेश से असम को एक वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस आधार मिलेगा।
असम व्यापार शिखर सम्मेलन 2025 न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा की अगुवाई में राज्य सरकार ने निवेशकों का विश्वास जीतने में सफलता प्राप्त की है। यदि इन परियोजनाओं को सही ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल असम की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि राज्य को भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल करने में भी मदद करेगा।












