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कृषक उन्नति योजना के तहत धान खरीदी में रिकॉर्ड वृद्धि: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को मिला अपार लाभ

कृषक उन्नति योजना के तहत धान खरीदी में रिकॉर्ड वृद्धि: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को मिला अपार लाभ

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राजनांदगांव, राजनांदगांव जिले में कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान खरीदी का रिकॉर्ड बना दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में जिले के 96 धान उपार्जन केन्द्रों में कुल 1,33,016 पंजीकृत किसानों से 701,488.36 टन धान समर्थन मूल्य पर खरीदा गया। इस प्रक्रिया के दौरान किसानों के बैंक खातों में कुल 1617 करोड़ 38 लाख 53 हजार रूपए अंतरित किए गए। इस उपलब्धि के साथ-साथ पिछले वर्ष की तुलना में 4947 किसानों की पंजीकरण में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि खेती-किसानी में युवाओं और ग्रामीण जनता का रूझान दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

कृषक उन्नति योजना का प्रमुख उद्देश्य किसानों को समय पर समर्थन मूल्य पर उनके उत्पाद का उचित मुआवजा प्रदान करते हुए आर्थिक स्थिरता एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। पिछले वर्षों से जारी इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं एवं व्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से धान की खरीदी के साथ-साथ त्वरित भुगतान की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। राजनांदगांव जिले में भी इसी दिशा में अनेक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, जिसके अंतर्गत धान उपार्जन केन्द्रों में आवश्यक सभी तकनीकी एवं आधारभूत सुविधाओं का प्रबंध किया गया।

योजना के अंतर्गत प्रत्येक किसान को उनके धान की सही माप, वजन एवं गुणवत्ता के आधार पर उचित मूल्य का भुगतान सुनिश्चित किया जाता है। इसके लिए कांटा-बांट, नापतौल यंत्र, बारदाना, कम्प्यूटर सेट, प्रिंटर, आद्र्रतामापी यंत्र, सीसीटीवी कैमरा एवं अन्य तकनीकी उपकरणों का आधुनिककरण किया गया है। इस आधुनिक व्यवस्था ने न केवल पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है बल्कि किसानों के बीच विश्वास एवं संतोष भी बढ़ाया है।

पिछले वर्ष (खरीफ विपणन वर्ष 2023-24) में भी योजना के अंतर्गत 1,28,069 पंजीकृत किसानों से 700835.40 टन धान की खरीदी की गई थी। उस वर्ष किसानों के बैंक खातों में 1534 करोड़ 35 लाख 13 हजार रूपए अंतरित किए गए थे। इन आंकड़ों की तुलना में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में न केवल धान की खरीदी में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान खरीदी की प्रक्रिया को और अधिक सुचारु एवं पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जिले के कलेक्टर संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में सभी 96 धान उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी का कार्य कुशलता से संपन्न किया गया।

प्रत्येक उपार्जन केन्द्र में आधुनिक तकनीकी उपकरणों एवं आधारभूत संरचना का विशेष ध्यान रखा गया। किसान जब निर्धारित तिथि पर धान बिक्री के लिए उपार्जन केन्द्र पहुंचते हैं, तो उन्हें इलेक्ट्रॉनिक कांटा बाट मशीन के माध्यम से धान की तौलाई कराई जाती है। इस प्रक्रिया में नापतौल, बारदाना, सीसीटीवी कैमरा एवं अन्य उपकरणों की सहायता से खरीदी के हर कदम की निगरानी सुनिश्चित की जाती है।

इसके अतिरिक्त, टोकन तुंहर हाथ ऑनलाईन एप के माध्यम से किसानों को धान बिक्री के लिए ऑनलाइन टोकन प्रदान किए जाते हैं। इस नई व्यवस्था के कारण किसानों को समय की बचत हुई है एवं प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। धान विक्रय की प्रक्रिया पूरी होने के 72 घंटों के भीतर ही किसानों के बैंक खातों में राशि अंतरित कर दी जाती है, जिससे उन्हें तुरंत आर्थिक सहायता मिलती है।

राजनांदगांव जिले में इस वर्ष धान खरीदी के लिए माईक्रो एटीएम की भी व्यवस्था की गई। कुल 74 माईक्रो एटीएम के माध्यम से किसानों ने प्रतिदिन 10 हजार रूपए तक की अधिकतम आहरण सीमा के तहत 4 करोड़ 21 लाख 74 हजार रूपए की राशि तुरंत निकाली। यह व्यवस्था किसानों के लिए तत्काल वित्तीय सहायता का एक महत्वपूर्ण साधन सिद्ध हुई है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में कृषक उन्नति योजना के तहत दर्ज की गई उपलब्धियों को आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत करना आवश्यक है। इस वर्ष जिले में 1,33,016 पंजीकृत किसानों से धान खरीदी की गई, जिसके दौरान कुल 701,488.36 टन धान का समर्थन मूल्य पर अधिग्रहण हुआ। इसके बदले में किसानों के बैंक खातों में 1617 करोड़ 38 लाख 53 हजार रूपए की राशि अंतरित की गई।

इस वर्ष किसानों की संख्या में 4947 की वृद्धि हुई है, जो कि पिछले वर्ष की 1,28,069 पंजीकृत किसानों से तुलना में एक सकारात्मक संकेत है। यह वृद्धि न केवल किसानों के आर्थिक हितों में सुधार को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी के प्रति जागरूकता एवं युवाओं का आकर्षण बढ़ा है।

अंकित आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत न केवल धान खरीदी का कार्य समय पर और पारदर्शी ढंग से संपन्न हुआ है, बल्कि इसमें तकनीकी उन्नति एवं डिजिटल सुविधाओं का भी भरपूर योगदान रहा है। माईक्रो एटीएम, इलेक्ट्रानिक कांटा बाट मशीन एवं ऑनलाईन टोकन प्रणाली जैसी सुविधाओं ने किसानों के लिए इस प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बना दिया है।

कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं डिजिटलाइजेशन के प्रति राज्य सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। राजनांदगांव जिले में धान खरीदी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं त्वरित बनाने के लिए टोकन तुंहर हाथ ऑनलाईन एप का उपयोग किया गया। इस एप के माध्यम से किसानों को ऑनलाइन टोकन प्रदान किया जाता है, जिससे उन्हें धान बिक्री के लिए उपार्जन केन्द्र पर आने में आसानी होती है।

इस नई व्यवस्था के तहत, प्रत्येक किसान को एक अद्वितीय टोकन जारी किया जाता है, जिससे न केवल उनके आगमन का ट्रैक रखा जा सके, बल्कि प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धोखाधड़ी से भी बचा जा सके। ऑनलाईन टोकन प्रणाली ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि किसानों के बीच विश्वास एवं संतोष को भी बढ़ावा दिया है।

इसी के साथ-साथ, धान खरीदी के लिए उपयोग किए जाने वाले तकनीकी उपकरणों में भी आधुनिकता को प्राथमिकता दी गई है। इलेक्ट्रानिक कांटा बाट मशीन, सीसीटीवी कैमरा, कम्प्यूटर सेट, प्रिंटर एवं अन्य आवश्यक यंत्रों की स्थापना से धान की सटीक माप एवं तौल सुनिश्चित किया जाता है। इन उपकरणों के द्वारा खरीदी के हर कदम की निगरानी की जाती है, जिससे प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या त्रुटि की गुंजाइश नहीं रहती।

माईक्रो एटीएम की व्यवस्था किसानों के लिए एक और महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। इन मशीनों के माध्यम से किसानों को तुरंत नकदी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। जिले में उपलब्ध कुल 74 माईक्रो एटीएम से प्रतिदिन निर्धारित सीमा तक राशि निकालने की सुविधा ने किसानों के लिए एक सुरक्षित एवं सुविधाजनक वित्तीय प्रबंधन का माध्यम प्रस्तुत किया है।

5. किसानों की प्रतिक्रिया एवं आर्थिक लाभ
कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान खरीदी की प्रक्रिया में प्राप्त हुई उपलब्धियों ने किसानों में खुशी एवं उत्साह की लहर फैला दी है। इस वर्ष किसानों ने न केवल समर्थन मूल्य पर धान बेचकर अपने आर्थिक हितों में सुधार किया है, बल्कि उन्हें तुरंत भुगतान की सुविधा भी प्राप्त हुई है। बैंक खातों में अंतरित राशि की त्वरित प्रक्रिया ने किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान की है।

किसान मंडल के कई प्रमुख सदस्यों ने बताया कि धान खरीदी की पारदर्शी एवं त्वरित प्रक्रिया ने उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। “हमारे लिए यह योजना वरदान से कम नहीं है। इस वर्ष न केवल हमें समय पर भुगतान मिला, बल्कि तकनीकी सुविधाओं के कारण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की जटिलता नहीं हुई,” कई किसानों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा।

पिछले वर्ष की तुलना में 4947 किसानों की वृद्धि ने यह संकेत दिया कि युवाओं के बीच खेती की ओर आकर्षण बढ़ा है। यह वृद्धि कृषि क्षेत्र में नए तकनीकी सुधारों, डिजिटल टोकन प्रणाली एवं माईक्रो एटीएम जैसी सुविधाओं का प्रत्यक्ष परिणाम है। इन सभी सुधारों ने किसानों में आत्मविश्वास जगाया है तथा उनके आर्थिक हितों को सुदृढ़ किया है।

विशेष रूप से, ऑनलाईन टोकन प्रणाली की सफलता ने किसानों में यह विश्वास पैदा किया है कि सरकार कृषि क्षेत्र में निरंतर सुधार एवं उन्नति के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रणाली के माध्यम से किसानों को न केवल समय की बचत होती है, बल्कि उन्हें धान की सही माप एवं तौल के आधार पर उचित मूल्य भी सुनिश्चित होता है। इससे किसानों का मनोबल उच्च रहता है एवं वे अपने खेतों में अधिक आत्मविश्वास के साथ काम करते हैं।

माईक्रो एटीएम की त्वरित सेवा ने भी किसानों में तत्काल वित्तीय सहायता का जोश भर दिया है। जब किसानों को तत्काल नकदी मिल जाती है, तो वे अपने दैनिक कार्यों एवं आवश्यकताओं को बिना किसी विलंब के पूरा कर पाते हैं। इस त्वरित भुगतान प्रक्रिया के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों की तुलना पिछले वर्ष (2023-24) से की जाए तो इसमें स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है। 2023-24 में 1,28,069 पंजीकृत किसानों से 700835.40 टन धान खरीदी की गई थी, जिसके बदले में किसानों के खाते में 1534 करोड़ 35 लाख 13 हजार रूपए अंतरित किए गए थे। वहीं, वर्तमान वर्ष में 1,33,016 पंजीकृत किसानों से 701488.36 टन धान खरीदी की गई, जिसके बदले में 1617 करोड़ 38 लाख 53 हजार रूपए का भुगतान हुआ।

इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत न केवल खरीदी की मात्रा में वृद्धि हुई है, बल्कि किसानों के लाभ में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। 4947 अतिरिक्त पंजीकरण ने यह दर्शाया कि पिछले वर्ष की सफलता ने किसानों में विश्वास पैदा किया और उन्होंने नए पंजीकरण के लिए अग्रसरता दिखाई।

अंकित आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाएँ, जैसे कि ऑनलाईन टोकन प्रणाली एवं माईक्रो एटीएम, ने खरीदी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित एवं समयबद्ध बना दिया है। किसानों के हित में किए गए इस सुधारात्मक कदमों का सीधा परिणाम उनके आर्थिक लाभ एवं ग्रामीण विकास में दिखाई दे रहा है।

कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान खरीदी में हुई इस वृद्धि का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव पड़ा है। किसानों को समय पर भुगतान एवं त्वरित नकदी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया ने उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है। इससे ग्रामीण परिवारों में वित्तीय स्थिरता आई है और उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं एवं कृषि संबंधी कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन मिल सके हैं।

जब किसानों को उनके धान की सही कीमत पर भुगतान मिलता है, तो वे अपने खेतों में पुनः निवेश करने के लिए प्रेरित होते हैं। इस निवेश से न केवल कृषि में सुधार होता है, बल्कि क्षेत्रीय विकास की गति भी तेज होती है। उपार्जन केन्द्रों में आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकी सुविधाओं के प्रयोग से खरीदी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है, जिससे किसानों का विश्वास और भी बढ़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में हुई इस वृद्धि के परिणामस्वरूप किसानों में आत्मनिर्भरता की भावना भी जागृत हुई है। आर्थिक रूप से मजबूत किसान न केवल अपने परिवारों की भलाई कर पाते हैं, बल्कि वे सामुदायिक विकास एवं अन्य सामाजिक कार्यों में भी योगदान देते हैं। इसके साथ ही, राज्य सरकार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के तहत की गई सुधारात्मक पहलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। धान खरीदी के लिए आवश्यक तकनीकी उपकरणों एवं आधारभूत सुविधाओं के निर्माण से न केवल स्थानीय तकनीशियनों एवं कर्मचारियों को रोजगार मिला है, बल्कि इससे क्षेत्रीय विकास के नए आयाम भी खुले हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इस प्रकार के सकारात्मक बदलाव से राज्य के समग्र विकास में तेजी देखने को मिल रही है।

राज्य सरकार ने कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकी सुधारों को प्राथमिकता दी है। ऑनलाईन टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रोनिक कांटा बाट मशीन एवं माईक्रो एटीएम जैसी तकनीकों के प्रयोग से धान खरीदी की प्रक्रिया को अत्यंत सुगम एवं पारदर्शी बनाया गया है। इन तकनीकी सुधारों ने किसानों के लिए न केवल प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि उन्हें तत्काल वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई है।

भविष्य में, सरकार ने योजना को और विस्तृत करने एवं किसानों के हित में नई तकनीकों को शामिल करने का संकल्प लिया है। योजना में और अधिक उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा एनालिटिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से किसानों के धान खरीदी की प्रक्रिया में और सुधार लाया जाएगा। इससे किसानों को उनके उत्पाद का सटीक मूल्यांकन, तेजी से भुगतान एवं बेहतर बाजार सुविधाएं प्राप्त होंगी।

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को मिलने वाले लाभों में और वृद्धि होगी। योजना में किए गए नवाचार एवं तकनीकी सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि राज्य की समग्र आर्थिक प्रगति में भी तेजी आएगी।

नई तकनीकी प्रणालियों के माध्यम से किसानों के बीच डिजिटल साक्षरता बढ़ाई जाएगी, जिससे वे नई-नई तकनीकों एवं बाजार के रुझानों से परिचित हो सकेंगे। इस दिशा में सरकारी अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण शिविरों, कार्यशालाओं एवं अन्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को डिजिटल युग के साथ तालमेल बैठाने में मदद करना है, ताकि वे अपने कृषि व्यवसाय को और अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बना सकें।

कृषक उन्नति योजना की सफलता में स्थानीय प्रशासन एवं सामुदायिक सहभागिता का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राजनांदगांव जिले के कलेक्टर संजय अग्रवाल की सूझ-बूझ एवं सतत प्रयासों से सभी 96 धान उपार्जन केन्द्रों में खरीदी का कार्य कुशलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्थानीय प्रशासन ने किसानों के बीच जागरूकता फैलाने, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने एवं तकनीकी सुविधाओं के बारे में प्रशिक्षण प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से संवाद स्थापित करते हुए उनके सुझावों एवं चिंताओं को ध्यान में रखा है। किसानों ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों की तत्परता एवं सहयोग के कारण उन्हें धान खरीदी की प्रक्रिया में कोई कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। इस सहयोगात्मक माहौल ने किसानों में सरकारी पहलों के प्रति विश्वास बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप पंजीकृत किसानों की संख्या में वृद्धि हुई है।

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स्थानीय पंचायतों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं का भी इस प्रक्रिया में योगदान रहा है। उन्होंने किसानों के बीच जागरूकता फैलाने, पंजीकरण प्रक्रिया में सहयोग करने एवं तकनीकी सुविधाओं के उपयोग के प्रशिक्षण में मदद की है। इस सामुदायिक सहभागिता के कारण खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में किसानों को मिलने वाले लाभों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

स्थानीय प्रशासन द्वारा आयोजित जागरूकता शिविरों एवं कार्यशालाओं ने किसानों को ऑनलाईन टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रोनिक कांटा बाट मशीन एवं माईक्रो एटीएम के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की है। इन प्रयासों से किसानों को तकनीकी उपकरणों का सही उपयोग करने में मदद मिली है, जिससे प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या देरी नहीं हुई।

कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान खरीदी की सफलता एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व एवं स्थानीय प्रशासन की तत्परता ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 1,33,016 पंजीकृत किसानों से 701,488.36 टन धान खरीदी के साथ-साथ 1617 करोड़ 38 लाख 53 हजार रूपए का त्वरित भुगतान किसानों के आर्थिक हितों को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हुआ है।

इस वर्ष दर्ज की गई उपलब्धियाँ केवल संख्यात्मक वृद्धि नहीं हैं, बल्कि उन्होंने किसानों के मनोबल में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। 4947 अतिरिक्त पंजीकरण, ऑनलाईन टोकन प्रणाली एवं माईक्रो एटीएम जैसी तकनीकी सुविधाओं ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित एवं समयबद्ध बनाया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कृषक उन्नति योजना ने न केवल किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि उन्हें भविष्य में कृषि क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित भी किया है।

आने वाले वर्षों में इस योजना में और अधिक तकनीकी सुधार एवं नवाचार की उम्मीद की जा रही है। सरकारी अधिकारियों ने यह संकेत दिया है कि डिजिटल युग के अनुरूप किसानों के लिए नई सुविधाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे किसान अपने उत्पाद का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त कर सकें। ग्रामीण विकास एवं आर्थिक स्थिरता की दिशा में यह पहल राज्य के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभर रही है।

कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत की गई इस सफलतम पहल से न केवल वर्तमान वर्ष में किसानों को अपार लाभ प्राप्त हुए हैं, बल्कि यह भविष्य के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करती है। सरकारी नीतियों एवं तकनीकी सुधारों के संयोजन से कृषि क्षेत्र में निरंतर प्रगति की संभावना बनी हुई है, जिससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि समग्र ग्रामीण विकास में भी तेजी आएगी।

इस संदर्भ में, कृषि विशेषज्ञों एवं नीति निर्माताओं का मानना है कि ऐसी पहलों को अन्य क्षेत्रों एवं राज्यों में भी अपनाया जाना चाहिए, ताकि देशभर में कृषि क्षेत्र को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया जा सके। कृषक उन्नति योजना का यह मॉडल भविष्य में अन्य कृषि आधारित योजनाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जिससे किसानों को उनके श्रम का उचित मूल्य मिल सकेगा एवं वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

अंततः, राजनांदगांव जिले में धान खरीदी की इस सफल कहानी ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही नीतिगत दिशा-निर्देश, तकनीकी उन्नयन एवं सामुदायिक सहभागिता से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। यह सफलता न केवल वर्तमान किसानों के लिए एक आशा की किरण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

कृषक उन्नति योजना के तहत इस वर्ष की धान खरीदी प्रक्रिया का विश्लेषण करते हुए देखा जा सकता है कि आधुनिक तकनीकी सुविधाओं एवं सरकारी नीतियों के सही मिश्रण से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सुधार संभव है। इस प्रक्रिया में केवल आर्थिक लेनदेन ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अनेक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं।

पहले जहाँ किसानों को अपने धान के लिए बाजार में कम मूल्य मिलना आम था, वहीं अब समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इससे न केवल उनके परिवारों की आय में सुधार हुआ है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को भी आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। ग्रामीण समुदाय में यह पहल एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन गई है, जहाँ किसान अब अपने उत्पाद के लिए उचित मूल्य प्राप्त कर अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताओं के लिए बेहतर व्यवस्था कर पा रहे हैं।

समाज में इस सफलता की चर्चा करते हुए स्थानीय किसान संघों एवं सामुदायिक नेताओं ने भी अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्म-सम्मान एवं सामाजिक एकता में वृद्धि हुई है। जब किसान देखते हैं कि सरकार उनके हित में सक्रिय रूप से कदम उठा रही है, तो उनमें यह भावना उत्पन्न होती है कि उनके साथ न्याय हो रहा है। इस सकारात्मक मानसिकता ने कृषि कार्यों में नयी ऊर्जा का संचार किया है, जिससे खेती के प्रति उत्साह एवं लगन में भी वृद्धि हुई है।

सामाजिक रूप से, यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता एवं तकनीकी ज्ञान के प्रसार में भी सहायक सिद्ध हुई है। ऑनलाईन टोकन प्रणाली एवं माईक्रो एटीएम जैसी सुविधाओं के माध्यम से किसानों ने न केवल अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा किया है, बल्कि उन्होंने नई तकनीकों से परिचित होने का अवसर भी पाया है। इससे उनकी जीवनशैली में सुधार हुआ है एवं वे अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग करने लगे हैं।

यह सकारात्मक बदलाव न केवल किसानों के आर्थिक हितों के लिए लाभकारी है, बल्कि पूरे समाज में एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर समुदाय के निर्माण में भी सहायक है। सरकारी प्रयासों एवं तकनीकी नवाचारों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जो सामाजिक एवं आर्थिक सुधार हुए हैं, वे देश की समग्र प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत इस वर्ष कई उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं, फिर भी आगे की राह में चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। कृषि क्षेत्र में निरंतर बदलाव एवं नई तकनीकी प्रगति के साथ, सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वह किसानों की बदलती आवश्यकताओं एवं बाजार के रुझानों के अनुसार अपनी नीतियों में सुधार करती रहे।

सरकारी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि योजना के सफल क्रियान्वयन के बावजूद कुछ चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं, जैसे कि ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी साक्षरता की कमी, ऑनलाइन प्रक्रिया में होने वाली बाधाएँ एवं कुछ क्षेत्रों में अवसंरचनात्मक समस्याएँ। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, आगामी समय में सरकार ने किसानों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ एवं जागरूकता अभियानों की योजना बनाई है। इन पहलों का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकी प्रणालियों के उपयोग में सक्षम बनाना एवं प्रक्रिया को और भी सुचारु बनाना है।

साथ ही, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के हित में किए जाने वाले सुधारात्मक कदमों के लिए निरंतर फीडबैक एवं संवाद अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थानीय प्रशासन एवं किसान मंडलों के बीच नियमित संवाद से सरकार उन समस्याओं को जल्दी से पहचानकर उनका समाधान कर सकती है। इस प्रकार की सामूहिक सहभागिता से कृषि क्षेत्र में नयी चुनौतियों का समाधान निकल सकता है एवं किसानों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है।

आगे की राह में, कृषक उन्नति योजना को और अधिक व्यापक बनाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों को शामिल किया जाएगा। इन उपायों में उन्नत डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मोबाइल एप्लिकेशन्स का समावेश किया जाएगा, जिससे किसानों को उनके उत्पाद के बाजार मूल्य, मौसम की जानकारी एवं कृषि संबंधी नवीनतम तकनीकों की जानकारी समय पर मिल सके। यह सुनिश्चित करेगा कि किसान न केवल अपनी पैदावार का सही मूल्यांकन कर सकें, बल्कि वे भविष्य में संभावित जोखिमों से भी निपटने के लिए तैयार रहें।

सरकारी नीतियों के साथ-साथ, निजी क्षेत्र एवं कृषि से जुड़े स्टार्टअप्स का सहयोग भी योजना के सफल क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाएगा। इन सहयोगी पहलों से नयी तकनीकी समाधान विकसित होंगे, जो किसानों की दिनचर्या में आसानी एवं पारदर्शिता लाएंगे। इस तरह के सहयोग से कृषि क्षेत्र में नवाचार की प्रक्रिया और तेज होगी, जिससे किसान अपने उत्पाद का सर्वोत्तम लाभ उठा सकेंगे।

13. समापन विचार
कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान खरीदी की इस शानदार सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार, स्थानीय प्रशासन एवं किसानों के बीच सुदृढ़ सहयोग होता है, तो कृषि क्षेत्र में आश्चर्यजनक उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं। 1,33,016 पंजीकृत किसानों से 701,488.36 टन धान खरीदी एवं 1617 करोड़ 38 लाख 53 हजार रूपए का त्वरित भुगतान किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आया है।

इस सफलता ने न केवल वर्तमान में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि भविष्य में कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं तकनीकी उन्नयन के नए आयाम खोल दिए हैं। इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भरता, सामाजिक एकता एवं आर्थिक स्थिरता की नई लहर उत्पन्न हुई है। कृषि क्षेत्र में हुए ये सुधार ग्रामीण विकास के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और आने वाले समय में इस दिशा में और भी प्रगति की उम्मीद की जा रही है।

अंत में, यह स्पष्ट है कि कृषक उन्नति योजना ने किसानों के हित में एक क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरुआत की है। इस योजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल किसानों का मनोबल बढ़ा है, बल्कि राज्य की समग्र आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है। सरकार द्वारा किए गए नवाचार, तकनीकी सुधार एवं स्थानीय प्रशासन का सहयोग इस सफलता के मुख्य स्तंभ रहे हैं।

यह उदाहरण आने वाले वर्षों में अन्य कृषि आधारित पहलों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा, जिससे न केवल भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में खुशहाली आएगी, बल्कि देश की समग्र कृषि नीति को भी नई दिशा मिलेगी। कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को मिलने वाले लाभ एवं सुविधाएँ उनकी मेहनत का उचित फल प्रदान करती हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बनते हैं और अपने परिवारों के साथ-साथ समाज में भी योगदान देने लगते हैं।

14. भविष्य की योजनाओं पर एक नजर
सरकार ने आगे चलकर कृषक उन्नति योजना को और अधिक विस्तृत एवं सुदृढ़ करने की योजना बनाई है। आने वाले महीनों में, नई तकनीकी प्रणालियों के प्रयोग से किसानों को और भी अधिक सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी। इनमें मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से रियल-टाइम जानकारी, कृषि से जुड़ी नवीनतम तकनीकी रिपोर्ट्स एवं बाजार की स्थिति की जानकारी शामिल होगी। इससे किसान अपने उत्पाद के लिए सर्वोत्तम समय पर बिक्री कर सकेंगे और उन्हें बाजार में उचित मूल्य मिल सकेगा।

इसके अलावा, राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी करेगी, जिससे किसान डिजिटल दुनिया में दक्ष बन सकें। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नवीनतम तकनीकी उपकरणों का उपयोग करने, डेटा एनालिटिक्स एवं स्मार्ट कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। यह प्रशिक्षण न केवल किसानों की उत्पादकता में वृद्धि करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक कृषि बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगा।

सरकारी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि कृषक उन्नति योजना को अन्य कृषि उपजों के साथ विस्तारित किया जाएगा, ताकि किसानों को विभिन्न फसलों के लिए भी समान सुविधा एवं समर्थन मिल सके। इस पहल से किसान न केवल धान, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण फसलों जैसे गेहूं, मक्का, सोयाबीन आदि के लिए भी उचित मूल्य एवं त्वरित भुगतान की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम देश के समग्र कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा देगा एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

साथ ही, निजी क्षेत्र एवं कृषि स्टार्टअप्स के सहयोग से किसानों के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जहां वे अपने उत्पाद का मूल्यांकन, बिक्री एवं वितरण के सभी चरणों का प्रबंधन आसानी से कर सकेंगे। इस प्लेटफॉर्म से किसानों को न केवल तकनीकी सहायता मिलेगी, बल्कि वे बाजार की नवीनतम प्रवृत्तियों से भी अवगत हो सकेंगे।

इन सभी पहलों का समग्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित फल मिले एवं वे आत्मनिर्भर बन सकें। सरकार, स्थानीय प्रशासन एवं निजी क्षेत्र के सहयोग से कृषि क्षेत्र में निरंतर प्रगति की दिशा में यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत राजनांदगांव जिले में धान खरीदी की इस अभूतपूर्व सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार, तकनीकी नवाचार एवं स्थानीय प्रशासन का सहयोग एक साथ मिलता है, तो कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव हैं। 1,33,016 पंजीकृत किसानों से धान खरीदी, 701,488.36 टन उत्पादन एवं 1617 करोड़ 38 लाख 53 हजार रूपए का त्वरित भुगतान – ये सभी आंकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि कृषक उन्नति योजना किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आई है।

इस सफलता के प्रभाव से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है, बल्कि किसानों में आत्मविश्वास एवं सामाजिक एकता की भावना भी प्रबल हुई है। डिजिटल तकनीकों, ऑनलाईन टोकन प्रणाली एवं माईक्रो एटीएम जैसी सुविधाओं ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित एवं समयबद्ध बनाया है, जिससे किसान बिना किसी बाधा के अपने आर्थिक हितों का संरक्षण कर पा रहे हैं।

आने वाले वर्षों में इस मॉडल को और विस्तारित करने के लिए सरकार द्वारा नई नीतियाँ एवं तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे, जिससे कृषि क्षेत्र में निरंतर प्रगति एवं विकास की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके। यह पहल न केवल वर्तमान में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त कर रही है, बल्कि भविष्य में देश के समग्र कृषि परिदृश्य को भी सकारात्मक दिशा में परिवर्तित करेगी।

कृषक उन्नति योजना के तहत हुए इस परिवर्तन ने यह संदेश दिया है कि जब किसान, सरकार एवं तकनीकी नवाचार एक साथ आते हैं, तो देश का ग्रामीण क्षेत्र न केवल आत्मनिर्भर बनता है, बल्कि विश्व स्तर पर भी एक मिसाल कायम करता है। इस दिशा में किए गए प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगे एवं देश की समग्र प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Ashish Sinha

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