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चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने निर्वाचन आयोग की पहल, राजनीतिक दलों से संवाद तेज

चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने निर्वाचन आयोग की पहल, राजनीतिक दलों से संवाद तेज

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भारतीय लोकतंत्र की सफलता का आधार उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए उनकी राय और लंबित मुद्दों पर चर्चा की जा सके। इस पहल का उद्देश्य चुनावी व्यवस्था को और अधिक मजबूत, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।

निर्वाचन आयोग की पहल
भारतीय निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को व्यक्तिगत रूप से पत्र जारी कर 30 अप्रैल 2025 तक उन सभी लंबित मुद्दों और सुझावों को प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया है, जो निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) या मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के स्तर पर अनसुलझे हैं। आयोग का यह प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने और चुनाव प्रक्रिया को विधिक प्रावधानों के अनुरूप और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

इसके साथ ही, आयोग ने यह भी प्रस्तावित किया है कि राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ आपसी सहमति से सुविधाजनक समय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस संवाद प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों की चिंताओं को समझना और आवश्यक सुधारों को लागू करना है।

चुनावी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां चुनाव प्रक्रिया का सुचारू और निष्पक्ष संचालन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, समय-समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार की मांग उठाई जाती रही है।

कुछ प्रमुख मुद्दे जो राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं:

मतदाता सूची की पारदर्शिता और त्रुटिहीनता

कई बार मतदाता सूची में नाम कटने या दोहराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
ईवीएम और वीवीपैट के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
चुनाव आचार संहिता का सख्त पालन

राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान नियमों के उल्लंघन के मामले बढ़े हैं।
आचार संहिता के उल्लंघन पर आयोग की त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।
अर्थतंत्र और चुनावी पारदर्शिता

चुनावी बॉन्ड और फंडिंग के स्रोतों को लेकर पारदर्शिता की मांग उठाई जाती रही है।
चुनावी खर्च पर कड़े नियंत्रण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
तकनीकी नवाचार और डिजिटल सुरक्षा

ऑनलाइन वोटिंग की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, लेकिन साइबर सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है।
चुनावी प्रक्रियाओं में डिजिटल तकनीकों के सुरक्षित उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की जरूरत है।
निर्वाचन आयोग की रणनीति और संवाद प्रक्रिया
गत सप्ताह आयोजित एक सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिया कि वे राजनीतिक दलों के साथ नियमित संवाद करें। आयोग ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों के साथ होने वाले इन संवादों से प्राप्त सुझावों को कानूनी ढांचे के तहत संबोधित किया जाए और 31 मार्च 2025 तक इन पर कार्यवाही रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

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आयोग ने यह भी कहा कि यह विकेंद्रीकृत संवाद प्रक्रिया लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राजनीतिक दलों से आग्रह किया गया कि वे इसे एक अवसर के रूप में देखें और चुनाव सुधार की दिशा में सार्थक सुझाव दें।

वैधानिक ढांचा और संवैधानिक प्रावधान
भारतीय निर्वाचन आयोग का कार्य लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951; निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960; निर्वाचन संचालन नियम, 1961; और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों के तहत संचालित होता है। आयोग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि वह समय-समय पर दिशानिर्देश, नियमावली और हैंडबुक जारी करता है, जो निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहते हैं।

इन सभी कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य एक विकेंद्रीकृत, मजबूत और पारदर्शी चुनावी प्रणाली स्थापित करना है, जिससे निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों का आयोजन संभव हो सके। आयोग का यह प्रयास राजनीतिक दलों, प्रशासन और मतदाताओं के बीच विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

राजनीतिक दलों की भूमिका और प्रतिक्रिया
राजनीतिक दल किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण हितधारक होते हैं। निर्वाचन आयोग के इस प्रयास का राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है, हालांकि कुछ दलों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दों पर अपनी असहमति भी व्यक्त की है।

कुछ राजनीतिक दलों का मानना है कि चुनाव आयोग को वोटर डेटा की सुरक्षा, ईवीएम और वीवीपैट की पारदर्शिता और चुनावी खर्च की निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाना चाहिए। वहीं, कुछ दलों ने आचार संहिता के उल्लंघन पर आयोग की सख्ती की सराहना की है।

संभावित सुधार और आगे की राह
राजनीतिक दलों के सुझावों के आधार पर आयोग कुछ महत्वपूर्ण सुधार लागू कर सकता है, जैसे:

मतदाता सूची की त्रुटिहीनता सुनिश्चित करने के लिए अधिक पारदर्शी प्रक्रिया अपनाना।
चुनाव प्रचार और फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कड़े नियम लागू करना।
तकनीकी नवाचारों का सुरक्षित और विश्वसनीय उपयोग सुनिश्चित करना।
चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई की प्रणाली विकसित करना।

भारतीय निर्वाचन आयोग की यह पहल देश की चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। राजनीतिक दलों के सुझावों के आधार पर यदि आवश्यक सुधार किए जाते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।

राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे इस संवाद प्रक्रिया में सक्रिय भाग लें और सकारात्मक सुझाव प्रस्तुत करें, जिससे चुनावी प्रणाली में सुधार हो और जनता का विश्वास और अधिक सशक्त बने। निर्वाचन आयोग का यह प्रयास भारतीय लोकतंत्र को और अधिक परिपक्व और न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Ashish Sinha

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