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कोयले की काली कमाई पर खूनी खेल: भाजपा नेता ने ट्रांसपोर्टर की गोली मारकर हत्या

कोयले की काली कमाई पर खूनी खेल: भाजपा नेता ने ट्रांसपोर्टर की गोली मारकर हत्या

– खदानों में अवैध वसूली को लेकर भाजपा नेताओं के बीच खूनी संघर्ष
– सत्ता संरक्षण में फल-फूल रहे कोल, रेत और खनन माफिया
– पुलिस प्रशासन मौन, खदानों में बिना वसूली के नहीं हो रहा कारोबार

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रायपुर, 29 मार्च 2025। छत्तीसगढ़ में खनन, रेत और कोल माफिया बेलगाम हो गए हैं। सत्ता के संरक्षण में अवैध वसूली और कारोबार के वर्चस्व को लेकर हिंसा का दौर जारी है। ताजा मामला कोरबा जिले का है, जहां भाजपा के मंडल अध्यक्ष रोशन ठाकुर ने कथित रूप से एक ट्रांसपोर्टर की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि यह विवाद पिछले कुछ महीनों से चला आ रहा था और सत्ता के प्रभाव में दोनों पक्ष एक-दूसरे को धमका रहे थे। इस झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया और अंततः एक व्यक्ति की जान चली गई।

खनन माफिया के दबदबे से मचा हड़कंप

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोल, खनिज और परिवहन विभाग सीधे मुख्यमंत्री के अधीन है, लेकिन पूरे प्रदेश में अवैध वसूली और दबंगई का खेल खुलेआम जारी है। खदानों में ट्रांसपोर्टरों से जबरन 50 रुपये प्रति टन की वसूली की जा रही है। जो इसका विरोध करता है, उसे प्रशासन के जरिए प्रताड़ित किया जाता है या फिर उसकी हत्या कर दी जाती है।

उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में एक भी कोयला खदान ऐसी नहीं बची, जहां बिना वसूली के ट्रकों को कोयला ढोने दिया जाता हो। सरकार ने पिटपास की बाध्यता के साथ सत्ता-प्रेरित अवैध उगाही केंद्रों से भी अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। इससे कोयला परिवहन व्यवसायियों और खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

गोलीबारी से दहला कोरबा, प्रशासन मौन

कोरबा जिले में भाजपा नेता के हाथों ट्रांसपोर्टर की हत्या कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी रायगढ़ के ओडिशा बॉर्डर पर कोयला और खनन विवाद को लेकर तीन घंटे तक दो पक्षों में गोलीबारी हुई थी। इस घटना के मुख्य आरोपी को कथित रूप से प्रदेश के वित्त मंत्री का संरक्षण प्राप्त था। उसकी वित्त मंत्री के साथ तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे।

खदानों में माफिया राज इतना हावी हो चुका है कि अब सत्ता संघर्ष हिंसक हो चला है। खनिज और कोयला व्यवसाय में लाखों-करोड़ों के वसूली खेल में किसी की जान की कीमत कोई मायने नहीं रखती। सत्ता संरक्षण में पल रहे गुंडे अब सरेआम हत्याएं करने लगे हैं।

रेत के अवैध कारोबार पर भी माफियाओं का कब्जा

केवल कोयला ही नहीं, रेत का अवैध उत्खनन भी भाजपा नेताओं के संरक्षण में पूरे प्रदेश में धड़ल्ले से जारी है। रेत घाटों पर वर्चस्व की लड़ाई आए दिन खूनी संघर्ष का कारण बन रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सत्ता में आते ही भाजपा नेताओं ने खनन कारोबार को “धंधा” बना दिया है।

उन्होंने गरियाबंद जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खनिज निरीक्षक और अन्य अधिकारियों को खनन माफियाओं ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। इसी तरह, रायपुर जिले के आरंग के पास समोदा के हरदीडीह रेत घाट में खनिज विभाग के 16 अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमला हुआ था। माफियाओं ने उन्हें पीटकर सील की गई मशीनों को जबरन खुलवा लिया और सरकारी दस्तावेज फाड़ दिए। बावजूद इसके, प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

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भाजपा सरकार में जंगलराज, अपराधियों के हौसले बुलंद

कांग्रेस नेता ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में जंगलराज कायम हो चुका है। खनन माफियाओं को खुला संरक्षण मिला हुआ है और अपराधी बेखौफ होकर सरकारी अधिकारियों तक पर हमले कर रहे हैं।

बस्तर से लेकर सरगुजा, कोरबा और रायगढ़ तक खनन माफिया पूरी तरह से सक्रिय हैं। हर इलाके में वसूली का अलग-अलग नेटवर्क तैयार किया गया है, जिसमें भाजपा के नेता, स्थानीय गुंडे और माफिया शामिल हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार इस अवैध खनन और वसूली के खेल को रोकने के बजाय उससे अपना हिस्सा ले रही है।

पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता

इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। कांग्रेस का कहना है कि कोरबा में हुई हत्या के बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। कई मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं की जाती, और यदि की भी जाती है तो प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को लंबा खींचा जाता है।

पिछले कुछ वर्षों में खनिज विभाग के अधिकारियों और खदानों से जुड़े लोगों पर हमले बढ़े हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण के कारण सजा नहीं मिल पाती। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।

सवाल जो सरकार को घेर रहे हैं

  1. क्या मुख्यमंत्री अवैध खनन और वसूली के इस खेल से अनजान हैं?

  2. क्या भाजपा नेताओं को इस माफिया नेटवर्क से फायदा मिल रहा है?

  3. क्यों पुलिस प्रशासन ऐसे मामलों में सख्ती नहीं बरत रहा?

  4. क्या कोयला और रेत खदानों में चल रहे इस अवैध कारोबार की निष्पक्ष जांच होगी?

  5. क्या मारे गए ट्रांसपोर्टर के परिवार को न्याय मिलेगा?

विपक्ष का आंदोलन, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। पार्टी का कहना है कि यदि भाजपा सरकार कोयला और रेत खदानों में अवैध वसूली और गुंडाराज पर रोक नहीं लगाती, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

कांग्रेस ने मांग की है कि कोरबा की हत्या के मामले में भाजपा नेता रोशन ठाकुर की तुरंत गिरफ्तारी हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि रेत और कोयला माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

छत्तीसगढ़ में अवैध खनन और वसूली के इस गंदे खेल ने अब राजनीतिक हत्याओं का रूप ले लिया है। कोरबा में भाजपा नेता द्वारा की गई हत्या इस बात का प्रमाण है कि सत्ता का संरक्षण मिलने पर अपराधी कितने बेखौफ हो जाते हैं।

अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई करेगी या फिर इस मामले को भी दबा दिया जाएगा? विपक्ष और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति किस ओर करवट लेती है।

Ashish Sinha

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