
10 दुकानों को चेतावनी, नाबालिगों को न बेचे तम्बाकू,क्या है सजा का प्रावधान?
10 दुकानों को चेतावनी, नाबालिगों को न बेचे तम्बाकू
बिलासपुर। कलेक्टर राहुल देव के निर्देशानुसार राष्टीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत डॉ. देवेन्द्र पैकरा मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में कोटपा एक्ट 2003 के तहत 20 नवंबर को प्रवर्तन दल ने चालानी कार्रवाई की। इस दौरान महेन्द्र देवागंन, बलराम साकत, ओम साहू व दिलेश्वर जायसवाल के सहयोग से जिले में कोटपा एक्ट की धारा 4 व धारा 6 के तहत 21 दुकानों में कार्रवाई की गई। इसमें 10 दुकानों में चेतावनी दी गई। वही 11 दुकानों में चालानी कार्रवाई के तहत 1500 रुपए वसूले गए। साथ ही नाबालिगों को तम्बाकू उत्पाद ना बेचने की बात कही।
क्या है धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 ? जानिए
भारत में धूम्रपान को लेकर नजरिये की बात करें तो यह देखा गया है कि जिस तरह दुनिया के दूसरे देशों में इसे लेकर कानून है और इस से सेहत पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को लेकर जागरूकता है , वो तो व्यापक तौर पर है लेकिन फिर भी व्यावहारिक तौर पर यह अभी भी एक समस्या ही है | सार्वजनिक जगहों या ट्रेन आदि में धूम्रपान वर्जित है लेकिन फिर भी अक्सर लोग नियमों को तक पर रखकर इसे तोड़ते हुए नजर आते है जिसकी वजह से न केवल धूम्रपान करने वाले के सेहत और धन की हानि होती है बल्कि इसके साथ ही उसके आस पास मौजूद दूसरे लोगो को भी वही सेहत के नुकसान झेलने पड़ते है क्योंकि वो लोग उस बीडी या सिगरेट से निकला हुआ धुआं सांसों के जरिये अपने शरीर में ले रहे होते है , जिसे पेसिव स्मोकिंग कहते है | ऐसे में आपको धूम्रपान निषेध अधिनियम और इसमें जुड़े प्रावधानों के बारे में पता होना चाहिए ताकि ऐसी किसी घटना को आप जिम्मेदारी और जागरूकता से रोक पायें –
धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 क्या है जानिए
सबसे पहले इसकी शुरुआत भारतीय रेल से हुई | भारतीय रेल ने 1989 में धूम्रपान को कानून तौर पर वर्जित करे की व्यवस्था दी और इसके तहत यह कहा गया कि रेलगाड़ी और रेल परिसर के अंदर धूम्रपान कानूनन वर्जित होगा इसके साथ ही सौ रूपये के जुर्माने की व्यवस्था दी गयी | लेकिन जैसा कि आप जानते है भारत तो भारत है , और लोग लोग , इस व्यवस्था की वजह से कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं आया क्योंकि लोगो में जागरूकता ही नहीं थी और इस बात को समझ लेना जरुरी है कि समाज में होने वाले सकारात्मक बदलाव केवल समाज में मौजूद लोगो की जागरूकता और इच्छाशक्ति की वजह से आते है न कि किसी कानून को थोपने से |
खैर यह मुद्दा बरसों से लंबित रहा और आखिर में साल 2003 में इस समबन्ध में स्पष्ट कानून बनाया गया जिसके तहत सिगरेट बीडी , सिगरेट या किसी भी तरह के तम्बाकू उत्पाद का सेवन या इस्तेमाल करना , सभी तरह के सार्वजानिक जगहों पर कानूनन अपराध माना जाएगा और इसे सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन, निरोध तथा व्यापार, वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति तथा वितरण विनियमन) अधिनियम, 2003 कहा जाता है तथा संक्षेप में सीओटीपीए या कोटपा और बोलचाल की भाषा में धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 के नाम से जाना जाता है | इसके सार्वजनिक स्थान की परिभाषा के तहत वो सारे जगह आते है जंहा पर कोई भी सामान्य व्यक्ति का आना जाना हो जैसे कि बस अड्डे , रेलवे स्टेशन ,पार्क ,खेल के मैदान , अस्पताल , न्यायालय , स्कूल , कॉलेज या कोई भी शैक्षिक संस्था , शौपिंग मॉल ,सरकारी भवन और अन्य किसी भी तरह की कोई ऐसी जगह जन्हा लोग-बाग आ जा सकते हो |
धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 के तहत कुछ खास जगहों को धूम्रपान के लिए चिन्हित किया जा सकता है जिसमे नियमानुसार बड़े होटलों या एअरपोर्ट जैसी जगहों पर कुछ खास कक्ष बनाये जा सकते है लेकिन उस धूम्रपान कक्ष को मुख्य खंड से अलग खंड में होना चाहिए | जगह ऐसी होनी चाहिए जन्हा पर वेंटीलेशन हो और दूसरे लोगो को पैसिव स्मोकिंग जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़े | Passive Smoking उस घटना को कहते है जब किसी धूम्रपान कर रहे व्यक्ति की वजह से दूसरे व्यक्ति साँस के द्वारा उस व्यक्ति के द्वारा छोड़े गये धुएँ को अपने शरीर में ग्रहण करते है |
धारा 25 एवं 26 में केंद्र और राज्य सरकार को इस बात की जिम्मेदारी दी गयी है कि वह धूम्रपान निषेध अधिनियम की पालना को सुनिश्चित करने के लिए , एक तो धूम्रपान मुक्त जोन को निर्धारित करेंगी और साथ ही कारवाई करने और कानून की पालना के लिए एक या एक से अधिक सक्षम अधिकारी भी नियुक्त कर सकती है जिन्हें मौके पर ही मामले को निपटाने का अधिकार रहेगा और वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत इस मामले को ले सकते है | इसके साथ ही हर कार्यालय के या संगठन के मुखिया व मानव संसाधन प्रबंधक और प्रशासन के अध्यक्ष को जुर्माने की वसूली के लिए अधिकार दिया गया है और वसूली की यह राशी राज्य सरकार के हक़ में आती है जिसे सरकार के ट्रेज़री अकाउंट में जमा करवा दिया जाता है |
धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 के अंतर्गत निम्न चीजे अपराध के दायरे में आती है –
किसी भी कार्यस्थल या सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करना |
तम्बाकू के बारे में एडवरटाइजमेंट करना |
18 से कम उम्र के नौजवानों को बीडी , सिगरेट या कोई भी तम्बाकू उत्पाद विक्रय करना |
स्कूल या कॉलेज के 100 मीटर के दायरे में तम्बाकू उत्पाद बेचना |
बिना सचित्र वैधानिक चेतावनी के तम्बाकू उत्पाद बेचना | इसलिए हर तम्बाकू पैकेट या सिगरेट के पैकेट पर आप चेतावानी देख सकते है |
इस अधिनियम के तहत निम्न सजायें या अर्थ दंड का प्रावधान है –
सार्वजनिक स्थानों पर अगर कोई धूम्रपान करता हुआ पाया जाता है तो 200 रूपये जुर्माने का प्रावधान है |
तम्बाकू के किसी भी उत्पाद को विज्ञापनो के जरिये प्रात्साहित करने को भी इसी कानून का उल्लंघन मन जायेगा और इसके तहत दो वर्ष से पांच वर्ष की सजा और 5 से 10 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान है |
स्कूल या कॉलेज या अन्य शिक्षा संस्थानों के आस पास 100 मीटर से कम के दायरे में विक्रय करते हुए पाए जाने पर 200 रूपये जुर्माने का प्रावधान है |
अगर कोई तम्बाकू उत्पाद बनाने वाला सचित्र वैधानिक चेतावनी वाले नियम की अवहेलना करता है तो ऐसे में उस पर पहली सजा दो साल की सजा और पांच हजार रूपये का अर्थदंड लगाया जा सकता है और दोबारा वही अपराध होने पर पांच साल की सजा और दस हजार का अर्थदंड की व्यवस्था की जा सकती है | वही रिटेलर पर इसी मामले में क्रमश: एक साल की सजा और एक हजार रूपये अर्थदंड व दो साल की सजा और तीन हजार के अर्थदंड की व्यवस्था है |
बच्चों को तंबाकू बेचने पर 7 साल की सजा का प्रावधान है और अगर 18 साल के कम उम्र के बच्चों को तम्बाकू उत्पाद बेचते हुए कोई पाया जायेगा तो इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जायेगा | इसकी पालना नहीं करने वाले को सात साल की सजा और एक लाख तक के जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है |
अगर आपके आस पास प्रतिबंधित जगह पर कोई धूम्रपान कर रहा हो तो इसकी शिकायत के लिए आप निम्न अथॉरिटी को सम्पर्क कर सकते है –
रेल स्टेशन या परिसर , सरकारी या प्राइवेट अस्पताल , पोस्ट ऑफिस , परिवहन और ट्रेन में अगर कोई धुम्रपान करते हुए पाया जाता है तो आप क्रमश : स्टेशन मास्टर, सहायक स्टेशन मास्टर, स्टेशन अध्यक्ष और अस्पताल के निदेशक या अस्पताल प्रशासक और पोस्ट ऑफिस के पोस्ट मास्टर ,बस में कंडक्टर और बस अड्डे पर यातायात अधीक्षक या प्रशासक और ट्रेन में टीटीई,रेलवे सुरक्षा बल के सहायक सब इंस्पेक्टर व उससे ऊपर के अधिकारी को अप्रोच कर सकते है | सार्वजनिक क्षेत्र में पुलिस सब इंस्पेक्टर, फूड इंस्पेक्टर आदि को अप्रोच किया जा सकता है | या जैसा कि आपको ऊपर बताया है किसी सार्वजनिक भवन आदि में आप उस कार्यालय के अधीक्षक या मुखिया को सम्पर्क कर इस बारे में शिकायत कर सकते है |
तो ये है धूम्रपान निषेध अधिनियम 2003 और इस पोस्ट में अधिक जानकारी जोड़ने या किसी गलती के सुधार के लिए आप हमे ईमेल कर सकते है |
किस कानून के अंतर्गत है तंबाकू और सिगेरट पर रोक, क्या है सजा का प्रावधान?
धारा 20 (2) में निर्दिष्ट कोई भी व्यक्ति जो बिना किसी चेतावनी के तंबाकू या सिगरेट बेचता या वितरित करता है, इस धारा के तहत उत्तरदायी होगा और 1 साल तक की कैद और 1 हजार तक का जुर्माना हो सकता है और अगर दूसरी बार दोषी पाया जाता है तो दो साल तक कैद के साथ तीन हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी जा सकती है.
तंबाकू और सिगरेट को हमारे शरीर के लिए हानिकारक माना जाता है, इसलिए भारत सरकार ने इन उत्पादों के निर्माताओं पर सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 (THE CIGARETTES AND OTHER TOBACCO PRODUCTS Act) के माध्यम से कुछ प्रतिबंध लगाए हैं. आईये जानते है क्या है सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद से सम्बंधित कानून और सजा के प्रावधान.
विज्ञापन पर सख्त रोक है
सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम की धारा 5 उन लोगो पर प्रतिबंध लगाती है, जो लोग सिगरेट या तंबाकू का उत्पादन करते है या किसी भी तरह से तंबाकू या सिगरेट की आपूर्ति या वितरण के साथ ही, उनका विज्ञापन भी करते है या विज्ञापन का कारण बनते है, तो इस स्थिति में उन्हें इस धारा के तहत उत्तरदायी ठहराया जाएगा. इसके अलावा, यह उन लोगों को भी इस धारा के अंतर्गत शामिल करता है जो इन उत्पादों के विज्ञापन में भाग लेते हैं.
यह अधिनियम लोगों को तंबाकू या सिगरेट के विज्ञापनों वाले वीडियो या फिल्म टेप को बेचने या खरीदने पर भी प्रतिबंध लगाता है. इसके अलावा यह लोगों को किसी इमारत या खंभे या वाहनों पर होर्डिंग, फ्रेम के माध्यम से इन उत्पादों का विज्ञापन करने से भी रोकता है
सजा का प्रावधान
अधिनियम की धारा 22 के अनुसार तंबाकू और सिगरेट के विज्ञापन पर रोक लगाने वाले अधिनियम की धारा 5 का उल्लंघन करते पाए जाने पर दो साल तक की कैद या दस हजार का जुर्माना या जुर्माना देना पड़ सकता है.
हालांकि इसी धारा में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति इसी अधिनियम के तहत दूसरी बार दोषी पाया जाता है तो उसे पांच साल तक की कैद हो सकती है और पांच हजार रुपये का जुर्माना भी देना होगा.
किस देश ने युवाओं को तंबाकू बेचने पर लगाई रोक? पकड़े जाने पर करीब 80 लाख रुपये का जुर्माना
दुनिया के कुल धूम्रपान करने वालों में 11 फीसदी से ज्यादा भारत में हैं. भारत में तंबाकू नियंत्रण कानून, सिगरेट एक्ट 1975 में लागू हुआ जो विज्ञापन एवं सिगरेट के पैकेटों पर वैधानिक स्वास्थ्य चेतावनी को अनिवार्य करता है.
किस देश ने युवाओं को तंबाकू बेचने पर लगाई रोक? पकड़े जाने पर करीब 80 लाख रुपये का जुर्माना
तंबाकू बैन पर कानून
अगर कोई पूछे कि दुनिया में कौन सा देश है, जिसने सबसे पहले अपने यहां सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया तो शायद आपको दिमाग पर जोर देना पड़े. वहीं, कोई यह पूछ ले कि किस देश ने नई पीढ़ी को तंबाकू से बचाने को एक सख्त कानून बना दिया है तो भी मुश्किल आ सकती है. जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी ऐसी जानकारियां जरूरी हैं और सामान्य ज्ञान की दृष्टि से भी ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी हमारे पास होनी चाहिए.
भारत का मित्र और पड़ोसी देश भूटान ने साल 2010 में सिगरेट की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला ले लिया था. वहां स्मोकिंग के खिलाफ कानून तो हैं ही, लोग भी जागरूक हैं. तंबाकू का किसी भी रूप में इस्तेमाल करते हुय पकड़े जाने पर सीधे जेल होगी.
किस देश में युवाओं के तंबाकू लिए बैन?
साल 2022 के दिसंबर महीने में न्यूजीलैंड ने इतिहास रचते हुए एक ऐसा कानून बना दिया जिसमें एक जनवरी 2009 के बाद पैदा हुए किसी भी किशोर को तंबाकू का कोई भी प्रोडक्ट नहीं बेचा जा सकेगा. अगर कोई बेचते हुए पकड़ा जाएगा तो डेढ़ लाख न्यूजीलैंडी डॉलर यानी करीब 96 हजार अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भरना होगा. ऐसे में भारतीय करेंसी में बात करें तो करीब 80 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है.
यह कानून साल 2023 में लागू हो चुका है. सरकार का लक्ष्य यह है कि तंबाकू के जो भी प्रोडक्ट बिक रहे हैं, उनमें निकोटीन की मात्रा कम कर दी जाएगी. इस साल के अंत तक न्यूजीलैंड में 90 फीसदी तंबाकू बेचने वाली दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे. देश में छह हजार दुकानें हैं, जिन्हें छह सौ तक इसी साल दिसंबर तक कर दिया जाना है.
न्यूजीलैंड की गिनती दुनिया के कम स्मोकिंग वाले देश में होती है लेकिन अब जो लक्ष्य न्यूजीलैंड ने अपने लिए तय किया है, उसके मुताबिक 2025 तक यह देश स्मोकिंग फ्री हो जाएगा. क्योंकि अभी भी देश में स्मोकिंग करने वालों की तादाद बहुत कम है. ब्रिटेन ने भी साल 2030 तक धूम्रपान मुक्त होने का लक्ष्य रखा है. कनाडा और स्वीडन भी इसे कम करने को संकल्पित हैं.
भारत में धूम्रपान एवं तंबाकू को लेकर तीन कानून
एक- भारत में तंबाकू नियंत्रण कानून, सिगरेट एक्ट 1975 में लागू हुआ जो विज्ञापन एवं सिगरेट के पैकेटों पर वैधानिक स्वास्थ्य चेतावनी को अनिवार्य करता है.
दो- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने साल 2007-08 में नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया था.
तीन- इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध विधेयक 2019 में लागू हुआ. इसके तहत उत्पादन, निर्यात-आयात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण तथा विज्ञापन पर रोक लगी हुई है.
धूम्रपान से जुड़े कुछ जरूरी तथ्य जान लेते हैं.
सिगरेट की पहली कश के साथ धुएं के साथ निकोटिन खून में घुलता है औ तेजी से दिमाग में आनंद का एहसास करने वाला रसायन डोपोमीन रीलीज होता है. और आदमी धीरे-धीरे इसका शिकार होने लगता है.
धूंआ, टार, कॉर्बन मोनोऑक्साइड गले में खराश पैदा करता है. यही कारण है कि सिगरेट पीने वालों को सुबह-सुबह कफ की शिकायत होती है.
शरीर में मौजूद करोड़ों छिद्रों की मदद से हमारे फेफड़े हर दिन बड़ी मात्रा में हवा फ़िल्टर करते हैं लेकिन धुएं में उपलब्ध टार इनमें से तमाम छेद बंद कर देते हैं.
पहली सिगरेट पीने के साथ ही इंसान का दिल हर मिनट तीन बार ज्यादा धड़कता है. आमतौर पर इसे एक मिनट में 72 बार धड़कना चाहिए. ज्यादा धड़कने का मतलब जल्दी थकान लगेगी.
धूम्रपान से पेट में एसिड बढ़ जाता है. आंतों में मौजूद अच्छे वैक्टीरिया पर इसका बुरा असर पड़ता है.
कान और नाक में भी पड़ना शुरू होता है निगेटिव असर
तंबाकू से दुनिया में 80 लाख मौतें हर साल हो रही हैं, इनमें 10 लाख से ज्यादा ऐसे लोग दुनिया छोड़ रहे हैं जो केवल धूम्रपान वालों की संगत में रहते हैं.
दुनिया के कुल धूम्रपान करने वालों में 11 फीसदी से ज्यादा भारत में हैं.
दुनिया में होने वाली कुल मौतों में 50 फीसदी से ज्यादा चीन,भारत, अमेरिका और रूस में हैं.