पाक-अफगान युद्धविराम: दोहा वार्ता में बनी सहमति, तनाव के बीच 3 अफगान खिलाड़ियों की मौत

पाकिस्तान-अफगानिस्तान में तत्काल युद्धविराम: दोहा वार्ता में बनी सहमति, सीमा पर शांति बहाल करने का लिया निर्णय

दोहा/नई दिल्ली: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक सप्ताह से चल रहे भीषण सीमा संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक बड़ी सफलता मिली है। कतर की राजधानी दोहा में आयोजित वार्ता के दौरान दोनों पड़ोसियों ने तत्काल युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति व्यक्त की है। तुर्की की मध्यस्थता में आयोजित हुई इस वार्ता का ऐलान रविवार तड़के कतर के विदेश मंत्रालय ने किया।

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दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने और शांति सुनिश्चित करने के लिए एक-दूसरे के साथ तालमेल बढ़ाने का भी निर्णय लिया है।

तनाव और वार्ता का उद्देश्य

2021 में काबुल में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से दोनों पड़ोसियों के बीच यह सबसे ज्यादा टकराव का दौर था, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए थे।

वार्ता का मुख्य उद्देश्य: पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने स्पष्ट किया कि बातचीत का मुख्य लक्ष्य यह था कि अफगानिस्तान से पाकिस्तान में सीमा पार आतंकवाद को रोका जाए और पाक-अफगान सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल की जाए।

प्रतिनिधिमंडल और मध्यस्थता

दोहा में हुई इस उच्च स्तरीय वार्ता में दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए:

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  • अफगानिस्तान: रक्षा मंत्री मुल्ला मुहम्मद याकूब ने काबुल प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
  • पाकिस्तान: रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने तालिबान प्रतिनिधियों के साथ चर्चा का नेतृत्व किया।
  • मध्यस्थ: तुर्की की मध्यस्थता में यह महत्वपूर्ण समझौता हुआ।

युद्धविराम के बावजूद हवाई हमले और खेल जगत पर असर

युद्धविराम की घोषणा के बावजूद तनाव बना हुआ है। अफगानिस्तान ने बताया कि शुक्रवार को युद्धविराम की समय सीमा बढ़ाए जाने के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने नागरिकों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए थे।

  • अफगानिस्तान का आरोप: काबुल ने दावा किया कि उसके सैनिकों को बातचीत जारी रखने के लिए जवाबी हमला न करने का आदेश दिया गया था। इन हमलों में पक्तिका प्रांत में तीन अफगान खिलाड़ियों की मौत हो गई थी।
  • जवाबी कदम: इन दुर्भाग्यपूर्ण हमलों के बाद, अफगानिस्तान ने विरोध जताते हुए पाकिस्तान में होने वाली T-20 क्रिकेट सीरीज से अपना नाम वापस ले लिया

आतंकवाद पर परस्पर आरोप

हिंसा तब शुरू हुई जब इस्लामाबाद ने काबुल से उन आतंकवादियों को रोकने की मांग की, जो सीमा पार से पाकिस्तान में हमले कर रहे थे।

  • पाकिस्तान का रुख: इस्लामाबाद का कहना है कि आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंकने और सख्त इस्लामी शासन लागू करने के लिए लंबे समय से अभियान चलाया हुआ है।
  • तालिबान का खंडन: तालिबान ने आतंकवादियों को पनाह देने से इनकार किया है। उल्टा उन्होंने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए गलत सूचना फैलाने और इस्लामिक स्टेट से जुड़े समूहों का समर्थन करने का आरोप लगाया।

फिलहाल, इस तत्काल युद्धविराम पर सहमति बनने से सीमा पर तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, लेकिन दोनों देशों के बीच कायम परस्पर अविश्वास के चलते सीमा पर शांति की बहाली एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।