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संघ का संदेश: “एकात्मता ही शक्ति है”, लखनपुर में हुआ अनुशासन और समरसता का प्रदर्शन

आरएसएस शताब्दी वर्ष पर लखनपुर में हुआ शस्त्र पूजन और भव्य विजयादशमी उत्सव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर लखनपुर में विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन हुआ। प्रेम शंकर सिदार ने एकता और समरसता का संदेश दिया, स्वयंसेवकों के पथ संचलन ने नगर को देशभक्ति से भर दिया।

लखनपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के शताब्दी वर्ष 2025 के अवसर पर लखनपुर संघ इकाई द्वारा विजयादशमी उत्सव इस वर्ष विशेष उल्लास, अनुशासन और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। नगर के सामुदायिक भवन से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने पारंपरिक रूप से शस्त्र पूजन कर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।

शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक एकता का संदेश

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मध्य क्षेत्र प्रांत प्रचारक प्रेम शंकर सिदार ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि “आज देश को तन, मन और आत्मा से समर्पित सच्चे स्वयंसेवकों की आवश्यकता है।” उन्होंने संघ की पाँच प्रमुख विचारधाराओं — सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक समरसता, आत्म जागरण, कुटुम्ब प्रबोधन और पर्यावरण संरक्षण — को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

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नगर में गूंजे कदमताल, पुष्पवर्षा से स्वागत

शस्त्र पूजन के बाद संघ के स्वयंसेवकों, पदाधिकारियों और अनुसांगिक संगठनों के सदस्यों ने पूर्ण गणवेश में भव्य पथ संचलन किया। अनुशासित पंक्तियों में कदमताल करते स्वयंसेवक जब नगर की गलियों से गुजरे, तो नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। संचलन ने पूरे लखनपुर को देशभक्ति और एकता के रंगों में रंग दिया।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के केबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल, वरिष्ठ संघ पदाधिकारी एल.पी. सिसोदिया, बृजेन्द्र पांडेय, सुरेन्द्र साहू, राजेन्द्र अग्रवाल, प्रदीप गुप्ता, दिनेश बारी, रवि भूषण पांडेय, हरविंदर अग्रवाल समेत अनेक गणमान्यजन और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

शांति व्यवस्था रही सुदृढ़

पथ संचलन के दौरान नगर में पुलिस बल की सक्रिय तैनाती रही, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

संघ का संदेश: “एकात्मता ही शक्ति है”

विजयादशमी पर्व के इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्र की मजबूती का आधार एकता, अनुशासन और संगठनात्मक शक्ति है। संघ की यह परंपरा न केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, बल्कि यह आत्मबल और सामाजिक जागरूकता का भी प्रतीक बनी।

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