CJI पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर बोले – “मैं खुद दलित हूं”, खजुराहो मंदिर को लेकर करेंगे अनशन

CJI पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर बोले – “मैं खुद दलित हूं, भगवान बुद्ध से प्रभावित हूं”

खजुराहो के विष्णु मंदिर को लेकर करेंगे अनशन, बोले – भगवान का आदेश मिला है

खजुराहो/दिल्ली | 10 अक्टूबर 2025 | ब्यूरो रिपोर्ट| सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील राकेश किशोर ने अब खुद को दलित बताते हुए नया बयान दिया है। सोशल मीडिया पर उनकी जाति को लेकर चल रही बहस के बीच किशोर ने कहा —

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“मैं खुद दलित हूं। मुझे दुख होता है कि एक वर्ग हिंदुओं से कटकर अलग हो रहा है। इन्हीं लोगों ने मेरे घर का घेराव किया था।”

किशोर ने कहा कि वे बौद्ध धर्म से गहराई से प्रभावित हैं।

“बौद्ध धर्म का ज्ञान जितना मुझे है, उतना किसी और को मिलना मुश्किल है। मैंने गौतम बुद्ध को सबसे अधिक पढ़ा है। मैं भगवान बुद्ध के विचारों से प्रभावित हूं,” उन्होंने कहा।


खजुराहो में अनशन की घोषणा

किशोर ने कहा कि वे जल्द ही खजुराहो जाकर अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने कहा —

“मेरा उद्देश्य है कि मैं खजुराहो जाकर भगवान विष्णु की मूर्ति को रिस्टोर कराऊं। मुझे भगवान का आदेश प्राप्त हो गया है।”

उन्होंने दावा किया कि वे सनातन धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

“सनातन की आवाज को खत्म करने के लिए मुझ पर हमला हो रहा है,” किशोर ने कहा।

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घटना की पृष्ठभूमि

6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर-1 में सुनवाई के दौरान राकेश किशोर ने अचानक CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी और “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे” के नारे लगाए थे।
यह मामला खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की क्षतिग्रस्त मूर्ति की बहाली को लेकर दायर याचिका से जुड़ा था, जिसे 16 सितंबर को CJI गवई की बेंच ने खारिज कर दिया था।

कोर्ट ने उस समय कहा था —

“अगर आप भगवान विष्णु के प्रबल भक्त हैं, तो प्रार्थना करें और ध्यान लगाएं।”


कानूनी कार्रवाई और बार काउंसिल की प्रतिक्रिया

घटना के बाद सुरक्षा कर्मियों ने किशोर को तुरंत हिरासत में ले लिया था।
हालांकि CJI गवई ने उन्हें माफ कर दिया, लेकिन दिल्ली बार काउंसिल ने किशोर के प्रैक्टिस लाइसेंस को निलंबित कर दिया है।
कोई FIR दर्ज नहीं की गई, लेकिन बैंगलोर पुलिस ने एक अलग शिकायत दर्ज कर दिल्ली पुलिस को जांच सौंपी है।


सोशल मीडिया पर जातिगत बहस

घटना के बाद सोशल मीडिया पर किशोर की जाति को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।
कुछ यूजर्स ने उन्हें “सवर्ण हिंदूवादी” बताया, जबकि कुछ ने CJI गवई (जो दलित समुदाय से हैं) पर हमले को जातिगत रंग देने की कोशिश की।
किशोर ने अपने वीडियो बयान में सफाई दी कि वे खुद दलित हैं और उनके इरादे धार्मिक नहीं, बल्कि आस्था और न्याय से जुड़े हैं।