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WHO ग्लोबल समिट में पीएम मोदी का संदेश: अश्वगंधा बनेगा वैश्विक स्वास्थ्य का आधार, पारंपरिक चिकित्सा पर भारत का नेतृत्व

WHO ग्लोबल समिट में भारत की पारंपरिक चिकित्सा की गूंज, पीएम मोदी ने अश्वगंधा को बताया वैश्विक स्वास्थ्य का भविष्य

✍️ प्रदेश खबर | नई दिल्ली | भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन में भारत की भूमिका को मजबूती से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य और कल्याण की जिम्मेदारी भी समान रूप से निभा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों में हमारा फोकस केवल आज की जरूरतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सतत, सुरक्षित और वैज्ञानिक स्वास्थ्य समाधान विकसित करना हमारी जिम्मेदारी है।


अश्वगंधा को वैश्विक मंच पर मिला सम्मान

WHO ग्लोबल समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अश्वगंधा पर आधारित स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि—

“भारत अश्वगंधा जैसी Time-Tested Herbs को Global Public Health का हिस्सा बनाने के लिए पूरी तरह कमिटेड होकर काम कर रहा है।”

अश्वगंधा, जिसे आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है, आज वैश्विक स्तर पर तनाव प्रबंधन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य के लिए पहचाना जा रहा है। पीएम मोदी ने इसे भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का प्रतीक बताया।


WHO प्रदर्शनी में दिखी वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा की झलक

प्रधानमंत्री ने समिट के दौरान आयोजित प्रदर्शनी का भी उल्लेख किया, जिसमें दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और हर्बल उपचारों को प्रदर्शित किया गया।

उन्होंने कहा—

“WHO Global Summit on Traditional Medicine की प्रदर्शनी में दुनिया भर की प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों और हर्बल उपचारों को प्रदर्शित किया गया, जो आधुनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में उनकी बढ़ती प्रासंगिकता और संभावनाओं को दर्शाता है।”

यह प्रदर्शनी इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक समुदाय अब प्राकृतिक, समग्र और निवारक स्वास्थ्य प्रणालियों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।


WHO महानिदेशक से पीएम मोदी की अहम बातचीत

समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस से भी मुलाकात की। इस बातचीत में—

  • समग्र स्वास्थ्य
  • निवारक देखभाल
  • पारंपरिक चिकित्सा की वैज्ञानिक मान्यता
  • वैश्विक सहयोग

जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

पीएम मोदी ने कहा—

“हमने पारंपरिक चिकित्सा की अपार संभावनाओं पर चर्चा की, जो समग्र स्वास्थ्य, निवारक देखभाल और वेलनेस को बढ़ावा दे सकती हैं। साथ ही Evidence-Based Practices और वैश्विक सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया।”

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यह बातचीत इस बात का संकेत है कि भारत आयुष और पारंपरिक चिकित्सा को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल कराने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।


भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य का विज़न

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि—

“पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली में हमारा फोकस वर्तमान जरूरतों से आगे बढ़कर भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य और कल्याण तक होना चाहिए।”

उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक चिकित्सा को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए।

भारत का आयुष मॉडल इसी सोच पर आधारित है, जहां—

  • रोकथाम को प्राथमिकता
  • जीवनशैली आधारित उपचार
  • प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग

पर जोर दिया जाता है।


BJP संगठनात्मक मजबूती पर भी संदेश

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा—

“मुझे विश्वास है कि उनका संगठनात्मक और प्रशासनिक अनुभव पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में सहायक होगा और हम सभी मिलकर जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेंगे।”

यह मुलाकात आगामी राजनीतिक रणनीतियों और संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।


भारत बन रहा है Global Wellness Leader

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • योग
  • आयुर्वेद
  • यूनानी
  • सिद्ध
  • प्राकृतिक चिकित्सा

के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका उसे Global Wellness Leader के रूप में स्थापित कर रही है।

WHO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पारंपरिक चिकित्सा को लेकर भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि देश अब स्वास्थ्य कूटनीति (Health Diplomacy) में भी मजबूत स्थिति बना रहा है।


आर्थिक और रोजगार की संभावनाएं

आयुष और औषधीय पौधों के वैश्वीकरण से—

  • किसानों को नई बाजार संभावनाएं
  • फार्मा और हर्बल इंडस्ट्री को बढ़ावा
  • स्टार्टअप और रिसर्च में निवेश

जैसे अवसर भी बढ़ रहे हैं।

अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलों की वैश्विक मांग से भारत के ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।


WHO ग्लोबल समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश और पहल यह स्पष्ट करती है कि भारत—

  • अपनी प्राचीन चिकित्सा परंपरा पर गर्व करता है
  • उसे वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ विश्व के सामने प्रस्तुत कर रहा है
  • और भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है

अश्वगंधा पर डाक टिकट का विमोचन केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की स्वास्थ्य विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का संदेश है।


 

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