कार्तिगई दीपम विवाद: आत्मदाह से मौत पर हिंदू संगठनों का आरोप, DMK सरकार कटघरे में

कार्तिगई दीपम विवाद: आत्मदाह से 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत पर भड़की हिंदू संगठनों की नाराज़गी, DMK सरकार पर गंभीर आरोप

कार्तिगई दीपम विवाद को लेकर एक 40 वर्षीय व्यक्ति द्वारा कथित आत्मदाह के बाद तमिलनाडु की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले पर विश्व हिंदू रक्षा परिषद की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष यमुना पाठक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए DMK सरकार पर संस्थागत लापरवाही और न्यायालय की अवमानना का आरोप लगाया है।

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ANI से बातचीत में यमुना पाठक ने कहा कि यह घटना DMK की “चयनात्मक धर्मनिरपेक्षता” का प्रतीक है, जो हिंदू आस्था को कुचलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से थिरुपरनकुंद्रम मुरुगन पहाड़ी पर श्रद्धालुओं के पूजा-अर्चना के अधिकार को बरकरार रखा था, इसके बावजूद तमिलनाडु सरकार सुरक्षित और निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने में विफल रही।

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यमुना पाठक ने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि अदालत के आदेशों की अवहेलना है। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण श्रद्धालुओं पर लगातार मानसिक दबाव बना, जो अंततः पूरनचंद्रन की मौत का कारण बना। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “इस मौत के लिए शासक जिम्मेदार हैं, और इसका नैतिक दायित्व सरकार पर है।”

विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने तमिलनाडु सरकार से सभी मुरुगन भक्तों से सार्वजनिक माफी की मांग की है। साथ ही, हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई है। संगठन ने इस पूरे मामले में न्यायिक जांच कराने की भी मांग उठाई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस घटना के बाद धार्मिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकार की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। विभिन्न हिंदू संगठनों और सामाजिक समूहों ने इसे आस्था पर हमला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

फिलहाल, इस मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक गरमाने की संभावना है।