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अरावली से हसदेव तक पर्यावरण विनाश पर टी. एस. सिंहदेव का बड़ा बयान, आंदोलन को समर्थन

अरावली से लेकर हसदेव तक, पर्यावरण विनाश एक ही सोच का परिणाम: टी. एस. सिंहदेव

वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी. एस. सिंहदेव ने देशभर में चल रहे अरावली संरक्षण आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए पर्यावरण विनाश के खिलाफ़ सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि जल, जंगल और जीवन की सुरक्षा कवच है।

टी. एस. सिंहदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अरावली का अंधाधुंध विनाश आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डालने जैसा है। उन्होंने अरावली के संरक्षण और वनों की कटाई के खिलाफ चल रहे आंदोलन के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त की।

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उन्होंने अरावली की पहाड़ियों को छत्तीसगढ़ के सरगुजा स्थित रामगढ़ पहाड़ और हसदेव के जंगलों से जोड़ते हुए कहा कि चाहे अरावली हो या हसदेव—प्रकृति का यह विनाश एक ही सोच का परिणाम है, जहां मुनाफ़े के लिए पर्यावरण की बलि दी जा रही है और स्थानीय अधिकारों का दमन हो रहा है।

टी. एस. सिंहदेव ने दो टूक कहा कि “विकास के नाम पर विनाश स्वीकार नहीं है।”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
अरावली को बचाना है।
रामगढ़ को बचाना है।
हसदेव को बचाना है।
भविष्य को बचाना है।

इसी क्रम में टी. एस. सिंहदेव ने Save the Aravallis Campaign के तहत याचिका पर हस्ताक्षर कर आंदोलन को औपचारिक समर्थन दिया, जिसका प्रमाणपत्र भी सार्वजनिक किया गया है।

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