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बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक: अमित शाह की अध्यक्षता में बड़ा फैसला, 2029 से पहले न्याय प्रणाली को पूरी तरह बदलने का लक्ष्य






बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक: अमित शाह की अध्यक्षता में बड़ा फैसला, 2029 से पहले न्याय प्रणाली को पूरी तरह बदलने का लक्ष्य


मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक: अमित शाह की अध्यक्षता में बस्तर में ऐतिहासिक मंथन; पांच दशकों के विवाद खत्म, अब 2029 तक न्याय प्रणाली को हाई-टेक बनाने का बड़ा लक्ष्य

रिपोर्टर: विशेष संवाददाता, प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क
स्थान: बस्तर (छत्तीसगढ़)
दिनांक: 20 मई, 2026

बस्तर। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बस्तर क्षेत्र में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक देश के आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य और क्षेत्रीय विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। इस महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित इन चारों सदस्य राज्यों और केन्द्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। यह उच्च स्तरीय बैठक केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार की मेज़बानी में बस्तर के सुरम्य और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण वातावरण में आयोजित की गई।

मुख्य आकर्षण: पांच दशकों से विकास की दौड़ में पिछड़े बस्तर की धरती से केंद्रीय गृह मंत्री ने पूरे देश को नक्सल मुक्त घोषित करने की दिशा में सुरक्षाबलों के अभूतपूर्व योगदान को सराहा। साथ ही, अंतर-राज्यीय विवादों के पूर्ण खात्मे और 2029 से पहले सुप्रीम कोर्ट तक हर आपराधिक मामले को अंजाम तक पहुंचाने का रोडमैप साझा किया।

ऐतिहासिक क्षण: नक्सलवाद के दंश से पूरी तरह मुक्त हुआ बस्तर

बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण शब्दों में कहा कि यह पूरे देश के लिए बहुत हर्ष और संतोष का विषय है कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह अहम बैठक बस्तर की पावन भूमि पर आयोजित की जा रही है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस बैठक के आयोजन से पहले ही आज पूरा बस्तर क्षेत्र पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो चुका है। गृह मंत्री ने इस ऐतिहासिक सफलता का संपूर्ण श्रेय हमारे सुरक्षाबलों के जवानों के कठिन परिश्रम, अदम्य साहस और सर्वोच्च बहादुरी को दिया।

अमित शाह ने सुरक्षा रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि हमारी खुफिया एजेंसियों ने बहुत सटीकता के साथ जमीनी स्तर पर इनपुट एकत्र किए। इसके बाद केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों के पुलिसबलों और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के साथ मिलकर हर इनपुट पर सटीक और त्वरित कार्रवाई करने से संबंधित समयबद्ध निर्णय लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सैन्य बल से ही यह जीत हासिल नहीं हुई है, बल्कि ‘Whole of the Government Approach’ (संपूर्ण सरकार का दृष्टिकोण) को अपनाते हुए सभी राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार के सभी विभागों ने मिलकर काम किया। जैसे ही सुरक्षा बलों ने इलाकों को सुरक्षित किया, वैसे ही उन नक्सलमुक्त हुए सुदूर क्षेत्रों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी विकास परियोजनाओं को पहुंचाने का काम तेज गति से किया गया।

लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई: विकास के समकक्ष लाना ही अंतिम लक्ष्य

केन्द्रीय गृह मंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सचेत करते हुए कहा कि हालांकि हमने नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है और इलाकों को मुक्त करा लिया है, लेकिन हमारी वास्तविक लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि ये नक्सल प्रभावित क्षेत्र पिछले लगभग पांच दशक (50 वर्ष) से सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण विकास की मुख्यधारा की दौड़ में पिछड़ गए थे। अमित शाह ने दृढ़ संकल्प दोहराया कि जब तक हम इन पिछड़े और सुदूर वनांचलों को विकास के मामले में देश के बाकी विकसित क्षेत्रों के पूरी तरह समकक्ष नहीं ले आते, तब तक हमारी यह वैचारिक और प्रशासनिक लड़ाई समाप्त नहीं होगी। इस ऐतिहासिक मोड़ पर उन्होंने पूरे देश के नक्सल मुक्त होने के इस गौरवशाली अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक अभिनंदन और आभार व्यक्त किया।

छत्तीसगढ़ में स्थानीय नेतृत्व की भूमिका की सराहना करते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्य की वर्तमान सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ इस अंतिम लड़ाई में जो भी आवश्यक संसाधन, बल या रणनीतिक सहयोग मांगा, उन्होंने भारत सरकार के गृह मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्राप्त किया। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के दृढ़ नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाया और नीतियों को धरातल पर उतारा, जिसके परिणामस्वरूप आज बस्तर शांति और प्रगति के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।

विवादों से मुक्त हुआ मध्य भारत: संघीय ढांचा हुआ मजबूत

मध्य क्षेत्रीय परिषद की इस बैठक की सबसे बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज हम एक ऐसे सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में बैठ रहे हैं, जहां राज्यों के आपसी विवाद और राज्यों तथा केन्द्र के बीच के सभी पुराने विवादित मुद्दे पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि आज की इस 26वीं बैठक में जितने भी एजेंडे शामिल किए गए थे, वे किसी विवाद को सुलझाने के लिए नहीं बल्कि पूरी तरह से विकास कार्यों की प्रगति और उनकी मॉनिटरिंग से संबंधित थे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और अधिक मजबूत हुआ है। क्षेत्रीय परिषद की बैठकें अब केवल औपचारिक औपचारिकता बनकर नहीं रह गई हैं, बल्कि वे निरंतर और समयबद्ध तरीके से आयोजित हो रही हैं। इसी का सुखद परिणाम है कि आज देश के एक बहुत बड़े भूभाग में फैले इन चार प्रमुख राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) के बीच या इनका केन्द्र सरकार के साथ कोई भी नीतिगत या क्षेत्रीय विवाद शेष नहीं बचा है, जो भारतीय लोकतंत्र और प्रशासनिक इतिहास के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

देश का हृदय स्थल है मध्य क्षेत्र: खनिज, संस्कृति और अन्न का भंडार

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने मध्य क्षेत्रीय परिषद के भौगोलिक और आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस परिषद में शामिल चारों राज्य – छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड – सामूहिक रूप से देश की रीढ़ हैं। उत्तर के भव्य हिमालयी क्षेत्र से लेकर गंगा-यमुना के विशाल व उपजाऊ मैदानी भूभाग और वहां से लेकर मध्य भारत के घने वनों, पठारी तथा खनिज समृद्ध क्षेत्रों तक फैला यह भूभाग निश्चित रूप से देश के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र अपनी उपजाऊ भूमि के कारण देश के अन्न के भंडारों को भरने में सबसे बड़ी मदद करता है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र के समृद्ध खनिज भंडार जैसे कोयला, लोहा, बॉक्साइट आदि देश के औद्योगिक विकास को अभूतपूर्व गति प्रदान कर रहे हैं। इस क्षेत्र की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत, प्राचीन संस्कृति और जनजातीय कला ने हमेशा देश को सांस्कृतिक रूप से आगे बढ़ाने में मदद की है। अमित शाह ने ध्यान आकर्षित किया कि देश के बहुसंख्यक समाज की आस्था के लगभग सभी प्रमुख केंद्र इसी क्षेत्र में करीब-करीब एक ही भौगोलिक पट्टी में समाहित हैं। भौगोलिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ का विशेष महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य लगभग सात पड़ोसी राज्यों की सीमाओं को जोड़ता है, और इस रणनीतिक अवस्थिति के कारण पूरे मध्य क्षेत्र का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। आज यह पूरा क्षेत्र ना केवल बंदूक की संस्कृति और नक्सलवाद से मुक्त हुआ है, बल्कि आपसी कानूनी व प्रशासनिक विवादों से भी पूरी तरह मुक्त हुआ है।

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आंकड़ों की जुबानी: 2014 से 2026 के बीच आया क्रांतिकारी बदलाव

बैठक के दौरान गृह मंत्री ने क्षेत्रीय परिषदों की कार्यप्रणाली में आए गुणात्मक और संख्यात्मक सुधारों को स्पष्ट करने के लिए तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत किए, जो दर्शाते हैं कि वर्तमान सरकार ने इन मंचों को कितना जीवंत और परिणामदायी बनाया है:

प्रशासनिक मानक विगत कालखंड (2004 से 2014) वर्तमान कालखंड (2014 से 2026) प्रगति की स्थिति / प्रभाव
क्षेत्रीय परिषद की बैठकें मात्र 11 बैठकें बढ़कर 32 बैठकें हुईं लगभग तीन गुना अधिक निरंतरता
स्टैंडिंग कमेटी की बैठकें केवल 14 बैठकें ढाई गुना बढ़कर 35 हुईं जमीनी मुद्दों पर त्वरित प्रशासनिक मंथन
चर्चा में शामिल किए गए कुल मुद्दे मात्र 569 मुद्दे रिकॉर्ड 1729 मुद्दों पर चर्चा व्यापक और समावेशी एजेंडा निर्धारण
मुद्दों का सफल निराकरण सीमित और लंबित लगभग 80% मुद्दों का समाधान विवादों का ऐतिहासिक और स्थाई खात्मा

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जो भी मुद्दे लंबित श्रेणी में दिखाई दे रहे हैं, उनमें से अधिकांश केवल नियमित प्रशासनिक मॉनिटरिंग और विभिन्न चरणों में चल रहे विकास कार्यों से संबंधित हैं। इन मुद्दों में राज्यों के बीच किसी भी प्रकार का कानूनी या राजनैतिक विवाद अब शेष नहीं बचा है।

जल, स्वास्थ्य और पोषण: ग्रामीण विकास पर 50% ध्यान केंद्रित करने की अपील

बैठक के एजेंडे पर आगे बढ़ते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने लोक कल्याणकारी योजनाओं को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ‘जल जीवन मिशन -2’ पर सभी चार राज्यों को अभी से पूरी ताकत के साथ फोकस करना चाहिए। हमारा लक्ष्य हर हाल में प्रत्येक ग्रामीण और शहरी घर में नल से शुद्ध जल पहुंचाने की व्यवस्था को सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य, शिशु पोषण और समाज कल्याण को बेहद संवेदनशील और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मुद्दे बताया।

गृह मंत्री ने बैठक में मौजूद चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों से सीधा आह्वान किया कि वे कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ भारत सरकार द्वारा छेड़ी गई राष्ट्रव्यापी लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें। शिक्षा के क्षेत्र पर बात करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि स्कूलों में बच्चों की ड्रॉपआउट दर (स्कूल छोड़ने की दर) को न्यूनतम स्तर पर लाने और सरकारी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार करने के लिए और अधिक ठोस व नवाचारी कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और बिजली क्षेत्र में सुधार इस खनिज व कृषि समृद्ध क्षेत्र को एक पूर्ण विकसित क्षेत्र बनाने में सबसे बड़ा योगदान दे सकते हैं।

अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों से रणनीतिक अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकारों का कम से कम 50% बजटीय और प्रशासनिक ध्यान ग्रामीण विकास, पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने वाली कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित रहना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने शहरी नियोजन, जन स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार के इन चारों महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी और अधिक तीव्र गति से कार्य करने की आवश्यकता जताई।

डीबीटी और बैंकिंग नेटवर्क: हर 5 किमी के दायरे में बैंक अनिवार्य

वित्तीय समावेशन को सुदूर गांवों तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की लगभग सभी जनकल्याणकारी योजनाएं अब ‘Direct Benefit Transfer’ (डीबीटी) यानी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली पर आधारित हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है। इस व्यवस्था को शत-प्रतिशत प्रभावी बनाने के लिए देश के हर नागरिक के पास बैंकिंग सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने इस बात को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में सराहा कि अधिकांश क्षेत्रों में हर 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग आउटलेट या शाखा उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल किया जा रहा है। उन्होंने सभी सदस्य राज्यों को इस दिशा में बचे हुए गांवों को कवर करने के लिए ठोस और त्वरित प्रयास करने का निर्देश दिया ताकि कोई भी गरीब अपने हक के पैसे से वंचित न रहे।

गंभीर अपराधों पर प्रहार: पोक्सो और बलात्कार मामलों में 100% दोषसिद्धि का लक्ष्य

आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था के सत्र में अमित शाह ने महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि POCSO (पॉक्सो) और बलात्कार के संवेदनशील मामलों में जांच एजेंसियां और पुलिस प्रशासन अत्यधिक संवेदनशीलता और तेजी दिखाएं। उन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अगर ऐसे मामलों में वारदात के तुरंत बाद समय से फॉरेंसिक और DNA जांच संपन्न करा ली जाए, तो न्यायालयों में अपराधियों को सजा मिलने यानी दोषसिद्धि (Conviction Rate) की दर को शत-प्रतिशत (100%) तक ले जाया जा सकता है।

अदालतों में लंबित मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए गृह मंत्री ने राज्यों को सुझाव दिया कि विभिन्न न्यायालयों में लंबित पड़े पांच साल से अधिक पुराने गंभीर और जघन्य मामलों के तेजी से निपटारे और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकारों को संबंधित उच्च न्यायालयों (High Courts) के साथ समन्वय स्थापित कर विशेष अदालतों (Special Courts) का गठन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने के लिए शासन को ऐसी प्रशासनिक गंभीरता दिखानी ही होगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने साइबर अपराधों से निपटने के लिए चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विशेष आग्रह किया कि वे केन्द्रीय गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रारूप के अनुरूप ही अपने राज्यों में ‘1930 हेल्पलाइन’ के तंत्र को कड़ाई से लागू करें और राज्यों की साइबर हेल्पलाइन के कॉल सेंटर्स को आधुनिक तकनीकों से लैस करते हुए तुरंत अपडेट करें।

मिलावटखोरी के खिलाफ अनूठा अभियान: दोषियों को सार्वजनिक रूप से बेनकाब करने का निर्देश

आम जनता के स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए गृह मंत्री ने एक बेहद महत्वपूर्ण और लीक से हटकर निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों और दवाओं में मिलावटखोरी करने वाले समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं। अमित शाह ने निर्देश दिया कि मिलावटखोरी के मामलों में पुलिस या खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जो भी केस रजिस्टर किया जाता है और न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जो भी आर्थिक या कानूनी पेनल्टी लगाई जाती है, उसकी व्यापक स्तर पर सार्वजनिक प्रसिद्धि (पब्लिसिटी) की व्यवस्था की जानी चाहिए।

उन्होंने इसके पीछे का तर्क स्पष्ट करते हुए कहा कि जब स्थानीय समाचार पत्रों, विज्ञापनों या सरकारी पोर्टलों के माध्यम से मिलावटखोरों के नाम सार्वजनिक होंगे, तो आम जनता को यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि किन दोषी दुकानों या ब्रांड्स पर मिलावट वाली और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक चीजें मिलती हैं। इससे समाज में एक मजबूत जागरूकता आएगी और दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक बहिष्कार के डर से मिलावटखोरी पर प्रभावी रोक लगेगी।

मिशन 2029: तीन नवीन न्याय संहिताओं का क्रियान्वयन और त्वरित न्याय का रोडमैप

अपने संबोधन के समापन सत्र में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने देश की नई आपराधिक न्याय प्रणाली का खाका खींचा। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि देश में लागू की गई तीनों नवीन न्याय संहिताओं (भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम) पर इन चारों राज्यों में बहुत अच्छा अमल और जमीनी क्रियान्वयन हुआ है। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि अब भी इस नई व्यवस्था में बहुत सारे तकनीकी, ढांचागत और व्यावहारिक मुद्दे ऐसे हैं, जिनके पूर्ण और सुचारू क्रियान्वयन पर हमें निरंतर बल देना होगा और पुलिस अधिकारियों व न्यायिक कर्मियों को प्रशिक्षित करना होगा।

अमित शाह ने मध्य क्षेत्रीय परिषद के मंच से पूरे देश के सामने एक ऐतिहासिक और साहसिक लक्ष्य रखते हुए घोषणा की कि:

“जिस दृढ़ इच्छाशक्ति और रणनीति के बल पर हमने देश को दशकों पुराने नक्सलवाद के अभिशाप से पूरी तरह मुक्त करने में सफलता पाई है, ठीक उसी तरह हमें देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को भी पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त और आधुनिक बनाना है। हमारा संकल्प है कि देश में दर्ज होने वाले हर आपराधिक मुकदमे को निचली अदालत से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक मात्र 3 साल के भीतर तार्किक अंजाम तक यानी अंतिम फैसले तक पहुंचाया जा सके। इस न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण के इस महान और महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हमें हर हाल में वर्ष 2029 के आम चुनावों से पहले पूरा करना है।”

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं का विस्तार करने, अदालतों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने और नए कानूनों की भावना के अनुरूप काम करने की सलाह दी। बस्तर में आयोजित यह बैठक न केवल नक्सलवाद की समाप्ति की घोषणा की गवाह बनी, बल्कि इसने मध्य भारत के राज्यों के लिए एक समृद्ध, सुरक्षित और तीव्र न्याय प्रणाली से युक्त भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया है।


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