समस्या के समाधान हेतु लेमरू प्रोजेक्ट पर जनता को विश्वास में लेकर शुरू हो काम- भारत सिंह

समस्या के समाधान हेतु लेमरू प्रोजेक्ट पर जनता को विश्वास में लेकर शुरू हो काम- भारत सिंह

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प्रभा सिंह यादव/ब्यूरो चीफ/सरगुजा//   मैनपाट सरगुजा में हाथियों द्वारा मनुष्यों पर किए जा रहे लगातार हमले कीस विस्तृत जांच व समस्या के समाधान हेतु भाजपा प्रदेश संगठन द्वारा गठित मानव गज संघर्ष जांच समिति ने भारतीय जनता पार्टी छतीसगढ़ को अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की। जांच समिति के अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया, सदस्य अंबिकेश केशरी, देवनाथ पैकरा, जमुना यादव, रजनीश पांडेय, अनिल अग्रवाल व अनिल सिंह, ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय, भाजपा प्रदेश प्रभारी  डी पुरंदेश्वरी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, केन्द्रीय राज्य मंत्री  रेणुका सिंह, नेता प्रतिपक्ष छत्तीसगढ़ विधानसभा धरमलाल कौशिक, भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय तथा पूर्व संगठन महामंत्री रामप्रताप सिंह को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपीl

रिपोर्ट में कुछ प्रमुख बातें सामने आयी हैं जिनमें मैंनपाट और धरमजयगढ़  छेत्र में पिछले 4 ,5 महीने में 9 लोगो की जाने हाथियों के आतंक से गयी है। कुल 162 मकानों को हाथियो में ध्वस्त किया है,  सरकार के द्वारा 38 से 40 मकानों का मुआवाज़ा नही दिया गया है, लगभग 50 हेक्टेयर कृषि भूमि हाथियो द्वारा नुकसान पहुचाया गया है,  जिसमे 33 हेक्टेयर का भुगतान बाकी है। आदि आदि.. जांच रिपोर्ट में समिति द्वारा समाधान भी सुझाये गए। जिसमें प्रमुख रुप से- डॉ रमन सिंह के समय जिस प्रकार की कॉलोनियों का निर्माण किया गया जिसमें सुरक्षा व व्यवस्था केंद्रीयकृत की जा सके वह बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए, लेमरू एलीफैंट प्रोजेक्ट पर जल्द जल्द कार्य हो, संचार माध्यमो को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया जाए। इस अवसर पर जांच समिति के अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश इन दिनों हाथियों के ज़ंगलों और गाँव-नगर व आबादी बस्तियों में न केवल स्वच्छंद विचरण और उनके उत्पात से आतंकित है, अपितु हाथियों ने अनेक मनुष्यों व मूक प्राणियों की जान तक ले ली है। हाथियों के आतंक से लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के मोर्चे पर भी प्रदेश सरकार पूरी तरीके से फेल साबित हो रही है।

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अब तो आलम यह हो गया है कि हाती के हमले में मृत ग्रामीण के शोकाकुल परिजनों से मिलने जा रहे कांग्रेस विधायक को अपनी जान बचाने पानी की टंकी पर चढ़ना पड़ा! बावज़ूद इसके प्रदेश सरकार इस अत्यंत गंभीर मसले पर संज़ीदा होने के बजाय मूकदर्शक बनकर लोगों की जान जाते देख रही है। उन्होने बताया कि जशपुरनगर ज़िले के एक ग्राम से बेहद हृदय-विदारक समाचार प्रकाश में आया है। वहाँ हाथियों के आतंक से भयभीत एक ग्रामीण तो प्रधानमंत्री आवास पर झोपड़ी बनाकर रह रहा था। शुक्रवार को जब हाथियों का दल उस बस्ती में पहुँचा तो हाथियों से आतंकित ग्रामीण ने अपने बचाव के लिए प्रधानमंत्री आर्वास के ऊपर बनी अपनी झोपड़ी से छलांग लगा दी और अपने इस प्रयास में उक्त ग्रामीण ने अपनी जान गवाँ दी। हृदय को झकझोर देने वाली यह घटना इस प्रदेश की कांग्रेस सरकार के लिए शर्मनाक है क्योंकि सभ्य मानव समाज की सुरक्षा करने की ज़िम्मेदारी तक यह सरकार निभा नहीं रही है।

इस अवसर पर जांच समिति के सदस्य अंबिकेश केशरी ने बताया कि हाथियों के आतंक को नियंत्रित करने के लिए प्रदेश सरकार जिस लेमुरू प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी, इस प्रदेश सरकार के सियासी दाँव-पेंचों और अंतर्विरोध ने उसे भी ग्रहण लगा दिया है। लेमुरू प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल को लेकर सरकार के अंदर ही बेवजह के विवाद से  प्रदेश सरकार की बदनीयती झलक रही है और अब प्रदेश सरकार और कांग्रेस में ही इस मसले पर अंतर्विरोध गहरा गया है। इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि उच्छृंखल हाथियों पर क़ाबू पाने का काम नहीं हो रहा है और लोगों की जान साँसत में है। प्रदेश सरकार को तत्काल लेमुरू प्रोजेक्ट पर उसके मूल स्वरूप को क़ायम रखते हुए काम कराना चाहिए।जब सरकार हाथियों को रोकने में असफल है तो तेज़ी से इस प्रोजेक्ट पर काम क्यों नही करती जबकि केंद्र सरकार से भी समय समय पर बड़ी राशि इन कार्यो के लिए आ रही हैl

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