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नक्सल पीड़ित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों की समस्याओं का हो रहा निदान

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नक्सल पीड़ित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों की समस्याओं का हो रहा निदान
नक्सल पीड़ित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों की समस्याओं का हो रहा निदान

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दंतेवाड़ा जिले में 636 आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन द्वारा दी जा रही है सहूलियतें120 को मिली शासकीय नौकरी, 532 लोगों का बनाया गया राशन कार्डशासन द्वारा 51 नक्सल पीड़ितों को एक करोड़ 91 लाख रुपए की सहायताआत्मसमर्पित नक्सलियों एवं पीड़ित परिवारों के लिए शहीद महेंद्र कर्मा कॉलोनी के नाम से बनाया जा रहा आवासीय परिसर

रायपुर, 20 अक्टूबर 2021दंतेवाडा जिले में शासन प्रशासन की संयुक्त पहल के चलते आत्मसमर्पण कर रहे नक्सली भी शासन की योजनाओं से लाभांवित हो रहे है। शासन प्रशासन द्वारा यह लगातार कोशिश की जा रही है कि जिले के सभी क्षेत्रों में विकास के काम तेजी से हों और लोगों को शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ मिले और वह विकास की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर जिंदगी गुजार सके।

दंतेवाड़ा जिले में अब तक 636 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिन्हें शासन द्वारा 10-10 हज़ार रूपए की प्रोत्साहन राशि देने के साथ ही उन्हें अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों में से अब तक 120 लोगों को शासकीय नौकरी दी जा चुकी है। आत्मसमर्पित नक्सलियों में से 532 लोगों का राशन कार्ड, 407 लोगों का आधार कार्ड, 440 लोगों का मतदाता पत्र कार्ड बनाया जा चुका है। आत्मसमर्पित नक्सलियों में से 392 का बैंक खाता भी खोला जा चुका है। 459 को स्वास्थ्य बीमा कार्ड प्रदाय किया गया है, जिससे उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सके। 108 को आवास की सुविधा प्रदान की गई है। 190 लोगों को शासकीय सेवा हेतु प्रशिक्षण दिया गया है।

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आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनकी मंशानुसार रोजगार व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण दिए जाने के साथ ही उन्हें कृषि, पशुपालन आदि गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। कृषि कार्य हेतु उन्हें ट्रेक्टर, खाद-बीज, सिंचाई पम्प तथा गाय, बकरी एवं मुर्गी पालन आदि का वितरण एवं शेड निर्माण की सुविधा भी प्रदाय की जा रही है। आत्मसमर्पित नक्सलियों को टेकनार गौशाला में पशुपालन व कुक्कुट पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे गांव में ही खेती किसानी के साथ कृषि संबंधी रोजगार अपनाकर बेहतर जीवन-यापन के योग्य बन सके।

महाराकरका गांव सरेंडर नक्सलियों द्वारा पशुपालन करने वाला पहला मॉडल गांव बन रहा है। इस गांव में सरेंडर नक्सली सरकारी मदद से मछली, बकरी, बतख, गाय, कड़कनाथ मुर्गा पालन आदि की आयमूलक गतिविधियों से जुड़ चुके हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को मनरेगा के तहत भी रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। आत्मसमर्पित नक्सली बड़े गुड्रा के श्री प्रकाश करटाम और उनके साथियों को कृषि के लिए एक ट्रेक्टर प्रदान किया। विगत 2 वर्षों में नक्सल प्रभावित 51 व्यक्तियों को शासन द्वारा  एक करोड़ 91 लाख 60  हजार रूप्ए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गयी है। 24 नक्सल पीड़ितों में से 11 को शासकीय नौकरी, 24 को राशन कार्ड प्रदान किया गया है। 78 बच्चों को छात्रवृत्ति राशि दी गयी है।

दंतेवाड़ा जिले में आत्मसमर्पित नक्सलियों व नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए 3 करोड़ 38 लाख 38 हजार रूपए की लागत से शहीद महेंद्र कर्मा कॉलोनी के नाम से आवासीय परिसर का निर्माण किया जा रहा है। सरेंडर कर चुके नक्सली अब नक्सल पीड़ित परिवारों के साथ मिलकर डेनेक्स टेक्सटाइल प्रिंटिंग फैक्ट्री भी चलायेगें, जो छत्तीसगढ़ की ऐसे पहली फैक्ट्री होगी, जिसका जिम्मा नक्सल पीड़ित परिवारों और सरेंडर नक्सलियों के हाथों में होगा। महिलाओं को स्व-सहायता समूहों में जोड़ा जा रहा है, जिससे वे सशक्त हो सके। समर्पण से पहले नक्सलियों ने अपने हाथों से मासापारा के स्कूल को ढहा दिया था। आत्म समर्पण के बाद अब अपने हाथों से मासापारा के स्कूल को फिर से नए सिरे से बनाने में अहम रोल अदा किया है। शासन-प्रशासन की संयुक्त पहल से दन्तेवाड़ा जिले में शांति, सुरक्षा और विश्वास का एक नया वातावरण निर्मित हुआ है, जिससे यह उम्मीद जगी है कि दंतेवाड़ा जिला विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर हो, खुशहाली की एक नयी इबारत लिखेगा।

Ashish Sinha

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