नोवल कोरोना के तीसरी लहर में भी असंगठित संगठित प्रवासी मजदूरों का व्यवस्था नहीं कर रही है सरकार स्वामीनाथ जायसवाल

नोवल कोरोना के तीसरी लहर में भी असंगठित संगठित प्रवासी मजदूरों का व्यवस्था नहीं कर रही है सरकार स्वामीनाथ जायसवाल

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नई दिल्ली भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी नाथ जायसवाल ने बताया कि अचानक यह तीसरी लहर का जो प्रवासी असंगठित मजदूरों पर गाज गिर रहा है जिससे मजदूर मजबूर होकर घर के तरफ लौटते हैं इस आस में जो उन्हें इस करो ना काल का विनाशकारी घातक वायरस बार-बार दबिश देने से जीवन को कैसे जीवन चलाएं रोज कमाने खाने वाले हमारे श्रमिक मजदूर कैसे उनकी रोजी-रोटी चले इस पर गहन चर्चा ना उस पर कोई ठोस व्यवस्था भारतीय जनता पार्टी सरकार मोदी सरकार कर रही है ना मजदूरों श्रमिकों और रोज कमाने खाने वाले हमारे गरीबों का चिंता है बस चिंता उन्हें है चुनाव जीतने चुनाव कराने लेकिन हमारे मजदूर मजबूर होकर जाएं तो जाएं किधर यह बड़ा प्रश्न खड़ा होता है आज हमारी दुनिया में सब कुछ बहुत तेजी से हो रहा है। नोवल कोरोना वायरस बीमारी (कोविड-19) के कारण हुए इस आर्थिक विनाश के फलस्वरूप अब कई ऐसी समस्याएं खुल कर सामने आ रही हैं जो अब तक हमारी नजरों से ओझल थीं। जैसे कि प्रवासी मजदूरों की दिल दहला देने वाले हालत। वे पहले रोजगार की खोज में अपने गांवों को छोड़ कर शहर जाने को मजबूर हुए और फिर अब नौकरी छूटने के कारण घर वापस जा रहे हैं। उनमें से कई की तो भूख प्यास से रास्ते में मौत भी हो चुकी है।
तब से प्रवासी मजदूरों का यह संकट हमारे जीवन का एक हिस्सा बन चुका है। मजदूर हमारे घरों में चर्चा का विषय बन चुके हैं और ऐसा मध्यम वर्गीय चेतना में पहली बार हुआ है।देश में 1 अप्रैल 2021 से 4 नए लेबर कोड (Laour Codes) लागू हो गए हैं। सरकार ने श्रम कानूनों (Labour Laws) में तथाकथित सुधार के लिए कुल 44 तरह के पुराने श्रम कानूनों को चार वृहद् संहिताओं (New Labour Codes) में समाहित किया है। इस कानून को लागू होते ही आपके टेक होम सैलरी और पीएफ स्ट्रक्चर (PF Rule) में बदलाव हो जाएगा।आप इस उम्मीद में हैं कि अगले साल आपकी सैलरी जरूर बढ़ेगी। लेकिन सैलरी में बढ़ोतरी के साथ ही केंद्र सरकार एक फैसले से आपकी टेक होम सैलरी (Take Home Salary) पर कैंची चलने वाली है। ऐसे में उन लोगों की सैलरी अभी के मुकाबले और घट जाएगी, जिनकी सैलरी में अगले साल बढ़ोतरी नहीं हो पाएगी. जिससे आपकी टेक होम सैलरी घट जाएगी, जबकि भविष्य निधि यानी पीएफ (PF) में बढ़ोतरी हो जाएगी।
मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यवसाय सुरक्षा तथा स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति पर चार श्रम संहिताओं पर कम से कम 13 राज्यों ने इन कानूनों के मसौदा नियमों को तैयार कर लिया है। गौरतलब है कि नए श्रम कानून लागू होने के बाद कर्मचारियों के हाथ में आने वाला वेतन (Salary Decrease) घट जाएगा। वहीं, कंपनियों को ऊंचे पीएफ दायित्व का बोझ उठाना पड़ेगा। नए ड्राफ्ट रूल्‍स के मुताबिक, बेसिक सैलरी (Basic Salary) कुल वेतन की 50 फीसदी या ज्‍यादा होनी चाहिए इससे ज्यादातर कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव आएगा। बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी (PF & Gratuity) के लिए कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा। इसमें जाने वाला पैसा बेसिक सैलरी के अनुपात में तय किया जाता है। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों की टेक होम सैलरी (Take home Salary) घट जाएगी. हालांकि, रिटायरमेंट पर मिलने वाला पीएफ और ग्रेच्युटी का पैसा बढ़ जाएगा।
मोदी सरकार ने देशी विदेशी कारपोरेट घरानों के हितों में लम्बे संघर्षों से हासिल 29 लेबर कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड बनाने का काम किया है। जिन कानूनों को खत्म किया है उनमें से कई बाबा साहब अम्बेडकर ने मजदूरों के हितों में बनाए थे। इन लेबर कोडों के बनने से हमारे मजदूरों की जिदंगी में क्या होंगे बदलाव आइए देखे-

1. अपने खून से अपने झण्डे को लाल करके हासिल काम के घंटे 8 को खत्म कर सरकार ने 12 कर दिए हैं। कई कामों जैसे अनवरत चलने वाले कामों में तो 12 घंटे से भी ज्यादा काम लिया जा सकता है। इससे 33 प्रतिशत मजदूरों की छंटनी तय होगी।

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2. हर मजदूर व कर्मचारी की टेक होम सैलरी यानी घर ले जाने वाला वेतन कम होगा।

3. लेबर कोड में फिक्स टर्म इम्पलाइमेंट लाया गया है मतलब अब कुछ समय के लिए मालिक आपको रखेंगे और जब चाहे बिना छंटनी लाभ दिए काम से निकाल देंगे।

4. 50 से कम मजदूर रखने वाले ठेकेदार को अब लेबर ऑफिस में पंजीकरण कराने से छूट दे दी गई यानि उसे लेबर कानूनों को लागू करने से पूरी मुक्ति मिल गई।

5. 50 से कम मजदूर वाले उद्योग बिना एक माह का नोटिस पे दिए आपको काम से निकाल बाहर करेंगे।

6. 300 से कम मजदूरों वाली कम्पनी को छंटनी करने से पहले सरकार की अनुमति नहीं लेनी होगी।

7. घरों में काम करने वाले मजदूर औद्योगिक विवाद में दावा नहीं कर सकेंगे उन्हें इससे बाहर कर दिया।

8. ग्रेच्युटी जरूर एक साल में देने की बात है, लेकिन अब कोई ठेकेदार आपको एक साल से ज्यादा काम पर नहीं रखेगा। जैसे अनपरा में होता है ठेकेदार बदलते हैं, मजदूर नहीं और पूरी जिदंगी काम करने के बाद भी ग्रेच्युटी नहीं मिलती है।

9. लेबर कोड में ठेकेदार को भी मालिक बनाया गया है परिणामस्वरूप आपकी जीवन, सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा से मुख्य मालिक को बरी कर दिया गया है।

10. ईपीएफ का अंशदान 12.5 प्रतिशत से कम कर 10 प्रतिशत किया गया है जो आपकी बचत में कटौती है। इस बचत को भी सरकार शेयर बाजार में लगा सकती है। इतना ही नहीं महामारी में भी ईपीएफ व ईएसआई बंद करने का सरकार को अधिकार मिल गया है।

11. इंटरनेट पर काम करने वाले गिग व प्लेटफार्म मजदूरों को कोई सुविधा नहीं दी गई है। इसी प्रकार आंगनबाड़ी, आशा, मिड डे मील रसोईया, पंचायत मित्र, शिक्षा मित्र जैसे स्कीम वर्कर्स को मजदूर नहीं माना उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी बाहर कर दिया।

12. वेतन की परिभाषा से बोनस हटा दिया गया है यानी अब बोनस न देने पर आप मुकदमा भी नहीं कर पायेंगे और कम्पनी के लाभ के लिए बैलेंस शीट देखने का अधिकार छीन लिया है।

13. ठेका मजदूरों के परमानेंट होने की जो थोड़ी बहुत सम्भावना पुराने कानून में थी उसे भी खत्म कर दिया गया है।

14. ट्रेड यूनियन के गठन को बेहद कठिन बना दिया है। श्रमिकों की मदद करने वाले वकील या सामाजिक कार्यकर्ता अब ट्रेड यूनियनों के सदस्य नहीं रहेंगे।

15. हड़ताल करना असम्भव कर दिया अब हड़ताल करने के लिए दो माह पूर्व नोटिस देनी होगी। यहीं नहीं हड़ताल के लिए कहना या अपील करना गुनाह हो गया। इस पर जेल और जुर्माना दोनों होगा।

16. लॉकडाउन से बर्बादी की हालत में पहुंच गए प्रवासी मजदूरों पर गहरा हमला किया गया है। अब 180 दिन काम करने पर ही उन्हें मालिक द्वारा आने-जाने का किराया मिलेगा।

यहीं नहीं अबकी बार के बजट में तो मोदी सरकार ने बिजली, रेल, तेल, हवाई जहाज, स्टेडियम, बंदरगाह, स्टील सब कुछ बेच देने का फैसला किया है। देश की सार्वजनिक सम्पत्ति व प्राकृतिक सम्पदा को बेचने और गुलामी की कोशिशों को आइए परास्त करें। जहां हैं वहीं से धरना, प्रदर्शन, ट्वीटर, वाट्सअप, फेसबुक से इन लेबर कोड का विरोध करें।
इन सब को देखकर ऐसा लगता है कि मोदी सरकार भारत के मजदूरों को गुलाम बनाने की ओर अग्रसर है। ऐसे में जब भारत का मजदूर गुलाम बना तो जाहिर सी बात है कि भारत भी गुलाम बन जायेगा। बस फर्क इतना ही होगा कि पहले हम अंग्रेजों के गुलाम बने थे और अब उनकी धरोहर को जिंदा रखने वाले अपने ही कुछ भारतीय के। जो कि आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी के बहुत ही करीबी मित्र हैं। करो ना कॉल एक गरीबों के लिए घातक साबित हो रहा है बार-बार श्रमिक मजदूर किसान रोज कमाने खाने वाले इस घटना के सबसे ज्यादा पीड़ित हैं भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी ने जायसवाल ने इस पर प्रकाश डालते हुए गरीबों और श्रमिकों की कुछ विशेष चर्चा पर प्रकाश डालते हुए मोदी सरकार कोई उचित व्यवस्था नहीं कर रही है आखिर उसे मजदूर गरीब किसान की चिंता क्यों नहीं हो रही है स्वामी नाथ जायसवाल