छत्तीसगढ़राज्यरायपुर

दूध निकाल पशुओं को सड़कों पर छोड़ रहे है पशुपालक निरंतर हो रही है दुर्घटनाएं प्रशासन मौन

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गोपाल सिंह विद्रोही बिश्रामपुर -दूध निकाल कर सड़कों पर मरने के लिए पशुओं को छोड़ देते हैं पशुपालक।

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इस संबंध में जानकारी के अनुसार एसईसीएल विश्रामपुर की विभिन्न कालोनियों में कर्मचारियों द्वारा अघोषित डेयरी फार्म खोल दिया गया है ।पशु पालक अपने क्वार्टरों के सामने व बगल में जहां कहीं भी स्थान मिल रहा है डेयरी फार्म खोल कर दूध का धंधा कर अतिरिक्त लाभ कमाने का कार्य किया जा रहा है।दूध निकालकर पशुओं को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है। दिन रात पशु चारा पानी की तलाश में तड़पती गाएं इर्द-गिर्द सड़क पर विचरण करते रहती हैं ।कुछ पशुपालन तो दूध नहीं देने वाली पशुओं को हमेशा के लिए सड़कों पर छोड़ देते हैं, जो सड़क पर अपना स्थाई डेरा बना रखी हैं ।
दूध निकालकर सड़कों पर छोड़ देते हैं पशुपालक- बिश्रामपुर की कालोनियों में पशुपालन जोर शोर से किया जा रहा है।कुछ कॉलरी कर्मचारी अपने क्वार्टरो के सामने क्वार्टर से सटे अतिरिक्त जगहों पर डेयरी फार्म संचालित करते हैं यही नहीं पशुओं का गोबर कॉलोनी के सड़कों पर फेक देते हैं जिससे कॉलोनी वासियों को आवाजाही में भारी दिक्कत होती है।
गोबर से निकलने वाली दुर्गन्ध लोगों के लिए परेशानियों का कारण बना पशुपालकों के खिलाफ शिकायत के बाद भी नगर पंचायत खुद को असहाय महसूस करती है। नगर पंचायत से मोहल्ले वासियों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बाद भी नगर पंचायत कुछ करने में असमर्थ पा रही है जिससे पशुपालकों का हौसला बुलंद है ।सड़क पर और सड़क के किनारे गोबर फेंक कर स्वच्छता मिशन को ठेंगा दिखा रहे है पशुपालक।
पशुओं से हर दिन होती है सड़क दुर्घटना
पशु पालकों द्वारा अपनी मवेशियों को दूध निकालकर सड़कों पर छोड़ने से पशुओं का रात दिन सड़के बसेरा बनी हुई है ।सड़कों पर पशुओं के स्थाई बसेरा से लोगों का काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पशु भी चोटिल होकर मर रहे हैं परंतु इसकी फिक्र पशुपालकों कि नहीं है । बिश्रामपुर-भटगांव का मुख्य मार्ग हो या या कॉलोनी की सड़क हर जगह पशु अपना डेरा जमाए हुए हैं। जिससे दुर्घटनायें निरंतर हो रही है।
काजी हाउस बना शोपीस- नगर पंचायत का काजी हाउस हो या ग्राम पंचायत शिवनंदनपुर का इन दोनों काजी हाउस में एक भी आवारा पशु नहीं है। पहले नगर पंचायत द्वारा सड़क में विचरण करने वाले पशुओं को पकड़ कर काजी हाउस में रखा जाता था परंतु 2 वर्षों से काजी हाउस पशुओं से मुक्त है। नगर पंचायत द्वारा पशुओं को धरपकड़ बंद कर दिए जाने से सड़क ही अघोषित काजी हाउस बना हुआ है । जिससे सड़क दुर्घटना में निरंतर वृद्धि हो रही है। संबंधित प्रशासन को चाहिए कि पशुपालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि सड़कों पर मरने वाले पशुओं को बचाया जा सके।

Ashish Sinha

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