छत्तीसगढ़ के ग़ायब 54 डॉक्टर को ढूंढ रही है राज्य सरकार, कोरोना संकट में पांच दिनों में जॉइन नहीं किया तो होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के ग़ायब 54 डॉक्टर को ढूंढ रही है राज्य सरकार, कोरोना संकट में पांच दिनों में जॉइन नहीं किया तो होगी कार्रवाई

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नियुक्ति होती है। इसके लिये सरकार ने सामान्य क्षेत्रों के लिये 45 हजार और माओवाद प्रभावित और कठिन क्षेत्रों के लिए 55 हजार रुपये का मानदेय तय किया है।

PHC-CHC में 296 डॉक्टरों की नियुक्ति

इस बीच सरकार ने MBBS पाठ्यक्रम पूरा कर चुके 296 डॉक्टरों को 2 वर्ष की संविदा पर नियुक्त किया है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने इन डॉक्टरों की सूची 13 अप्रैल को भेजी थी। प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरतों का आकलन करने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार शाम को इनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया।

रायपुर- कोरोना काल में जब एक-एक डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी महत्वपूर्ण हैं, तब छत्तीसगढ़ से 54 डॉक्टर गायब हैं। इन डॉक्टरों ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से MBBS की पढ़ाई की है। बांड के मुताबिक उन्हें दो वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में काम करना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब सरकार ने एक सूचना जारी कर इन डॉक्टरों को ड्यूटी जॉइन करने के लिये पांच दिनों की मोहलत दी है।

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स्वास्थ्य विभाग ने 28 मई 2020 और 5 फरवरी 2021 को दो अलग-अलग आदेश जारी कर MBBS पाठ्यक्रम उत्तीर्ण डॉक्टरों को शासकीय-ग्रामीण सेवा के अनुबंध के तहत दो वर्ष की संविदा सेवा पर नियुक्त किया था। सरकार ने 28 मई 2020 के आदेश से नियुक्त 31 डॉक्टरों और 5 फरवरी 2021 के आदेश से नियुक्त 23 डॉक्टरों ने आज तक ड्यूटी जॉइन ही नहीं की हे। अब कोरोना काल में एक-एक डॉक्टर की तलाश होने लगी तो इनकी गैर हाजिरी का पता चला है। सरकार ने इन डॉक्टरों के लिये एक सूचना जारी कर पांच दिनों के भीतर नियुक्ति वाले अस्पताल में जॉइन करने का आदेश दिया है। अगर इन डॉक्टरों ने ऐसा नहीं किया तो कार्रवाई होगी।

जॉइन नहीं किया पंजीयन रद्द होगा, वसूली भी होगी

छत्तीसगढ़ चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा स्नातक प्रवेश नियम के तहत बांड का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई हो सकती है। सरकार बांड की राशि वसूल करेगी। उनकी अंतिम डिग्री जारी नहीं होगी। वहीं मेडिकल कौंसिल में उनका पंजीयन भी रद्द किया जाएगा। पढ़ाई के दौरान मिली पूरी छात्रवृत्ति भी भू-राजस्व की तरह वसूली जाएगी।

क्या होता है यह बांड

MBBS और मेडिकल के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश के समय प्रत्येक विद्यार्थी को सरकार के साथ एक बांड भरना होता है। उसके मुताबिक पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थी को दो वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में काम करना होगा।

रिपोर्टर मिल्खा सिंह ज्ञानी की खास रिपोर्ट

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