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बीपीएल-एपीएल के बजाय हर गंभीर मरीज को रेमडेसिविर डोज, रोजाना 80 को लगेंगे

फीसदी भी नहीं है। चिकित्सकों का दावा है कि जब तक प्रदेश में इक_ा 20-30 हजार इंजेक्शन सप्लाई नहीं होते, तब तक मांग और सप्लाई का सिस्टम बैलेंस नहीं होगा।

अब मारपीट की आशंका से बचने स्टोर में ताला : रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिलने पर कई लोग अंबेडकर अस्पताल के रेडक्रास मेडिकल स्टोर में हंगामा कर चुके हैं। मारपीट की नौबत आने लगी, इसलिए मेडिकल स्टोर के कर्मचारी स्टोर इंजेक्शन आने के बाद ही खोल रहे हैं। इससे दूसरे मरीज जिन्हें अन्य दवाइयों की जरूरत है, वह परेशान हो रहे हैं। उन्हें बाहर जाने की जरूरत पड़ रही है।

अंबेडकर में जरूरतमंद सभी मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। इसके लिए एपीएल या बीपीएल का कोई क्राइटेरिया नहीं है। हर मरीज को इसकी जरूरत नहीं है, लोगों को यह बात समझनी चाहिए।

बीपीएल-एपीएल के बजाय हर गंभीर मरीज को रेमडेसिविर डोज, रोजाना 80 को लगेंगे

अंबेडकर अस्पताल में अब हर गंभीर मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जाएगा, चाहे वह बीपीएल हो या एपीएल केटेगरी का। इसके लिए मरीज या उनके अटेंडेंट द्वारा दबाव डालने की भी जरूरत नहीं है। पिछले तीन दिन से रोजाना 80 मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जा रहा है। अफसरों ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में 1200 इंजेक्शन यहां आए हैं, इस वजह से सप्लाई में थोड़ा सुधार हुआ है। राजधानी समेत प्रदेश में रेमडेसिविर के लिए मारामारी मची हुई है। अंबेडकर अस्पताल में 450 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। इनमें रोजाना 80 मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने का दबाव डालते हैं, लेकिन इंजेक्शन नहीं लगाया जाता। जिन मरीजों को जरूरत है, उन्हीं को रेमडेसिविर लगाया जा रहा है। हालांकि दूसरे अस्पतालों में मरीजों के दबाव में इंजेक्शन लगाने की बात कही जा रही है। यही कारण है कि बाजार में रेमडेसिविर के लिए मारामारी है। दूसरी ओर रेडक्रास मेडिकल स्टोर में 240 इंजेक्शन पहुंचे थे, जो कुछ घंटे में बिक गए। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें ज्यादातर लोग अंबेडकर अस्पताल की पर्ची रखे रहते हैं। कई लोग निजी अस्पताल से आए लोग होते हैं, जो अपने परिजन व परिचितों के लिए इंजेक्शन के लिए चक्कर लगाते रहते हैं।रेमडेसिविर की सप्लाई पिछले एक हफ्ते से बढ़ी है, लेकिन इसकी जरूरत भी बढ़ गई है। अब तक रायपुर और दुर्ग अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए यह इंजेक्शन तलाशा जा रहा था। यहां अब भी मांग बनी हुई है, लेकिन पिछले दो-तीन दिन से अन्य जिलों में केस बढऩे की वजह से वहां से भी लोग रेमडेसिविर की तलाश में राजधानी की दौड़ लगा रहे हैं। इस वजह से मांग में कोई कमी नहीं आई है और सप्लाई अब भी जरूरत की 25 फीस

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फीसदी भी नहीं है। चिकित्सकों का दावा है कि जब तक प्रदेश में इक_ा 20-30 हजार इंजेक्शन सप्लाई नहीं होते, तब तक मांग और सप्लाई का सिस्टम बैलेंस नहीं होगा।

अब मारपीट की आशंका से बचने स्टोर में ताला : रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिलने पर कई लोग अंबेडकर अस्पताल के रेडक्रास मेडिकल स्टोर में हंगामा कर चुके हैं। मारपीट की नौबत आने लगी, इसलिए मेडिकल स्टोर के कर्मचारी स्टोर इंजेक्शन आने के बाद ही खोल रहे हैं। इससे दूसरे मरीज जिन्हें अन्य दवाइयों की जरूरत है, वह परेशान हो रहे हैं। उन्हें बाहर जाने की जरूरत पड़ रही है।

अंबेडकर में जरूरतमंद सभी मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। इसके लिए एपीएल या बीपीएल का कोई क्राइटेरिया नहीं है। हर मरीज को इसकी जरूरत नहीं है, लोगों को यह बात समझनी चाहिए।

-डॉ. ओमप्रकाश सुंदरानी

क्रिटिकल केयर इंचार्ज, अंबेडकर अस्पताल

रिपोर्टर मीका सिंह जाने की खास रिपोर्ट

 

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