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महामारी के दौर में इन सिलेब्स ने दिखाया जज़्बा, किसी ने लोगों को अपनों तक पहुँचाया तो किसी ने लोगों के पेट तक निवाला

वक़्त भले अच्छा हो या बुरा पर दोनों की एक खूबी होती है कि वह गुज़र जाता है, हम बुरे वक़्त को भुला तो देतें हैं पर उस वक़्त साथ देने वाले लोग हमें याद रह जातें हैं। जिस वक़्त में हम आज जी रहें हैं ये वक़्त भी खराब है लेकिन कुछ लोग हैं जो खून के रिश्तों के साथ साथ इंसान से इंसान के रिश्ते को भी बेहद खूबसुरति से निभा रहें हैं, या कोशिश कर रहें कि जितना इस दुनियाँ से उन्होंने पाया है उसका कुछ हिस्सा लोटा सकें।
आज हम आपको उन्हीं मे से 5 लोगों के बारे में बताने जा रहें हैं।

5. हम बात एक 13 साल की बच्ची की जो सच साबित करती है एक कहावत को जो है ” Age is just a number ”


मशहूर फ़िल्म निर्देशक और निर्माता फ़राह खान की बेटी आन्या जिसने स्कूल के बाद खाली समय में ड्रॉइंग कर के 1 लाख रुपए जमा किये, जिसकी जानकारी फराह ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पीएसट परते हुए दी, उन्होंने लिखा ” आन्या ने 1 लाख रुपए इकट्ठा किये, वह स्कूल से पहले बाद में और पुरे वीकेंड मन लगा कर स्केच करती रहती है डोनेशन के लिए। बहुत शुक्रिया उन लोगों का जिन्होंने डोनेट किया, यह सब सारा पैसा ज़रूरतमंदों को खाना खिलाने में खर्च किया जाएगा ”

4. एक शख़्स जो कहतें हैं की ” पैसा खो कर फिर कमाया जा सकता है पर इंसान नहीं ”


आयुष गुप्ता जो लोगों को एक प्राचीन पद्धिति “रेकी” की मदद से कोरोना से लड़ने की ताकत दे रहें हैं। आयुष ने पिछले दिनों एक गूगल फॉर्म बनाया जिसमे लोग कोरोना से जुडी अपनी परेशनियों के बारे में बता सकते हैं और फिर आयुष रेकी की मदद से उन लोगों की कोरोना से लड़ने और उस से उबरने में मदद करतें हैं। आयुष भारत के सब से युवा रेकी हीलर हैं, और वे इस समय लोगों की मदद करने की एवज़ में फीस के नाम पर महज़ एक रुपया ले रहें हैं। आयुष का बनाया गूगल फॉर्म पब्लिश होने के कुछ ही घंटों में धड़ाधड़ शियर होने लगा, अभी तक आयुष कोरोना से पीड़ित करीब 1000 लोगों की मदद कर चुकें हैं।

3. बेहद ही हसोड़ स्वभाव वाले कॉमेडियन जो कहतें हैं ” I was a comedian before someone ate a bat “

चैस स्ट्रीमर और कॉमेडियन समय रैना ने आपने एक दोस्त और मशहूर कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी के साथ यूट्यूब पर एक लाइव स्ट्रीम की जिस मे वो दोनों एक गेम खेल रहे थे, आम तौर पर लाइव स्ट्रीम करने वाले यूटुबॉस को लोग कुछ पैसा देतें हैं उनसे बात करने के लिए या आपने मैसेज पहुंचने के लिए जिसे
यूट्यूब की भाषा में सुपर चाट कहा जाता है, लेकिन 24 अप्रैल की लाइव स्ट्रीम में समय ने आपने दर्शकों से कहा आज आप मुझे पैसा देने की जगह एक गूगलर पे नंबर पर पैसा ट्रांसफ़र करें और जो भी पैसा इस लाइव स्ट्रीम के अंत तक जमा होगा वह सभी उन लोगों की मदद करने में खर्च किया जाएगा जो कोरोना महामारी से जूझ रहें हैं। और स्ट्रीम खत्म होने पर समय ने इकट्ठा किये करीब डेढ़ लाख रुपए।

2. जब देश कोरोना की मार और उसके कारण लगे लॉकडाउन से जूझ रह था कुछ दोस्त मिल कर आपने सीमित संसाधनों के साथ ज़रूरतमंद लोगों तक खाना पहुंचने में लगे थे

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मुंबई के चीनू क्वात्रा, जब देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाया गया तो चीनू ने आपने दोस्तों के साथ मिल कर ज़रूरतमंदों जैसे सोसिटीज़ के माली, दिहाड़ी मज़दूर या प्रवासी मज़दूरों तक खाना पहुंचाने का सोचा, क्योंकि ज़िंदगी की चक्खी तभी तक चलती है तब तक उस में अन्न पड़ता रहे। चीनू ने कुछ आपने घर से कुछ दोस्तों के और कुछ जान्ने वालों से पैसा इकट्ठा किया और करीब 10000 लोगों तक लॉकडाउन में रोज़ खाना पहुंचाया, और खाना भी केवल खाना पूर्ति के लिए नहीं बाकाएगा यह सोचा गया की क्या लोगों के लिए फायदेमंद है वह खाना पहुंचाया गया, दाल चावल जिस मे प्रोटीन और कार्ब्स की मात्रा ज़्यादा होती है हमारे शरीर को लम्बे समय तक काकत देने के लिए ज़रूरी होतें हैं वह लोगों तक पहुंचाया गया और इस मिशन को नाम मिला रोटी घर।

1. इस आखरी शख्सियत को कौन नहीं जानता, कोरोना की पहली लहर में इस व्यक्ति ने वह किया जो भारत की विराट सरकार आपने सभी लाव लश्कर के बावजूद भी नहीं कर पाई।


अभिनेता सोनू सूद, जहाँ सोनू कोरोना की पहली लहर में कई लोगो के लिए ईश्वर बन कर सामने आए और करीब 25000 प्रवासी मज़दूरों को आपने आपने घर पहुंचाया। आपको लग सकता है कि किसी इंसान को ईश्वर की उपमा देना सही नहीं है लेकिन मेरे घर के बुज़ुर्ग कहा करते थे कि ज़रूरी नहीं की ईश्वर तुम्हारी मदद करने आपने यथा रूप में आएं वे किसी भी रूप में आ सकतें हैं और एक व्यक्ति जिसे अपना घर सैंकड़ों किलोमीटर दूर दिख रहा हो और वहां तक जाने के अलावा कोई और चारा भी न हो तो उसके लियेतो सोनू ईश्वर का ही रूप हुए।
यह बात तो करीब करीब पुरानी हो चली है, बीते शुक्रवार सोनू ने फिर एक बार कुछ ऐसा कर दिया जिस काम को करने के लिए हम एक लोकतंत्र में सरकारें चुनते हैं। 25 साल की कोरोना से जूझ रही मरीज़ भारती जिसके लंग्स कोरोना के चलते 85 से 90 प्रतिशत खराब हो चुके थे, भारती को तुरंत लंग्स ट्रांसप्लांट की ज़रूरत थी, लेकिन डॉक्टरों ने सोनू को बताया की भारती के बचने की चांस महज़ 20% हैं जिस पर सोनू का जवाब था तो क्या हुआ वो महज़ 25 साल की है वो इस से लड़ेगी और पहले से मज़बूत बन कर सामने आएगी। सोनू में भारती के लिए एक एयर एम्बुलेंस का इंतज़ाम किया और भारती को नागपुर से हैदराबाद अपोलो हॉस्पिटल लेजाया गया फिलहाल भारती की हालत अभी भी नाज़ुक है पर डॉक्टरों को यकीन है की वह कोरोना को हरा सकती है।

इस वक़्त को तो कुछ सालों बात हम भुला देंगे पर नहीं भूले जाएंगे ये नाम जो इंसान होने का मतलब उस वक़्त भी नहीं भूले जब उनके लिए स्वार्थी बन कर बैठे रहना आसान था और कोई उनसे जवाब नहीं मांगता, पर इनका ज़मीर ज़िंदा था इन्होने अपनी जवाबदेही खुद के ज़मीर से तय की।

रिपोर्टर हर्ष वर्मा की खास रिपोर्ट

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