औद्योगिक प्रगति का आधार रहा है ‘मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर‘ क्षेत्र

विशेष-आलेख : औद्योगिक प्रगति का आधार रहा है ‘मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर‘ क्षेत्र

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अब छत्तीसगढ़ के 32 वें जिले के रूप में आकार लेगा यह क्षेत्र

– आलेखः जी.एस. केशरवानी-आनंद सोलंकी

देश के प्रमुख कोल खनिज सम्पदा से परिपूर्ण मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर क्षेत्र अब कोरिया जिले से अलग होकर छत्तीसगढ़ के 32वें जिले के रूप में आकार ले रहा है। यह जिला वन संपदा और खनिजों के भण्डार से समृद्ध है। छत्तीसगढ़ में 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में खदानों से कोयला खनन के प्रारंभ होने और रेलवे लाईन के विकास का भी साक्षी रहा है यह क्षेत्र। मनेन्द्रगढ़ शहर जो इस नए जिले का मुख्यालय बनने जा रहा है वह वर्ष 1930 में नियोजित शहर के रूप में बसाया गया था। उस जमाने में यह शहर छत्तीसगढ़ का पहला नियोजित शहर था। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ और देश की औद्योगिक प्रगति का शुरू से ही आधार रहा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 9 सितंबर को भव्य समारोह में इस जिले का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही इस क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हो जाएगी।
नए जिले के गठन से मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में विकास की नयी धारा बहेगी, विकास की गति और अधिक तेज होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्यान्न, इंटरनेट तथा रोड कनेक्टिविटी के लिए और बेहतर कार्य किए जाएंगे। मनेन्द्रगढ़ के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ग्राउण्ड में आयोजित इस नए जिले के शुभारंभ समारोह में मुख्यमंत्री जिलेवासियों को लगभग 200 करोड़ 73 लाख रूपए की लागत के विकास कार्यों की सौगात देंगे।

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20वीं सदी के दूसरे दशक में चिरमिरी और झगराखांड में कोयले के दो क्षेत्र चिहिंत किए गए थे। कोयले का प्रारंभिक उत्खनन वर्ष 1913 प्रारंभ हुआ था। चिरमिरी में वर्ष 1928 में उत्खनन प्रारंभ किया गया। इस बीच वर्ष 1928 में बिजुरी-चिरमिरी रेल लाईन बिछनी प्रारंभ हुई और वर्ष 1931 में यह काम पूरा हुआ। रेल का विकास और कोरिया रियासत में कोयला उत्खनन छत्तीसगढ़ में उद्योगों की प्रथम आहट रही। शुरू से ही यह क्षेत्र प्रगतिशील रहा है। भारत में पहली बार खनिज मूल्य में रायल्टी जोड़ने का कार्य यहीं से प्रारंभ हुआ। वर्ष 1947 में न्यूनतम मजदूरी दर भी लागू हुई थी। रियासत काल में ही इस अंचल के स्कूलों में बच्चों को आज मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम की तर्ज पर चना और गुड़ वितरित किया जाता था।
शुरू से प्रगतिशील रहे इस क्षेत्र में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्कूल प्रारंभ किया गया। स्कूली विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण, छात्रवृत्ति जैसी आधुनिक सुविधाए प्रारंभ की गई। ग्रामीणों को वन निस्तारी अधिकार भी दिए गए। मनेन्द्रगढ़ में नगर म्यूनिस्पल्टी और चिरमिरी नगर विकास समिति बनायी गई। प्रसिद्ध बांग्ला लेखक श्री विमल मित्र भी 20वीं सदी के प्रारंभ में कोरिया रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ और रेलवे का आधार बनाकर अनेक कथाएं भी लिखी। मनेन्द्रगढ़ को कोरिया जिले का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है। इस क्षेत्र में रेलवे लाईन के विस्तार से यह क्षेत्र व्यापारिक नगर के रूप में उभरा।
नवीन जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर सरगुजा संभाग के अंतर्गत होगा। जिले में कुल ग्रामों की संख्या 376 है। यहां 13 राजस्व निरीक्षक मण्डल तथा 87 पटवारी हल्का है। इस जिले में मनेन्द्रगढ़, भरतपुर और खड़गवां अनुविभाग और मनेन्द्रगढ़, केल्हारी, भरतपुर, खड़गवां, चिरमिरी और कोटाडोल तहसील होंगी। जिले में 5 नगरीय निकाय जिनमें नगरपालिका निगम चिरमिरी, नगरपालिका परिषद मनेन्द्रगढ़, नगर पंचायत झगराखांड़, नगर पंचायत खोंगापानी और नगर पंचायत नई लेदरी सम्मिलित हैं। नवगठित जिले में अमृतधारा जलप्रपात, सिद्धबाबा मंदिर (मनेन्द्रगढ़) सीतामढ़ी-हरचौका (रामवनगमन पर्यटन परिपथ) भरतपुर, रमदहा जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थल भी शामिल हैं।

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर नवगठित जिले की सीमा उत्तर में तहसील कुसमी, जिला सीधी एवं जिला सिंगरोली (मध्यप्रदेश), दक्षिण में तहसील पोड़ी उपरोड़ा, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़), पूर्व में तहसील बैकुण्ठपुर एवं सोनहत, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़), पश्चिम में जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (छत्तीसगढ़), अनुपपुर और शहडोल (मध्यप्रदेश) निर्धारित की गई है। इस नवीन जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल एक लाख 46 हजार 824 हेक्टयर है। यहां की जनसंख्या 3 लाख 76 हजार 696 है। प्रस्तावित गठित नवीन जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में तहसील मनेन्द्रगढ़ में ग्रामों की संख्या 59, केल्हारी में ग्रामों की संख्या 74, भरतपुर में ग्रामों की संख्या 108, खड़गवां में ग्रामों की संख्या 44 एवं चिरमिरी में ग्रामों की संख्या 16 और तहसील कोटाडोल में ग्रामों की संख्या 75 है।