सुरता.. राज आन्दोलन म आहुति…

सुरता..
राज आन्दोलन म आहुति…
अलग छत्तीसगढ़ राज बनाय खातिर जेन आन्दोलन होए हे, वोमा वइसे तो लगभग जम्मो वर्ग के लोगन के कोनो न कोनो किसम के योगदान हे, फेर मोला लागथे के ये यज्ञ म इहाँ के साहित्यकार मन के आहुति सबले जादा डराय हे. काबर ते राष्ट्रीय राजनीति ले जुड़े लोगन मन तो सिजनेबल या कहिन चुनाव वुनाव के बखत भले जादा तनियावंय, फेर साहित्य ले जुड़े लोगन बारोंमासी ए बुता म भीड़े राहंय. छत्तीसगढ़ी भाखा साहित्य ले संबंधित जिहां भी कार्यक्रम होतीस, कोनो जगा कवि सम्मेलन या गोष्ठी होतीस, सबो म अलग राज के नारा जरूर बुलंद करतीन. हां, इहू बात सिरतोन आय के क्षेत्रिय राजनीतिक दल मन घलो बारोंमासी ए उदिम ल करंय. फेर एकर मन के संख्या अंगरी गिनऊ राहय, तेमा उप्पर ले कतकों मन के उदिम ह तो सिरिफ दुकानदारी चलाए बरोबर घलोक लागय.
वइसे तो मोर जनम डा. खूबचंद बघेल के अगुवई म सन् 1956 ले छत्तीसगढ़ भातृसंघ के झंडा ले चले जन आंदोलन के बखत नइ हो पाए रिहिसे, फेर जब पवन दीवान जी पृथक छत्तीसगढ़ पार्टी के बेनर म गाड़ी छाप के चुनाव चिन्ह म केयूर भूषण जी के खिलाफ रायपुर लोकसभा ले चुनाव लड़िन त हमन पढ़त रेहेन, तभो अपन गाँव म अउ तीर तखार के गाँव मन म सइकिल म घूम घूम के वोकर चुनाव के चिनहा ‘गाड़ी छाप’ के छापा बना के प्रचार करन. फेर जिहां तक बड़का जलसा म शामिल होए के बात हे, त मैं चंदूलाल चंद्राकर जी के अगुवई म रायपुर के सप्रे स्कूल मैदान म होए बड़का जनसभा म जरूर शामिल होए रेहेंव.
हमन कुर्मी समाज के सामाजिक गतिविधि अउ संग म साहित्य जगत म नान्हे उमर ले जुड़ जाए के सेती, राज आन्दोलन म जल्दी संघरगे रेहेन. रायपुर के तात्यापारा वाले कुर्मी बोर्डिंग वो पइत राज आन्दोलनकारी मन के एक प्रकार के ठीहा राहय. कोनो संगठन के लोगन होवंय, बइठका ल इहेंच राखंय. एक तो अइसन बइठका खातिर कोनो किसम के उहाँ शुल्क नइ ले जावत रिहिसे, उप्पर ले शहर के बीच म होए के सेती चारोंमुड़ा के लोगन ल उहाँ पहुंचे म सोहलियत परय, बस अउ रेल ले आने शहर ले अवइया मनला घलो सोहलियत परय.
चंदूलाल चंद्राकर जी के अगुवई म जेन बड़का सभा होए रिहिसे, वोमा रायपुर के पूरा छत्तीसगढ़ी साहित्य जगत एकमई होगे रिहिसे. काबर ते इहाँ के सियान साहित्यकार हरि ठाकुर जी वोमा खांध म खांध जोर के रेंगत रिहिन हें, अउ हमू मनला जतका झन साहित्य समिति संग जुड़े रेहेन सबला एमा संघरे बर केहे रिहिन. ए ह ऐतिहासिक जलसा होए रिहिसे, जेमा पूरा छत्तीसगढ़ के लोगन इहाँ जुरियाए रिहिन हें.
ए बड़का जलसा के बाद अतका बड़का रैली अउ जलसा भूपेश बघेल के अगुवई म सरलग चले ‘स्वाभिमान रैली’ म देखे बर मिलिस, जेन पूरा शहर ल किंजर के गांधी चौक म जुरियावय. ए जुराव के एक खास बात ए रहय, के एमा जम्मो अलग अलग राजनीतिक दल के लोगन, एक मंच म जुरियावंय अउ खांध म खांध मिला के अलग छत्तीसगढ़ राज के मांग ल बुलंद करंय. मोला भूपेश बघेल वाले स्वाभिमान रैली के ठउका सुरता हे, जब भूपेश बघेल के संग रमेश बैस अउ अजित जोगी जइसन अलग अलग राजनीतिक धुरी के मनखे खांध म खांध मिला के रायपुर शहर म किंजरे रिहिन हें, अउ मंच म संगे म बइठे रिहिन हें. ए आयोजन म एक अच्छा बात ए होवय, के एला कोनो राजनीतिक दल या उंकर झंडा के खाल्हे म नइ करके सर्व छत्तीसगढ़िया समाज के मुखियई म करंय. जतका छत्तीसगढ़िया समाज के अध्यक्ष मन राहंय, उन मन ल पागा पहिरा के मंच म बइठारंय.
छोटे छोटे धरना प्रदर्शन तो अबड़ होवय. कतकों अलग अलग संगठन मन अपन अपन बेनर के खाल्हे रखंय. एक बात इहाँ विशेष रूप ले उल्लेख करे के लाइक हे, के भले रायपुर ह वो बखत घोषित रूप म राजधानी नइ बने रिहिसे, तभो जम्मो धरना प्रदर्शन ल रायपुर म ही जादा करे जावय. दूसर शहर के संगठन वाले मन घलो रायपुर म जुरियाए के कोशिश करंय.
एक नान्हे संगठन तो हमू मन ‘छत्तीसगढ़ी बहुमत’ के नांव ले बनाए रेहेन. अउ अभी के राजभवन चौक, जेला वो बखत सर्किट हाउस चौक कहे जाय, उहाँ धरना प्रदर्शन करे रेहेन. हमन ल खासकर मोला तो जम्मो संगठन वाले मन अपन धरना प्रदर्शन अउ रैली म बलाते राहंय, काबर ते हमन छत्तीसगढ़िया राज ले संबंधित जोरदरहा कविता सुनावन. एकरे सेती उन काहंय- बाबू हो तुमन आथव अउ सुग्घर सुग्घर कविता सुना देथव त मंच के रौनक बाढ़ जथे. इहू बात हे, के वो बखत हिन्दी अउ उर्दू के कतकों तथाकथित राष्ट्रवादी साहित्यकार मन तब हमन ल देशद्रोही कहे म घलो लाज नइ मरत रिहिन हें. ए बात अलग हे, के आज उही मन छत्तीसगढ़िया कहाए बर सबले जादा ढोंग करत रहिथें.
ए राज आन्दोलन म मैं एक परम समर्थक के जरूर उल्लेख करना चाहथंव, जेन भले अकेल्ला सइकिल म किंजरत राहंय, फेर रायपुर या तीर तखार के शहर म कहूंचो धरना प्रदर्शन होतीस, वोमा पहुंची जावंय. हम सब उनला बालक भगवान के नांव ले जानन. उंकर असली नाम पूर्णेन्द्र सोनी रिहिसे, जेन कंकाली पारा के मूल निवासी रहिन, फेर उन लइकई उमर ले ही संन्यास के रद्दा ल धर ले रिहिन हें, तेकर सेती सब उनला बालक भगवान ही काहंय. उंकर शरीर म कपड़ा के नांव सिरिफ एक ठन लंगोट भर राहय. उंकर जगा एक लइकुसहा सइकिल घलो राहय, जेमा उन चारों मुड़ा के दौरा करयं. उंकर सइकिल म एक नेम प्लेट टंगाय राहय, जेमा ‘छत्तीसगढ़ राज लेके रहिबो’ लिखाय राहय.
रायपुर के छत्तीसगढ़िया साहित्यकार मन में बहुत झन तो सरकारी नौकरी म राहंय, वोमन ए आन्दोलन ले छटके असन राहंय, फेर वोमा एक रामप्रसाद कोसरिया जी घलो रिहिन, जेन गुरुजी राहंय तभो ले सबो धरना प्रदर्शन म संघरंय. मैं वोकर संग बहुत हांसी मजाक करंव, काबर ते वो ह हमर सियान रामचंद्र वर्मा जी संग एके स्कूल म पढ़ावय तेकर सेती हमर घर आना जाना घलो राहय. मैं वोला काहंव- तैं छत्तीसगढ़ राज खातिर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन म संघरथस, तोला कहूँ नौकरी ले निकाल दिहीं त? त वो काहय- निकल दिहीं त वकीली कर लेबो जी, हम वकालत घलो पढ़े हन. वोकर ए बात मोला बहुत अच्छा लागय, के छत्तीसगढ़ राज खातिर वो अपन नौकरी के घलो फिकर नइ करत रिहिसे.
वो बखत हमर मन के कलम खाली राज आन्दोलन ले संबंधित रचना खातिर ही जादा चलय. मैं तो सिंगार फिंगार रचना कभू लिखबेच नइ करेंव. हमर मन के स्वर अउ गायकी घलो मयारुक रिहिसे तेकर सेती गीत शैली के रचना जादा लिखावय…
धर मशाल ल तैं ह संगी जब तक रतिहा बांचे हे
पांव सम्हाल के रेंगबे बइहा जब तक रतिहा बांचे हे..
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धरे मशाल फेर जाग उठे हें नारा ले स्वाभिमान के
एक न एक दिन फेर रार मचाहीं बेटा सोनाखान के…
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ये माटी के पीरा ल कतेक बतांव कोनो संगी संगवारी ल खबर नइए
धन जोगानी चारों खुंट बगरे हे तभो एकर बेटा बर छइहां खदर नइहे…
कोनो आथे कहूँ ले लांघन मगर इहाँ खाथे ससन भर फेर सबर नइए..
लहू तो बहुतेच उबलथे तभो फेर कहूँ मेर कइसे गदर नइए…
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सबके लहू पछीना ओगराए के, सबके देवी देवता ल सुमरनी के फल आखिर 1 नवंबर सन् 2000 के सिध परीस अउ छत्तीसगढ़ ल अलग राज के स्वतंत्र चिन्हारी मिलिस. फेर आज राज बने एक कोरी अकन बछर ले आगर होगे, तभो नइ लागय, के हमन जेन आरुग छत्तीसगढ़िया राज के सपना संजोए रेहेन, वो ह पूरा हो पाइस का? आज घलो इहाँ के शासन प्रशासन म उहिच मन जादा देखब म आथें, जिंकर ले मुक्ति के सपना सजोए रेहेन. आज घलो इहाँ के भाखा अउ संस्कृति अपन अलग चिन्हारी खातिर आंसू बोहावत हे. नवा पीढ़ी रोजगार के आस म बूढ़ावत हे. तब फेर ये गीत के बोल फूट परिस-
राज बनगे राज बनगे देखे सपना धुआँ होगे
चारों मुड़ा कोलिहा मन के देखौ हुआँ हुआँ होगे..
का का सपना देखे रहिन पुरखा अपन राज बर
नइ चाही उधार के राजा हमला सुख सुराज बर
राजनीति के परिभाषा लागथे महाभारत के जुआ होगे…
कोनो भी राष्ट्रीय राजनीतिक दल होवय उंकर चाल चरित्तर देख के अइसे नइ जनावय के इहाँ आरुग छत्तीसगढ़िया राज कभू देखे बर मिल सकही, तब क्षेत्रीय दल के सपना देखत इहू लिखाइस-
जब तक दिल्ली म बइठे हे तोर भाग के खेवनहार
तब तक बेटा छत्तीसगढ़िया कइसे पाबे तैं अधिकार..
तोर धरती अउ तोर अंगना फेर नीति वोकर चलत हे
एकरे सेती जम्मो बैरी मन तोर छाती ल मचत हे…
जतका उंकर इहाँ मोहरा हें, करथें भावना के बैपार….
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कब तक पछुवाए रइहू अब अगुवा बनव रे
नंगत लूटे हें हक ल तुंहर अब बघवा बनव रे…..

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