
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) में जन्मजात पैर विकृति पीडित बच्चें का सफलता पूर्वक उपचार हुआ
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) में जन्मजात पैर विकृति पीडित बच्चें का सफलता पूर्वक उपचार हुआ
गरियाबंद // जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) अंतर्गत 0 से 18 वर्ष के बच्चों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर ईलाज किया जाता है। इस योजना के तहत स्कूलों और आंगनबाड़ी में बच्चों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जाती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें निःशुल्क में ईलाज कराया जाता है। इस कार्यक्रम में जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्म के समय दोष, कमियां, बीमारियां, और विकास में देरी, कटे-फटे होंठ, टेढ़े-मेढ़े हाथ-पैर जैसी समस्याओं की पहचान, मोतियाबिंद, जन्मजात हृदय रोग सहित विभिन्न गंभीर बीमारियों का इलाज शासन द्वारा कराया जाता है।
विकासखण्ड देवभोग के चिरायु दल के द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बड़ीगांव के आंगनबाड़ी केन्द्र में 4 माह के मास्टर परिक्षित सोना जन्मजात पैर विकृति बीमारी से ग्रसित पाया गया। बच्चें की बीमारी का पता चलते ही चिरायु दल द्वारा त्वरित उपचार करते हुए उन्हें मेकाहारा अस्पताल रायपुर में भर्ती करवाकर उनका सफलतापूर्वक इलाज कराया गया। अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य जीवन यापन कर रहा है। उनके परिजनों ने कहा हम अपने बच्चे के उपचार के लिए आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे। उन्होंने राज्य शासन और जिला प्रशासन के चिरायु टीम का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है।








