छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक जय नगर शाखा के चपरासी द्वारा उपभोक्ता के साथ दुर्व्यवहार

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक जय नगर शाखा के चपरासी द्वारा उपभोक्ता के साथ दुर्व्यवहार
उपभोक्ताओं का आरोप शाखा के अधिकारियों की मौन स्वीकृति से चपरासी का हौसला बुलंद

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गोपाल सिंह विद्रोही/विश्रामपुर – छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक शाखा जयनगर में पदस्थ भृत्य का उपभोक्ताओं से दुर्व्यवहार से उपभोक्ता मर्माहत एवं दुखित है। परेशान उपभोक्ताओं ने भृत्य को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की मांग। उच्च अधिकारियों से की है।

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जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक जयनगर शाखा का वर्ष 1982- 83 में ग्रामीणों के लिए ग्रामीणों की सुविधा के लिए स्थापित किया गया था ,तत्कालिक बैंक जयनगर निवासी अजय सिंह के मकान में अस्थाई रूप से वर्षों तक संचालित रहा, जो बाद में दैनिक सोम बाजार कैंपस में स्थापित हो गया तब के ईमानदार व मेहनतकश बैंक के कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं से अच्छे व्यवहार का करते हुए उपभोक्ताओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ाते चले गए परिणामत: और आज यह बैंक 30 हजार पासबुक धारक पंजीकृत ग्रामीण उपभोक्ता है ,तो वही सामान्य उपभोक्ता भी छोटे-छोटे कामों के लिए बैंक पहुंचते । तत्कालिक कर्मचारी एवं शाखा प्रबंधक के अथक प्रयास से यह सब कुछ संभव हो सका परंतु अब लगता है कि इस बैंक को नए उपभोक्ताओं की जरूरत नहीं है ,जो पूर्व में पंजीकृत उपभोक्ता है उनके साथ कर्मचारियों का काफी दूर व्यवहार देखा जा रहा है ।सबसे ज्यादा शाखा में पदस्थ भृत्य का उपभोक्ताओं के साथ र्व्यवहार अच्छा नहीं होने के कारण सीधे-साधे ग्रामीण काफी दुखित व लज्जित है। आलम यह है कि किसी भी उपभोक्ता के साथ विवाद किया जाना, गाली गलौज करना, बैंक से बाहर निकालना जैसी घटनाएं करना आम सी बात हो गई है। सीधे-साधे ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ यह सब बैंक में पदस्थ अधिकारी व बाबू के सामने घटित होती है या यह कहे कि इनकी मौन स्वीकृति से हैं भृत्य की दबंगई इतनी बढ़ गई है या क्या वजह है कि शाखा के अन्य कर्मचारी भी उसका विरोध कर नहीं पा रहे हैं ये तो वही जाने । उपभोक्ताओं ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक शाखा जयनगर मे पदस्थ भृत्य को तत्काल अन्यत्र शाखाओं में स्थानांतरित किए जाने की मांग की है।
*शाखा को अपना निजी संपत्ति समझ रहे हैं कर्मचारी*
उपभोक्ताओं का आरोप है कि शाखा में पदस्थ भृत्य के साथ कुछ ऐसे कर्मचारी भी है जो शाखा को अपना निजी संपत्ति और उपभोक्ताओं का नौकर समझ रहे। उपभोक्ताओं द्वारा अपने काम के संबंध में जानकारी लिए जाने पर या किसी प्रकार के फार्म भरवाने पर उनके पास बुक फेंक दिया जाता है और शाखा से चले जाने का कहा जाता है ।ऐसा लगता है कि यह शाखा उनकी अपनी प्रॉपर्टी है और उपभोक्ता उनके नौकर। पुराने उपभोक्ताओं ने जो लंबे समय से इस बैंक से लेनदेन करते हैं उन्होंने आरोप लगाया कि एक समय था जब यहां के सहज सरल कर्मचारियों द्वारा खाता खोले जाने हेतु ग्रामीणों को प्रेरित किया जाता था आज उन्हीं का प्रतिफल है कि यहां पदस्थ कर्मचारी उनके लगाए हुए फसल को काट रहे हैं।
*शाखा में कर्मचारियों सहित अन्य सुविधाओं की कमी*
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक शाखा जयनगर का प्रायोजक ऐसे तो भारतीय स्टेट बैंक है परंतु यहां सुविधाओं की काफी कमी देखी जा रही है। 30,000 से अधिक पासबुक धारी उपभोक्ता होने के बाद भी यहां दो केसियर, एक शाखा प्रबंधक, एक अधिकारी रैंक के कर्मचारी और एक भृत्य पदस्थ है। जिससे इस शाखा पर उपभोक्ताओं का भारी दबाव दिख रहा है परंतु यहां पदस्थ भृत्य के दुर्व्यवहार से ग्रामीण अन्यत्र अपना खाता स्थानांतरित करवाने का भी बात कर रहे हैं ।कुछ उपभोक्ता का मानना है कि यहां के पदस्थ कर्मचारियों के व्यवहार में तभी सुधार होगा जब कोई प्राइवेट बैंक की शाखा यहां खुल जाए। जब तक प्राइवेट बैंक खुलता नहीं है तब तक इनके व्यवहार में कोई परिवर्तन आने वाला नहीं है ।बाहरहाल चपरासी की करतूत से उपभोक्ता काफी दुखित व परेशान है. इस संबंध में नव पदस्थ शाखा प्रबंधक सुरेंद्र अग्रवाल से संपर्क करने पर उन्होंने बस इतना ही कहा अभी मैं एक माह में से ही पदस्थ हूं । बैंक के कर्मचारियों के व्यवहार से अभी अनभिग हूं।