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Ambikapur : नववर्ष के उपलक्ष्य में मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन की काव्यगोष्ठी…………

नववर्ष के उपलक्ष्य में मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन की काव्यगोष्ठी…………

ब्यूरो चीफ/सरगुजा// नववर्ष के उपलक्ष्य में मानव कल्याण एवं सामाजिक विकास संगठन के द्वारा स्थानीय केशरवानी भवन में संस्था के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ0 उमेश पाण्डेय की अध्यक्षता में सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शायर-ए-शहर यादव विकास, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल, मीना वर्मा, पं0 रामनारायण मिश्र व डॉ0 सुधीर पाठक थे।

मां वीणापाणि के पूजन पश्चात् कवयित्री पूर्णिमा पटेल ने सरस्वती-वंदना की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नए साल का पहला काम वरिष्ठ कवयित्री मीना वर्मा ने सबको बताया- चलो नए साल का आगाज़ करते हैं, चलो सबसे पहले सबको प्रणाम करते हैं। संगठन के साहित्यिक मंच की प्रदेश अध्यक्ष कवयित्री आशा पाण्डेय ने- आया नूतन वर्ष, चलो मनाएं साथ, दो पल का जीवन मिला, चलो मिलाएं हाथ- से नवल वर्ष का अभिनंदन किया। नए साल को माधुरी जायसवाल ने सरल, सहज भाषा में बहुत सुंदर ढंग से परिभाषित किया- जब वर्ष अंत हो, नया साल है। कैलेंडर की गिनती बदल जाना नया साल है। ज़िंदगी का इतिहास बदल जाना नया साल है।

रामराज्य की आशा वीर रस के प्रसिद्ध कवि विनोद हर्ष की आंखों में झिलमिला उठी- नया वर्ष जो साकार करे गांधी के रामराज्य की आशा को, जो ज़िंदा कर दे माखन के पुष्पों की अभिलाषा को। वीर रस के जाने-माने कवि श्यामबिहारी पाण्डेय माह जनवरी, 2022 के प्रति बेहद आशान्वित नज़र आए। उन्होंने जनवरी को ‘समय की पाती’ कहकर श्रोताओं में जोश जगा दिया- लो जा रहा दिसम्बर, आती है यह जनवरी। देखो नया-नया क्या लाती है जनवरी? जो जा रहा है, विदा दो, स्वागत करें नए का। आते हुए समय की पाती है यह जनवरी। अनिता मंदिलवार ने नववर्ष पर सबको बधाइयां देते हुए दीपक-सा जलकर रौशनी देने का आव्हान किया- नववर्ष की शुभकामनाएं, आओ हम खुशी मनाएं। संदेश यही है नववर्ष पर, दीप-सा हम जलते जाएं। कवि प्रकाश कश्यप ने नूतन वर्ष में कुछ नया कर दिखाने का हौसला आफ़जाई करते हुए यह शानदार रचना पढ़ी- आनेवाल साल ये दे रहा उपहार- मिलकर रहना साथ में, सबसे करना प्यार।

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गोष्ठी में वरिष्ठ कवयित्री गीता दुबे की रचना- नया वर्ष आया, नव उम्मीद लेकर नया वर्ष आया, फिल्म एक्टर, डॉयरेक्टर व कवि आनंद सिंह यादव की कविता- मैं जहां हूं उसकी वजह आप हैं, चन्द्रभूषण मिश्र की- हे वर्ष! तुम्हें मैं क्या दूं, अब अंतिम शाम ढलनेवाली है, वरिष्ठ गीतकार रंजीत सारथी का सरगुजिहा गीत- नवा साल का नवा बिहान हे, खावा परेम लड्डू, मीठ कतेक मान हे और कविवर एसपी जायसवाल की कविता- नए वर्ष के शुभ अवसर पर मैं क्या दे सकता उपहार तुम्हें। हंसकर स्वीकार करो, मेरा ढेरों प्यार तुम्हें- ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अभिनेत्री व कवयित्री अर्चना पाठक ने जब अपनी अनोखी अदा व दिलकश स्वर लहरियों से सबको अभिभूत करते हुए नग़मा पेश किया, तो पूरी महफ़िल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी- हो गए जब जुदा हम किधर आ गए। एक छोटा हमारा भला गांव था, ख़्वाहिशें हम बढ़ाकर नगर आ गए। शायर-ए-शहर यादव विकास का कवि-मन भी शहर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से उकता गया है। इसीलिए उनका मन सुकून पाने आजकल गांव की गलियों में ख़ूब रमने लगा है। उनके सरगुजिहा गीत में उनकी यही तमन्ना नुमाया हुई- मन करथे घर बनाय लों, मैं तोर गांव में, कि तोर घर बसा दों मैं मोर गांव में।

डॉ0 सुधीर पाठक ने अपनी हार्दिक पीड़ा व्यक्त करते हुए ज़माने की रवायत व सच्चाइयों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया- जो झेल चुके झेले, दुनिया के झमेले। अमृत कम मिला यहां ज़हर ही सब उड़ेले। लोकगायिका पूर्णिमा पटेल के दोहे- सदा सरलता ही रहे, ऐसा नहीं उपाय, जीवन-राह बड़ी कठिन, सबको दिया घुमाए- मेें जहां ज़िंदगी की कठिनाइयां नमूदार हुईं वहीं ओजस्वी युवा कवि अम्बरीष कश्यप के गीत ने सबको चरित्रवान बनने की प्रेरणा दी- किसी के नाम से सीखो, किसी के काम से सीखो। चरित्रवान होने को मर्यादा राम से सीखो। गोष्ठी में बालकवि शुभम पांडेय ने भी नए वर्ष पर प्रेरणादायी कविता की प्रस्तुति दी। अंत में, दोहा छंद के अनन्य साधक मुकुंदलाल साहू ने अपने दोहे से दुआएं देते हुए कार्यक्रम का यादगार समापन किया- दया महामाया करे, सुखद रहे नववर्ष। सब लोगों के हृदय में, भरा रहे नित हर्ष। कार्यक्रम का संचालन संस्था की साहित्य प्रभाग की अध्यक्ष अर्चना पाठक व आभार उपाध्यक्ष मुकुंदलाल साहू ने जताया। इस अवसर पर मनीलाल गुप्ता, अजय श्रीवास्तव, निशा गुप्ता, ओमप्रकाश दुबे और बुधराम तिर्की उपस्थित रहे।

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