कोरोना: लॉन्च हुई डीआरडीओ की नई दवा, जानिए यह कितनी कारगर और कैसे करती है काम?

कोरोना से जंग के लिए DRDO का हथियार तैयार, जाने डोज, साइड इफेक्‍ट्स, कीमत

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कोरोना वायरस के सभी वेरिएंट्स के खिलाफ असरदार इस दवा को डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। यह शरीर में वायरस को बढ़ने से रोकती है।

दवा की पहली खेप होगी लॉन्च
रक्षा मंत्रालय ने इस महीने के शुरू में कहा था कि कोविड-19 के मध्यम लक्षण वाले तथा गंभीर लक्षण वाले मरीजों पर इस दवा के आपातकालीन इस्तेमाल को भारत के औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) की ओर से मंजूरी मिल चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि डीआरडीओ के मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में दोनों केन्द्रीय मंत्री इस दवा की पहली खेप को लॉन्च करेंगे।

110 मरीजों पर हुआ ट्रायल

दवा नियामक ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने आपात इस्तेमाल के लिए इस दवा को मंजूरी दी है। डीआरडीओ के इनमास लैब के वैज्ञानिकों ने यह दवा डॉक्टर रेड्डी लैब्स के साथ मिलकर बनाई है। इस दवा के मरीजों पर इस्तेमाल को डीसीजीआई ने भी मंजूरी दे दी है। इस दवा का डीआरडीओ ने करीब 110 मरीजों पर ट्रायल किया है। सबके परिणाम काफी बेहतर रहे हैं।

डीआरडीओ की ओर से विकसित की गयी कोविड-19 रोधी दवा 2-डीजी की पहली खेप सोमवार को लॉन्च की गयी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन इस दवा को लॉन्च किया। रक्षा मंत्रालय ने इस महीने के शुरू में कहा था कि कोविड-19 के मध्यम लक्षण वाले तथा गंभीर लक्षण वाले मरीजों पर इस दवा के आपातकालीन इस्तेमाल को भारत के औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) की ओर से मंजूरी मिल चुकी है।

गौरतलब है कि हाल ही में डीआरडीओ की तरफ से एंटी-कोविड दवाई बनाने का दावा किया गया था। डीआरडीओ की तरफ से कहा गया है कि ग्लूकोज पर आधारित इस दवाई के सेवन से कोरोना ग्रस्त मरीजों को ऑक्सीजन पर ज्यादा निर्भर नहीं होना पड़ेगा। डीआरडीओ ने एंटी कोविड मेडिसिन ‘2-डिओक्सी-डी-ग्लूकोज़’ (2डीजी) को रेड्डी लैब के साथ मिलकर बनाया है। क्लीनिकल-ट्रायल के बाद ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस दवाई को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए हरी झंडी दे दी थी।

2 डीजी असल में 2 डीजी अणु का एक परिवर्तित रूप है जिसमें ट्यूमर, कैंसर कोशिकाओं का इलाज होता है। ट्रायल में पता चला कि 2 डीजी कोविड मरीजों के इलाज में तो कारगर है ही हॉस्पिटल में एडमिट मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता को भी कम करती है। फिलहाल इस दवा को सेकेंडरी मेडिसिन की तरह यूज करने की परमिशन दी गयी है। अर्थात यह प्राइमरी मेडिसिन के सपोर्ट में यूज की जाएगी।
यह दवा एक सैशे के रुप में उपलब्ध होगी। ओआरएस की तरह इसे भी पानी में घोलकर दिया जाएगा। दवा मरीजों को दिन में दो बार लेना होगा। कोविड के मरीजों को पूरी तरह से ठीक होने के लिए पांच से सात दिन तक यह दवा लेनी पड़ेगी।

दवा के दाम को लेकर अब तक कुछ भी नहीं बताया गया है। रेड्डीज लैबोरेटरी की तरफ से इसके दाम तय किए जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि एक सैशे की कीमत 500 से 600 रुपये तक रहने की चर्चा है।

दवा अस्पताल में भर्ती कोविड मरीजों की रिकवरी तेजी से कर सकती है और मेडिकल ऑक्सीजन पर उसकी निर्भरता को भी कम कर सकती है। ट्रायल्स में पाया गया है कि 42 प्रतिशत रोगी जिन्हें प्रतिदिन इस दवा के 2 डोज दिए गए उनको तीसरे दिन ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ी है।

दवा की पहली खेप को सोमवार को लॉन्च किया गया है। अभी स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से इसे प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टरों को उपलब्ध करवाया गया है। आने वाले समय में इसे आम लोगों तक आसानी से पहुंचाने के लिए कार्य किए जाएंगे।