30-40 साल से काबिजों को उपसरपंच और साथियों ने मिलकर तोड़ा मकान……

30-40 साल से काबिजों को उपसरपंच और साथियों ने मिलकर तोड़ा मकान
आरक्षित वर्ग के परिजन बेघर हुए, दर-दर की ठोकर खा रहे। पीड़ित परिवारों ने कलेक्टर जनदर्शन में लगाई न्याय की गुहार

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महासमुंद-पिथौरा:- 30-40 वर्षों से काबिज सतनामी परिवार की जमीन पर कब्जा करने के लिए गांव के ही उप-सरपंच सहित अन्य लोगों ने मिलकर मकान को तोड़ दिया। पीड़ितों ने इसकी शिकायत जनदर्शन कलेक्ट्रेट में करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। न्याय दिलाये जाने एवं अनावेदकगण के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किये जाने का आग्रह किया गया है।

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अनावेदकगण एक राय होकर बिना सूचना दिये हुये व किसी प्रकार का नोटिस नहीं दिया गया था, फिर भी अनावेदकगण यह जानते हुये कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति व्यक्तियों द्वारा विगत 30-40 वर्षों से अधिक से मकान बनाकर सपरिवार निवास करते हैं, उस मकान को अनावेदकगण एकराय होकर तोड़ दिये हैं। महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील व थाना सांकरा अंतर्गत ग्राम लोहराकोट निवासी आवेदकों अघनमोती पति मनीराम सतनामी, शोभाराम खूंटे पिता किसुन, सीता देवी पति बालक राम, मायाराम शिकारी पिता मेला राम, सेवक राम पिता मेला राम शिकारी ने बताया कि अनावेदकगण वीरेंद्र कुमार पटेल उपसरपंच बालमोती पटेल, पुरुषोत्तम पटेल, बंशी राणा, द्वारिका पटेल सभी निवासी ग्राम लोहराकोट उनसे जातिगत भेदभाव रखते हैं। इस कारण अनुसूचित जाति, जनजाति के व्यक्तियों को इस गाँव में नहीं रहने देंगे कहते हैं। इस प्रकार व्यक्तिगत दुश्मनी रखते हुये उपसरपंच द्वारा मिटिंग आयोजित कर हम लोगों के मकान को बेरहमी से तोड़ दिया गया है।
आवेदकों ने बताया है कि पूर्व में भी अनावेदकगण द्वारा हम लोगों के मकान को तोड़ने एवं उक्त स्थान से बेदखल करने के लिये तरह-तरह के हथकण्डे अपनाये गए। आये दिन परेशान करते थे जिसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक, जिलाधीश एवं अनुसूचित जनजाति आयोग में किया गया था।

अनावेदकगण द्वारा जातिसूचक गाली-गलौच करते हुये, तुम लोग छोटे जाति के हो, कहकर अपमानित करते हुये तुम लोग इस गाँव में नहीं रह सकते कहकर डरा- धमकाकर हम लोगों के साथ मारपीट करने लगे। आवेदकों ने बताया कि हम लोग डरे-सहमे हुये थे। अनावेदक ग्राम का उपसरपंच होने के कारण अपनी राजनीतिक पहुँच दिखाते हुये, हम लोगों को हमेशा डराया, धमकाया जाता था। आवेदकगण ने बताया कि वे गरीब एवं निर्धन व्यक्ति हैं, उनके पास उक्त मकान के अलावा किसी प्रकार की भूमि या जमीन नहीं है। रोजी-मजदूरी कर अपने बच्चों का लालन-पालन करते हैं। मकान तोड़ दिया गया है, तब से बेघर हो गये हैं व रहने के लिये दर-दर की ठोकर खा रहे हैं।

कहीं पर भी रहने के लिये छत्रछाया नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति को देखते हुये पीड़ितों ने आर्थिक सहायता का आग्रह किया है। अनावेदकगण के विरुद्ध अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण एवं भादवि के तहत अपराध पंजीबद्ध किये जाने की मांग की गई हैं