सूरजपुर : मध्यान भोजन का कार्य स्व-सहायता समूह से बिना किसी स्पष्ट आदेश से छिनकर निजी सप्लायर को दे दिया गया।

सूरजपुर/दतिमा मोड़/ कोरोना संक्रमण काल में स्कूलों में संचालित मध्यान भोजन का कार्य स्व सहायता समूह से बिना किसी स्पष्ट आदेश से छिनकर निजी सप्लायर को दे दिया गया जिससे जिले के महिला स्वयं सहायता समूह के महिलाओं का रोजी-रोटी चला गया और बेरोजगार हो गए हैं।

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       ज्ञात हो कि भाजपा जिला अध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल ने दो दिन पूर्व प्रेसवार्ता कर सूरजपुर जिले में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विभिन्न विद्यालयों में अधिकारियों द्वारा सरकार के संरक्षण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है। अग्रवाल ने कहा कि जिले में विभिन्न विद्यालयों में 1500 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों के द्वारा मध्यान्ह भोजन का संचालन किया जाता था। जिसमें जिले की लगभग 15,000 महिलायें रोजगार के लिये लाभान्वित हो रही थी। लेकिन कोरोना संक्रमण काल में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में मध्यान्ह भोजन संचालन का काम समूह से छीनकर बगैर किसी स्पष्ट आदेश के निजी सप्लायर को दे दिया गया। जिससे जिले की लगभग 1500 महिला स्वयं सहायता समूह के हाथ से काम छिन गया है।  सामाग्री आपूर्तिकर्ता द्वारा अमानक स्तर का खाद्य सामाग्री जिले के स्कूलों में सप्लाई किया जा रहा है। जिसकी क्वालिटी अत्यंत खराब होने के कारण वह सामाग्री बच्चों के खाने योग्य नहीं है। स्कूलों में प्रदाय की गई दाल व सोयाबीन बड़ी अत्यंत घटिया है। अचार के नाम पर बच्चों को सड़े- गले मिर्च का पेस्ट बनाकर बांटा जा रहा है। समूह से काम छिनने के कारण व सामाग्री आपूर्ति को एक सप्लायर से केन्द्रीयकृत करने के कारण स्थानीय व ग्रामीण फुटकर व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है।

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   जनपद सदस्य ने कीड़े युक्त खाद्य सामग्री वितरण में लगाई रोक- भैयाथान जनपद पंचायत के जनपद सदस्य अभय प्रताप सिंह ने कसकेला के स्कूल में घुन व कीड़ा लगा दाल व सोयाबीन बड़ी वितरण हेतु सामग्री आया था। जो बच्चों को वितरण करने योग्य नहीं था यह देख जनपद सदस्य ने तत्काल वितरण करने से मना कर दिया है।

  ग्रामीण इलाकों के दुकानदारों का हो रहा है अहित- दुकानदार मुकेश गोस्वामी बताते हैं कि महिला स्वयं सहायता समूह जब सरकारी स्कूलों में किराना सामग्री वितरण करती थी तब वे स्थानीय स्तर पर  मानक स्तर व  खाने योग्य सामग्री का खरीदी करके स्कूलों तक पहुंचाती थी जिससे ग्रामीण इलाकों के दुकानदारों का भी भला होता था। 

 क्वालिटी व क्वांटिटी के बीच मजे में प्रदेसी सप्लायर- कोरोना संक्रमण काल से प्रदेश के एक सप्लायर द्वारा अमानक किराना सामग्री का वितरण पूरे जिले के स्कूलों में किया जा रहा है। जो बेहद घटिया व खाने योग्य नहीं है लेकिन इससे किसको फर्क पड़ता है अभी तक इसकी सुध किसी ने नहीं लिया मजे तो सिर्फ प्रदेशी सप्लायर उड़ा रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का तो कोरोना संकट काल ने  रोजी-रोटी छिन लिया है।

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