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प्रदेश के 1200 लोगों ने बीते साल छोड़ा तम्बाकू सेवन, 24 जिलों में तम्बाकू नशा मुक्ति केंद्र का संचालन

31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस, इस साल ‘कमिट टू क्विट टोबैको’ थीम पर मनाया जा रहा

तम्बाकू से होने वाली बीमारियों से हर साल 13 लाख मौतें, 250 तरह के केमिकल कैंसर का खतरा

रायपुर. 30 मई 2021प्रदेश में बीते वर्ष (1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के बीच) 1200 लोगों ने तम्बाकू का सेवन छोड़ा है। तम्बाकू व्यसन से मुक्ति, इसके आदी लोगों की जाँच और इसका सेवन छुड़ाने परामर्श एवं उपचार के लिए प्रदेश के 24 जिलों में तम्बाकू नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की गई है। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान इन केंद्रों में 13 हजार 513 ओ.पी.डी. की गई। इन केंद्रों की मदद से 1200 लोगों ने तम्बाकू सेवन की लत से छुटकारा पाया है। लोगों को इस व्यसन से मुक्ति दिलाने के लिए प्रदेश के छह दन्त-चिकित्सा महाविद्यालयों में भी तम्बाकू नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना की गई हैं।

पूरी दुनिया में 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह ‘कमिट टू क्विट टोबैको (Commit to Quit Tobacco)’ की थीम पर मनाया जा रहा है। यह दिन तम्बाकू के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों एवं स्वास्थ्य जोखिम के बारे में लोगों को जागरूक करने का अवसर प्रदान करता है। सिर के बाल से लेकर पैर के नाख़ून तक ऐसा कोई अंग नही हैं जो तम्बाकू के दुष्प्रभावों से बचा हुआ हो। इससे न केवल कैंसर, ह्रदयरोग, स्ट्रोक, फेफड़ों से सम्बंधित बीमारी, क्रोनिक पल्मोनरी डिजीज जैसी गंभीर बीमारियाँ होती हैं, बल्कि वर्तमान में दुनिया भर में फैले कोविड-19 महामारी से गंभीर रूप से संक्रमित होने और इसके पीड़ितों को मौत का खतरा भी अधिक है। तम्बाकू के धुएं में सात हजार प्रकार के रसायन होते हैं जो 250 तरह के केमिकल कैंसर का कारण बनते हैं। तम्बाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों से देश में हर साल 13 लाख लोगों की मौत होती है।

राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग द्वारा तम्बाकू सेवन के दुष्प्रभावों से लोगों को जागरूक करने, इस दुर्व्यसन से मुक्ति दिलाने, राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के बेहतर संचालन तथा सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने अनेक प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग द्वारा इसके लिए पिछले वर्ष 141 फोकल ग्रुप डिस्कसन (Focal Group discussion) सत्रों का आयोजन किया गया।

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तम्बाकू उत्पादों के सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता लाने एवं कोतपा एक्ट की जानकारी देने स्कूलों में स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम (School Health Program) भी आयोजित किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण से बचाव के चलते लॉक-डाउन के बावजूद 1581 शैक्षणिक संस्थानों में ऑनलाइन इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साथ ही 2400 शैक्षणिक संस्थानों में यलो लाइन कैम्पेन (Yellow Line Campaign) भी आयोजित किए गए। वित्तीय वर्ष 2020-21 में सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन पर विधिक एवं चालानी कार्यवाही कर प्रदेश भर में कुल 1115 चालान कर नियम तोड़ने वालों से एक लाख 11 हजार 200 रूपए वसूले गए।

राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश भर में लगातार अनेक जागरूकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षणों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इनमें सभी जिलों के तम्बाकू नियंत्रण इकाई के नोडल अधिकारियों, जिला सलाहकारों, परामर्शदाताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ ही कोतपा एक्ट के पालन से जुड़े श्रम विभाग, पुलिस विभाग, परिवहन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्कूल व उच्च शिक्षा विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

तम्बाकू छोड़ने के ये हैं फायदें

तम्बाकू सेवन की आदत से मुक्त होने पर 20 मिनट बाद ही बढ़ी हुई धड़कनें और बीपी सामान्य होने लगता है। रक्त में बढ़ा हुआ कार्बन मोनो आक्साइड का स्तर 12 घंटे में घटने लगता हैं। मुंह का स्वाद एवं सूंघने की क्षमता 48 घंटे में बेहतर होने लगती है। शरीर में रक्त का संचार सुधरता है। दो-तीन सप्ताह में हृदयाघात का खतरा कम होने लगता है, फेफड़ों की कार्यप्रणाली बेहतर होने लगती है। एक से नौ माह में शॉर्टनेस ऑफ ब्रीदिंग घटती है, सांस का फूलना कम होता हैं। एक साल में ही ह्रदय की धमनियों से जुड़ा खतरा आधा हो जाता है।

भारत सरकार द्वारा हर पांच वर्ष में कराए जाने वाले जीएटी सर्वे (Global Adult Tobacco Survey) के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2009-10 की तुलना में 2016-17 में तम्बाकू का सेवन करने वालों की संख्या 14 प्रतिशत घटी है। जीएटी सर्वे 2016-17 के मुताबिक प्रदेश में 39 प्रतिशत व्यक्ति किसी न किसी रूप में तम्बाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं। उम्मीद है शासन द्वारा किए जा रहे गंभीर प्रयासों से राज्य में तम्बाकू उत्पादों का सेवन करने वालों की संख्या घटेगी और हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके खतरों से बचा सकेंगे।

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