
डीएवी जांता में स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती धूमधाम से मनाया गया!
डीएवी जांता में स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती धूमधाम से मनाया गया
बेमेतरा – डीएवी स्कूल जांता में दयानंद सरस्वती की जयंती व पालक-बालक-शिक्षक संगोष्ठी व भव्य वैदिक हवन यज्ञ आयोजन हुआ। विद्यार्थियों के पढ़ाई स्तर को जानने के लिए बड़ी संख्या में माता-पिता विद्यालय पहुँचे हुए थे, डीएवी स्कूल में सीबीएसई शिक्षा व पाठ्यक्रम को लेकर लोगों की सोच बदलने का अद्वितीय कार्य किया जा रहा हैैं। डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल जाँता के प्राचार्य पीएल जायसवाल ने बताया कि डीएवी स्कूल अपने सीबीएसई शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा, अच्छी संस्कार व सीबीएसई के प्रत्येक एक्टिविटी प्रतियोगिता व ओलम्पियाड के लिए जाना जाता हैैं। महर्षि दयानंद सरस्वती के नाम से ही 138 वर्ष पहले 1 जून 1886 को दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालय प्रारंभ हुआ है। महर्षि दयानंद आर्य समाज के संस्थापक है। संस्था में प्रत्येक शनिवार को हवन यज्ञ व संस्कार को लेकर नैतिक शिक्षा की पढ़ाई निरंतर होते आ रहा है, साथ ही पालकों ने भी वैदिक हवन यज्ञ में शामिल हुए। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने विद्यालय पहुंचकर अपने बच्चों के पढ़ाई की स्तर को जाना, साथ ही विद्यालय के हो रहे विभिन्न एक्टिविटी व उच्च स्तर के पढ़ाई को लेकर अभिभावकों में काफी उत्साह हैं। बच्चों के बहुमुखी विकास के लिए किए जा रहे प्रयास पर बातचीत की। विद्यार्थियों की पढ़ाई स्तर अच्छा व बेहतर से बेहतर हो आगामी वार्षिक परीक्षा की तैयारी के लिए हम किस तरह से छात्र को तैयारी व आगे बढ़ा सके इसके लिए स्कूल में यह मीटिंग का भव्य आयोजन किया गया था, जिसमें अभिभावकों ने बढ़- चढ़कर भाग लिया। प्राचार्य श्री जायसवाल ने जानकारी में बताया कि 24 जनवरी से रजिस्ट्रेशन व 1 फ़रवरी से ऐडमिशन प्रारंभ विद्यालय के ओर से किए हैं, भारत भर में हमारे 950 से अधिक व छत्तीसगढ़ में 96 से अधिक डीएवी संस्थान संचालित हो रही हैं, सीबीएसई राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा नर्सरी से कक्षा दूसरी तक के बच्चों के लिए अलग से भव्य व आधुनिक स्मार्ट एक्टिविटी लैब (नवाचार का उद्घाटन) शिक्षा सत्र 24-25 के साथ प्रारंभ भी विद्यालय में हो रहें हैं, साथ ही डीएवी स्पोर्ट्स में भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त भी मिल गया। डीएवी एशिया महाद्वीप का सबसे बड़े ग़ैर शैक्षणिक व वैदिक शिक्षण संस्थान हैं। पालक-बालक-शिक्षक आपस में मिलकर ही छात्रों की उज्ज्वल भविष्य की गणना कर सकतें हैं। छात्रों के प्रति मेहनत करने व आगे बढ़ाने के लिए विद्यालय के शिक्षक प्रयासरत व सदैव तत्पर हैं।









