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बॉयोफ्लॉक तकनीक से किसान बना आत्मनिर्भर, मत्स्य पालन से 3.50 लाख का शुद्ध लाभ

बॉयोफ्लॉक तकनीक से बदली किसान की किस्मत, मत्स्य पालन से 3.50 लाख का शुद्ध लाभ

बलरामपुर, 12 फरवरी 2026।मत्स्य पालन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीणों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं। शासन की योजनाओं के समुचित लाभ और नवाचार के माध्यम से अब ग्रामीण क्षेत्र के लोग आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

इसी कड़ी में जिले के विकासखंड रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम मितगई निवासी रामा मरकाम ने बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर मत्स्य पालन को लाभकारी व्यवसाय में परिवर्तित कर दिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक सोच और शासन की योजनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने अपनी निजी भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया।

बॉयोफ्लॉक तकनीक में विशेष लाइनरयुक्त टैंक में नियंत्रित वातावरण तैयार कर कम पानी और सीमित स्थान में उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इस पद्धति में जल का पुनः उपयोग होने से पानी की बचत होती है, जबकि जैविक तत्वों के संतुलन से आहार की लागत कम और उत्पादन अधिक होता है। यही कारण है कि यह तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

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4.50 लाख की सहायता से मिली बड़ी सफलता

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत रामा मरकाम को शासन द्वारा 4 लाख 50 हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने आधुनिक मत्स्य पालन इकाई की स्थापना की। पिछले वर्ष उनके बॉयोफ्लॉक तालाब से लगभग 40 क्विंटल मछली का उत्पादन हुआ। स्थानीय बाजार में बेहतर मांग और उचित मूल्य मिलने से उन्हें 6 लाख रुपये की कुल आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत घटाने के बाद 3 लाख 50 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।

युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा

रामा मरकाम ने बताया कि शासन की इस योजना से उन्हें अच्छा लाभ मिला है। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से वे आधुनिक पद्धति से मत्स्य पालन कर बेहतर आमदनी अर्जित कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन हो तो ग्रामीण क्षेत्र में भी बड़ी आर्थिक उपलब्धि संभव है।

उनकी सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। वे इस वर्ष उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आय को दोगुना करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि युवा पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक आजीविका के रूप में आधुनिक मत्स्य पालन अपनाएं तो आर्थिक आत्मनिर्भरता और अधिक मजबूत हो सकती है।

ग्रामीण आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से शासन आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी पहल कर रहा है, जिससे ग्रामीण अंचलों की आर्थिक तस्वीर तेजी से बदल रही है।

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