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तम्बाकू को बन्द क्यों नही कर देती- डॉ० शैलेन्द्र गुप्ता

तम्बाकू कोटपा एक्ट 2003 के तहत् ही तम्बाकू की बिक्री , सेवन या विज्ञापन किया जाना है । ये नियम इतने कडे है कि एक तरह से तम्बाकू की बिक्री पर भारत सरकार द्वारा लंबे समय से अंकुश लगाया गया है । 18 से कम वर्ष के आयु के व्यक्तियों को तम्बाकू बेचना या खरीदा जाना प्रतिबंधित है । स्कूल कोचिंग संस्थान के 100 गज के दायरे में तम्बाकू उत्पाद नहीं बेचा जा सकता , सार्वजनिक स्थान में धूम्रपान नही किया जा सकता , यहां तक बार में एल्कोहल का सेवन किया जा सकता है पर धूम्रपान नही । लोगों में जानकारी का अभाव है ।

तम्बाकू उत्पाद को बेचकर सरकार टेक्स के रूप में पैसा कमा रही है और प्रतिबंध की बात कर रही है-हाँ ये सही है कि टेक्स के रूप में सरकार को लगभग 300 बिलियन ( 01 बिलियन – 100 करोड ) की राशि प्राप्त होती है परंतु लगभग 1040 बिलियन से ज्यादा कि राशि इससे उत्पन्न कैंसर व विभिन्न बिमारियों के रोकथाम में खर्चा करना पड़ रहा है अर्थात् 740 बिलियन का घाटा सरकार झेल रही है ।

कई जगह तम्बाकू को सेवन संस्कृति का हिस्सा माना जाता है । ऐसी स्थिति में तम्बाकु उत्पाद पर चालानी कार्यवाही करना सही है – वैसे ये पुरी तरह से गलत है कि तम्बाकू भारत कि किसी भी भाग में संस्कृति का हिस्सा रहा है क्योंकि भारत की संस्कृति पुरातन संस्कृति रही है । तम्बाकू भारत में 16 वी शताब्दी ( 1605 ) में पुर्तगालियों के द्वारा लाया गया । यदि ये मान भी ले कि ये संस्कृति का हिस्सा है तो जब तम्बाकू के दुष्प्रभाव से लोग ही जिन्दा नही रहेंगे तो संस्कृति बचाकर क्या करेंगे । सती प्रथा , दहेज प्रथा , बाल विवाह , बहु पत्नी विवाह जैसे कुरीतियाँ भी हमारे समाज की संस्कृति का हिस्सा रही थी पर जैसे – जैसे समाज में दुष्प्रभाव की जानकारी हुई वैसे – वैसे समय समाज में इसें विलोपित कर दिया ।

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तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम की गतिविधियां समय -समय पर ही दिखती है जबकि इसे हमेशा रहनी चाहिये – यह कहना गलत है कि तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम की गतिविधियां कभी – कभी दिखती है । तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के दो भाग होते है पहला जनजागरूकता – जनमानस में तम्बाकू के दुष्प्रभाव का जनजागरूकता पैदा करना । दूसरा तम्बाकू उत्पाद की बिक्री , विज्ञापन व सेंवन पर कोटपा एक्ट का पालन कराना जिसमें से जनजागरूकता करना को प्रमुखता से लिया जाता है । हां ये बात सही है कि चालानी कार्यवाही कभी – कभी की जाती है जब शिकायत ज्यादा मिलती है ।

सरगुजा जिले में धूम्रपान व कोटपा एक्ट के नियमन की क्या स्थिति है- वर्तमान में सरगुजा जिला की स्थिति तम्बाकू विक्रय व कोटपा एक्ट के नियमन में संवेदनशील कलेक्टर संजीव झा व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ . पी.एस. सिसोदिया जी के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में बेहतर स्थिति में है । सभी शासकीय कार्यालय तम्बाकू मुक्त कर दिये गये है । सार्वजनिक स्थान में धूम्रपान की शिकायत बहुत कम संस्था में मिल रही है । आशा है जन सहयोग से सरगुजा को धूमपान मुक्त जिला सर्वेक्षण के बाद घोषित किया जा सकेगा ।

सरगुजा जिले को धूम्रपान मुक्त घोषित करने पर क्या फायदे होंगे – धूम्रपान मुक्त घोषित होने पर जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा । स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत सरगुजा जिला को प्राथमिकता मिलेगी और जिले के युवा धूम्रपान के नशे से दूर रहेंगे क्योकि धूम्रपान की लत होने पर छोडना अत्यंत कठिन होता है ।

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