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महाशिवरात्रि पर एसएयू में मांसाहार परोसने को लेकर विवाद, एसएफआई-अभाविप के बीच झड़प

महाशिवरात्रि पर एसएयू में मांसाहार परोसने को लेकर विवाद, एसएफआई-अभाविप के बीच झड़प

नई दिल्ली, 27 फरवरी: दक्षिणी दिल्ली स्थित ‘साउथ एशियन यूनिवर्सिटी’ (एसएयू) में बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर भोजनालय में मांसाहार परोसे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि विश्वविद्यालय परिसर में दो छात्र संगठनों – ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई)’ और ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप)’ के सदस्यों के बीच झड़प हो गई। दोनों संगठनों ने एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।

सूत्रों के अनुसार, एसएयू के भोजनालय में बुधवार को आम दिनों की तरह ही भोजन परोसा जा रहा था, जिसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के विकल्प उपलब्ध थे। इसी दौरान कुछ छात्रों ने भोजनालय में मांसाहार परोसने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि महाशिवरात्रि हिंदू समुदाय के लिए एक पवित्र पर्व है, और इस दिन मांसाहार परोसना धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है।

इस मुद्दे को लेकर पहले मौखिक बहस शुरू हुई, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई और दो छात्र संगठनों के सदस्यों के बीच टकराव का रूप ले लिया।

इस विवाद के बाद दोनों छात्र संगठनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। अभाविप के सदस्यों का कहना है कि एसएफआई ने जानबूझकर महाशिवरात्रि के दिन मांसाहार परोसे जाने की अनुमति दी और जब छात्रों ने इसका विरोध किया तो उनके साथ अभद्रता की गई। वहीं, एसएफआई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का भोजनालय सभी छात्रों के लिए खुला है और इसमें किसी विशेष धर्म या समुदाय के आधार पर भोजन तय नहीं किया जाता।

एसएफआई के प्रवक्ता ने कहा, “यह पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित विवाद है। विश्वविद्यालय का भोजनालय सभी छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर मेनू तैयार करता है, और इसे धर्म से जोड़ना अनुचित है।”

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वहीं, अभाविप के एक सदस्य ने कहा, “हमने केवल यह अनुरोध किया था कि महाशिवरात्रि के दिन मांसाहार न परोसा जाए, लेकिन हमारे साथ गलत व्यवहार किया गया और हमारे विरोध को दबाने की कोशिश की गई।”

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि विवाद के बढ़ने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बढ़ाई गई। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर छात्रों से संयम बरतने की अपील की है।

एक प्रशासनिक अधिकारी ने कहा, “हम पूरी घटना की जांच कर रहे हैं और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”

यह विवाद केवल विश्वविद्यालय तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक गलियारों तक भी पहुँच गया। भाजपा और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपनाया। भाजपा नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि भविष्य में धार्मिक आयोजनों के दिनों में विशेष संवेदनशीलता बरती जाए। वहीं, कांग्रेस ने इसे छात्रों की व्यक्तिगत पसंद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बताया।

इस घटना के बाद विश्वविद्यालय के अन्य छात्र और शिक्षक भी इस पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ छात्रों का मानना है कि विश्वविद्यालय को सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, जबकि अन्य छात्रों का कहना है कि व्यक्तिगत पसंद को थोपना उचित नहीं है।

एक छात्र ने कहा, “हमें एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि विश्वविद्यालय एक धर्मनिरपेक्ष स्थान है और यहाँ सभी को अपनी पसंद का भोजन करने का अधिकार है।”

यह विवाद आगे और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों संगठन अपनी-अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले को जल्द से जल्द शांत करने की कोशिश कर रहा है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

फिलहाल, प्रशासन ने दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने और मामले को सुलझाने के लिए एक विशेष बैठक बुलाई है।

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