सतत विकास की ओर छत्तीसगढ़: नीति आयोग की कार्यशाला में रणनीति और नवाचार पर चर्चा

सतत विकास की ओर छत्तीसगढ़: नीति आयोग की कार्यशाला में रणनीति और नवाचार पर चर्चा

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रायपुर में नीति आयोग की कार्यशाला, सतत विकास लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा

रायपुर, 28 फरवरी 2025 – न्यू सर्किट हाउस में आज सतत विकास पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की दिशा में राज्य और जिला स्तर पर की जा रही पहल को मजबूती देना था।

सतत विकास की अवधारणा और छत्तीसगढ़ की उपलब्धियां

कार्यशाला को संबोधित करते हुए संभागायुक्त महादेव कावरे ने कहा कि सतत विकास का मूल उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक प्रगति को सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहतर संभावनाएं बन सकें। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद से यहां विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति हुई है। रायपुर और अन्य शहरों में पक्के मकान, आधारभूत संरचना, तथा जीवन स्तर में सुधार को सतत विकास के संकेतक के रूप में देखा जा सकता है।

एसडीजी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण

राज्य नीति आयोग के सदस्य के. सुब्रमण्यम ने सतत विकास लक्ष्यों के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, जलवायु परिवर्तन, लैंगिक समानता और आर्थिक प्रगति को प्राथमिक लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जिला स्तर पर ठोस रणनीतियों की आवश्यकता है, जिसमें बहु-क्षेत्रीय समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

स्थानीय प्रशासन और सतत विकास की जिम्मेदारी

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रायपुर कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने सतत विकास की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि विकास का सही अर्थ तभी पूरा होता है जब इसका लाभ आम आदमी तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सतत विकास का अर्थ केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार से नहीं, बल्कि जीवन स्तर में वास्तविक परिवर्तन से है। प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि वे असमानताओं को कम करें, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाएं, शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाएं और लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए ठोस प्रयास करें।

नीति आयोग का सहयोग और तकनीकी नवाचार

कार्यशाला के दौरान राज्य नीति आयोग की टीम ने सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में किए जा रहे कार्यों और निगरानी तंत्र के बारे में जानकारी दी। जिला स्तरीय फ्रेमवर्क “डिस्ट्रिक्ट इंडिकेटर फ्रेमवर्क” के माध्यम से विभिन्न जिलों में एसडीजी लक्ष्यों की प्रगति को मापा जाता है। इसके अलावा, राज्य नीति आयोग द्वारा विकसित एसडीजी डैशबोर्ड का प्रदर्शन किया गया, जिससे जिलेवार प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन में मदद मिलती है।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य सचिव नीतू गोर्डिया भी उपस्थित रहीं। कार्यशाला में संभाग के विभिन्न जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों, विभागीय प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।

सतत विकास की ओर बढ़ते कदम

इस कार्यशाला ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ राज्य सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासनिक अधिकारियों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार और प्रशासनिक इकाइयां मिलकर राज्य को समावेशी और सतत विकास की ओर ले जाने के लिए काम कर रही हैं। इस दिशा में स्थानीय स्तर पर नवाचार और प्रभावी योजनाओं का कार्यान्वयन आवश्यक है।

कार्यशाला में हुई चर्चाओं से यह निष्कर्ष निकला कि सतत विकास केवल योजनाओं और नीतियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे ज़मीनी स्तर पर लागू कर वास्तविक बदलाव लाने की आवश्यकता है। छत्तीसगढ़ में हो रहे सतत विकास के प्रयासों को और अधिक सशक्त करने के लिए स्थानीय प्रशासन और समुदाय की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य होगी।