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महिला शक्ति: नए भारत की सशक्त ध्वनि

महिला शक्ति: नए भारत की सशक्त ध्वनि

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राजनांदगांव, 09 मार्च 2025। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) ग्राम बरगा में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “विकास के वादे के लिए आगे बढ़ें” को साकार करते हुए, इस कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी और उनकी उपलब्धियों को गर्व के साथ प्रस्तुत किया गया।

आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे घर और बाहर की जिम्मेदारियों को समान रूप से संभालते हुए समाज में अपनी सशक्त भूमिका निभा रही हैं। प्रशासन, उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, विज्ञान, और खेल जैसे हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को रेखांकित करते हुए बताया कि वे केवल घरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आज समाज के हर महत्वपूर्ण निर्णय में बराबर की भागीदार बन रही हैं।

महिला सशक्तिकरण केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे समाज में व्यावहारिक रूप देना जरूरी है। समानता की दिशा में सबसे पहला कदम बचपन से ही लड़के और लड़कियों में कोई भेदभाव न करना है। शिक्षा, रोजगार, और स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकारों में समानता लाना अत्यंत आवश्यक है। महिलाओं की भागीदारी को सामाजिक परिवर्तन की धुरी मानते हुए, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार और स्वयंसेवी संस्थाएं कई योजनाओं पर कार्य कर रही हैं।

कार्यक्रम में महिला स्व-सहायता समूहों ने अपनी आर्थिक उपलब्धियों और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानियां साझा कीं। इन समूहों द्वारा विभिन्न उत्पादों के स्टॉल लगाए गए थे, जिसमें हर्बल गुलाल, डिटर्जेंट पाउडर, साबुन, फिनाइल, अगरबत्ती और श्रृंगार सामग्री शामिल थे। इन महिलाओं ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने लघु उद्योगों की शुरुआत की और धीरे-धीरे उन्हें सफल उद्यमों में बदला। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ प्रेरित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर भी प्रदान करना था।

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सशक्त समाज के लिए महिलाओं का स्वास्थ्य सर्वोपरि है। बदलते समय के साथ, महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। स्वस्थ महिला ही स्वस्थ समाज की नींव रख सकती है। इस अवसर पर उपस्थित विशेषज्ञों ने बताया कि महिलाओं को पोषण युक्त भोजन अपनाने, नियमित व्यायाम करने और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। समाज की यह जिम्मेदारी बनती है कि महिलाओं को उनकी सेहत के प्रति जागरूक किया जाए।

महिलाएं केवल परिवार और समाज की धुरी ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं। इस अवसर पर स्वच्छता और प्लास्टिक उन्मूलन पर विशेष चर्चा की गई। महिलाओं को पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के निर्माण और उपयोग की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया गया। यह स्पष्ट हुआ कि यदि महिलाएं ठान लें, तो वे स्वच्छता और पर्यावरण सुधार की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई, जो महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत करने के लिए चलाई जा रही हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ और ‘लखपति दीदी योजना’ जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, नाबार्ड और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपने लघु उद्योगों को बढ़ा सकें।

इस अवसर पर समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। उनकी उपलब्धियों को सराहते हुए उन्हें प्रमाण पत्र और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही, ‘महिलाएं जानें अपना हक और अधिकार’ पुस्तिका का वितरण किया गया, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हो सकें।

आज महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे आत्मनिर्भर, शिक्षित और सशक्त बनकर समाज में बदलाव ला रही हैं। अब समय आ गया है कि समाज महिलाओं को केवल सहानुभूति की दृष्टि से देखने के बजाय उनके समान अधिकारों को सुनिश्चित करे। जब महिलाएं सशक्त होंगी, तभी एक सशक्त और विकसित समाज का निर्माण संभव होगा।

इस कार्यक्रम ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और समाज में समान भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। यह सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में बढ़ाए गए कई सार्थक कदमों का हिस्सा है।

Ashish Sinha

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