स्वरोजगार योजना से संचिता यदु ने पैतृक व्यवसाय को दी नई दिशा

स्वरोजगार योजना से संचिता यदु ने पैतृक व्यवसाय को दी नई दिशा

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जगदलपुर, 13 मार्च 2025 – जब आत्मनिर्भर बनने की चाहत हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी युवा सफलता की नई इबारत लिख सकता है। जगदलपुर के राजेंद्र प्रसाद वार्ड की निवासी संचिता यदु ने अपनी हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ ऐसा ही कर दिखाया। रोजगार की तलाश में भटकने के बजाय, उन्होंने अपने पैतृक व्यवसाय को अपनाने का न केवल फैसला किया, बल्कि उसे विस्तार भी दिया।

संचिता के पिता का वर्षों से आलू-प्याज और लहसुन विक्रय का व्यवसाय था। लेकिन उनके असमय निधन के बाद परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझने लगा। ऐसे में, संचिता के लिए यह एक बड़ा प्रश्न था कि आगे क्या किया जाए। परिवार में उनकी मां और एक छोटा भाई था, जिनकी जिम्मेदारी अब उन्हीं के कंधों पर आ गई थी। कृषि भूमि न होने के कारण कोई दूसरा स्थायी आय का साधन भी नहीं था। ऐसे में, उन्होंने अपने पिता के व्यवसाय को ही आगे बढ़ाने का निश्चय किया। हालांकि, इसके लिए पूंजी की आवश्यकता थी, जो उनके पास नहीं थी।

स्वरोजगार योजना बनी सहारा
रोज़गार के अवसर तलाशने के दौरान संचिता को मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के बारे में जानकारी मिली। इस योजना के तहत सरकार आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिससे युवा अपने स्वयं के व्यवसाय को स्थापित और विकसित कर सकें। यह जानकारी पाकर उनके मन में आशा की किरण जागी।

बस्तर चैंबर ऑफ कॉमर्स, जगदलपुर में आयोजित जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के एक शिविर में उन्होंने इस योजना की पूरी जानकारी प्राप्त की। उन्हें बताया गया कि इस योजना के अंतर्गत उन्हें अपने पूर्व से संचालित व्यवसाय के विस्तार के लिए दो लाख रुपये तक का ऋण मिल सकता है। संचिता ने तुरंत इस योजना के तहत आवेदन किया। जनवरी 2023 में, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, अग्रसेन चौक, जगदलपुर द्वारा उन्हें दो लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर वितरित किया गया।

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व्यवसाय विस्तार की राह में मिला प्रशिक्षण और अनुदान
ऋण प्राप्त करने के बाद, उद्योग विभाग की ओर से संचिता को एक सप्ताह का उद्यमिता विकास प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य नए उद्यमियों को व्यावसायिक कौशल और वित्तीय प्रबंधन की समझ देना था। संचिता ने इस प्रशिक्षण में पूरी उपस्थिति दी और व्यवसाय संचालन के नए पहलुओं को सीखा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, सरकार द्वारा उन्हें 30,000 रुपये की अनुदान राशि भी प्रदान की गई।

परिश्रम और लगन से बदली जिंदगी
पिछले तीन वर्षों से संचिता पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय का संचालन कर रही हैं। उनका कहना है कि दुकान से उनकी रोज़ाना बिक्री 5,000 से 10,000 रुपये तक होती है, जिससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 2,000 रुपये की आमदनी होती है। यह आय न केवल उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त है, बल्कि उन्होंने ऋण की समय पर किश्तें चुकाना भी शुरू कर दिया है।

उनके अनुसार, पहले उनका व्यवसाय केवल परंपरागत तरीकों से चलता था, लेकिन स्वरोजगार योजना के तहत मिले प्रशिक्षण से उन्होंने व्यवसाय में कुछ नई तकनीकों को अपनाया। अब वे अधिक व्यवस्थित रूप से खरीदी और बिक्री करती हैं, जिससे ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल रही हैं और उनकी बिक्री भी बढ़ रही है।

संचिता यदु की यह सफलता अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनके संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी से कई अन्य युवा भी स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने को प्रोत्साहित हो रहे हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और सरकार की योजनाओं का सही उपयोग किया जाए, तो कोई भी व्यक्ति आर्थिक रूप से सशक्त बन सकता है।

संचिता अब अपने व्यवसाय का और विस्तार करने की योजना बना रही हैं। वे चाहती हैं कि आने वाले वर्षों में वे अपने व्यवसाय को होलसेल स्तर तक ले जाएं और अन्य लोगों को भी रोजगार देने का अवसर प्रदान करें। साथ ही, वे चाहती हैं कि अन्य जरूरतमंद युवाओं को भी मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना की जानकारी मिले, ताकि वे भी इसका लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन सकें।

संचिता यदु की यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता की दास्तान नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का सही तरीके से उपयोग करके कोई भी व्यक्ति अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकता है और अपने साथ-साथ समाज के लिए भी सकारात्मक योगदान दे सकता है।