आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा एवं जीवन शैली चिकित्सा शिविर का आयोजन

आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा एवं जीवन शैली चिकित्सा शिविर का आयोजन

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राजनांदगांव, 30 मार्च 2025। आयुष विभाग के तत्वावधान में सामुदायिक भवन राजीवनगर में निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा एवं जीवन शैली चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य आमजन को आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक करना और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के रोकथाम हेतु उचित परामर्श प्रदान करना था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त किया।

शिविर के दौरान 62 रोगियों को आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ प्रदान किया गया। साथ ही, 51 व्यक्तियों का ब्लड शुगर, रक्तचाप जांच एवं अन्य आवश्यक स्क्रीनिंग की गई। यह शिविर विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक रहा जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जोड़ों के दर्द, त्वचा विकार, पाचन समस्याओं और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से ग्रसित थे। शिविर में उपस्थित रोगियों को उनकी दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार-विहार, योग एवं व्यायाम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

शिविर के आयोजन में स्थानीय पार्षद का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। शिविर में उपस्थित जनसमुदाय को जिला आयुष अधिकारी द्वारा शहर में स्थित आयुष संस्थानों और उनकी सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही, उपस्थित लोगों को बताया गया कि वे इन सुविधाओं का लाभ किस प्रकार ले सकते हैं और आयुर्वेदिक पद्धति को अपने जीवन में शामिल कर किस तरह स्वस्थ जीवनशैली अपना सकते हैं।

आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों ने शिविर में विभिन्न रोगों से संबंधित परामर्श और उपचार दिया। चिकित्सकों ने रोगियों को उनके स्वास्थ्य के अनुसार उचित आहार और औषधियों की जानकारी दी। शिविर में मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है, जो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होती है।

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शिविर में उपस्थित रोगियों में से कई ने बताया कि उन्होंने पहले भी आयुर्वेदिक उपचार का लाभ लिया था और यह चिकित्सा पद्धति उन्हें बेहद प्रभावी लगी। कई लोगों ने पहली बार आयुर्वेदिक परामर्श प्राप्त किया और इससे संतुष्ट नजर आए। विशेष रूप से मधुमेह, हाइपरटेंशन और मोटापे से पीड़ित रोगियों के लिए यह शिविर काफी उपयोगी सिद्ध हुआ, क्योंकि उन्हें उनकी दिनचर्या और आहार में आवश्यक बदलावों की जानकारी मिली।

शिविर में प्रमुख रूप से आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, फार्मासिस्ट, औषधालय सेवक और अन्य चिकित्सा कर्मियों ने अपनी सेवाएं दीं। चिकित्सकों ने यह भी बताया कि नियमित रूप से योग और प्राणायाम का अभ्यास करने से शारीरिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है और कई बीमारियों से बचा जा सकता है।

इस आयोजन के दौरान लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। यह भी बताया गया कि किस प्रकार आयुर्वेदिक औषधियां, बिना किसी दुष्प्रभाव के, शरीर को स्वस्थ बनाए रख सकती हैं। शिविर में लोगों को आहार संबंधी परामर्श भी दिया गया, जिसमें बताया गया कि मौसमी फल, सब्जियां और पारंपरिक खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होते हैं।

इस शिविर के सफल आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है और वे आधुनिक दवाइयों के साथ-साथ प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को भी अपनाने के इच्छुक हैं। स्वास्थ्य और रोगों से बचाव को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के शिविरों का आयोजन आवश्यक है। आयुष विभाग भविष्य में भी इस तरह के शिविरों का आयोजन कर आमजन को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।