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डॉ. पूजा दुबे को पीएचडी उपाधि मिलने पर संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय में सम्मान समारोह

डॉ. पूजा दुबे को पीएचडी उपाधि मिलने पर संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय में सम्मान समारोह

अंबिकापुर। संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका पूजा दुबे को डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त होने पर महाविद्यालय परिवार की ओर से भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में महाविद्यालय के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनका अभिनंदन किया।

पूजा दुबे ने शिक्षा के क्षेत्र में गहरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करते हुए वर्ष 2020 में अपना शोध कार्य प्रारंभ किया था। उन्होंने अपने शोध कार्य को सत्य श्री साई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस, सीहोर (मध्य प्रदेश) से पूरा किया। इस शोध में उनका मार्गदर्शन डॉ. धीरज शिंदे ने किया।

उनके शोध का विषय “हाई स्कूल के छात्रों में शैक्षणिक तनाव के साथ संवेगात्मक परिपक्वता और माता-पिता की भागीदारी का तुलनात्मक अध्ययन (सरगुजा, छत्तीसगढ़ के संदर्भ में)” था। इस शोध के माध्यम से उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि शैक्षणिक तनाव छात्रों पर किस प्रकार प्रभाव डालता है, उनकी संवेगात्मक परिपक्वता पर इसका क्या असर होता है और माता-पिता की भागीदारी उनके मानसिक संतुलन को बनाए रखने में किस हद तक सहायक होती है।

इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि हाई स्कूल के छात्रों पर शिक्षा से संबंधित तनाव का क्या प्रभाव पड़ता है और इस तनाव को कम करने में संवेगात्मक परिपक्वता एवं माता-पिता की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।

शोध के निष्कर्षों में यह पाया गया कि जिन छात्रों में संवेगात्मक परिपक्वता अधिक होती है, वे शैक्षणिक तनाव को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं। इसके अलावा, माता-पिता की सक्रिय भागीदारी से छात्रों के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जिससे वे बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन कर पाते हैं। शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि जिन छात्रों को पारिवारिक समर्थन कम मिलता है, वे अधिक तनावग्रस्त रहते हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पूजा दुबे का यह शोध शिक्षाविदों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है। यह अध्ययन शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने और छात्रों को तनावमुक्त वातावरण प्रदान करने में सहायक होगा। शोध के निष्कर्षों को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि विद्यालयों को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देना चाहिए और माता-पिता को भी शिक्षा में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

इस शोध से यह भी पता चला कि छात्रों के मानसिक और शैक्षणिक विकास में परिवार, शिक्षक और विद्यालय प्रशासन का सामूहिक योगदान आवश्यक है। इस शोध के आधार पर, आगे चलकर शिक्षा नीति में सुधार किया जा सकता है ताकि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जा सके।

महाविद्यालय परिवार द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में पूजा दुबे का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने उन्हें शुभकामनाएँ दीं। समारोह के दौरान उन्हें पुष्पगुच्छ, शॉल और प्रतीक चिह्न भेंट किए गए।

संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस उपलब्धि को महाविद्यालय और शिक्षा जगत के लिए गौरवपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यह उपलब्धि महाविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को दर्शाती है और छात्रों को शोध के प्रति प्रेरित करने का कार्य करेगी।

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पूजा दुबे का शिक्षा के प्रति समर्पण शुरू से ही स्पष्ट था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा में विशेष रुचि दिखाई और शिक्षण कार्य को अपने करियर के रूप में चुना। उनकी शिक्षा यात्रा में उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन अपने दृढ़ निश्चय और मेहनत के बल पर उन्होंने सफलता प्राप्त की।

पीएचडी उपाधि प्राप्त करने से पहले, उन्होंने शिक्षण कार्य में कई वर्षों तक योगदान दिया। वे छात्रों के विकास के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही हैं और शिक्षा क्षेत्र में नए शोधों और नवाचारों के प्रति जागरूक रही हैं। उनके शोध और अध्यापन के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।

पूजा दुबे की इस उपलब्धि से संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय का गौरव बढ़ा है। उनके इस शोध कार्य से न केवल शिक्षाविदों को बल्कि शोधकर्ताओं और छात्रों को भी प्रेरणा मिलेगी। महाविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों ने इसे संस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को दर्शाती है और अन्य शोधार्थियों को प्रेरित करती है कि वे भी अनुसंधान क्षेत्र में आगे बढ़ें और शिक्षा को और प्रभावशाली बनाएँ। महाविद्यालय में इस प्रकार की उपलब्धियाँ आगे भी प्रेरणा स्रोत बनी रहेंगी।

इस शोध का सामाजिक प्रभाव भी व्यापक है। आधुनिक समय में छात्र कई प्रकार के मानसिक तनाव से गुजरते हैं। परीक्षा का दबाव, करियर की चिंता और पारिवारिक अपेक्षाएँ छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित करती हैं। ऐसे में, यह शोध इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान देता है कि कैसे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखा जाए और उन्हें एक सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण प्रदान किया जाए।

शोध के निष्कर्षों के आधार पर, शिक्षकों और अभिभावकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि वे छात्रों की मानसिक स्थिति को कैसे बेहतर बना सकते हैं और उन्हें तनावमुक्त शिक्षा कैसे प्रदान कर सकते हैं।

पूजा दुबे का यह शोध एक महत्वपूर्ण शुरुआत है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी कई विषयों पर गहन अध्ययन की आवश्यकता है। विशेष रूप से, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल शिक्षा के प्रभाव, शिक्षकों की भूमिका और माता-पिता की भागीदारी पर और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है।

भविष्य में, इस शोध को और व्यापक रूप से लागू करने और शिक्षा नीति में सुधार लाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। इससे न केवल छात्रों को लाभ मिलेगा, बल्कि शिक्षा प्रणाली भी और प्रभावी होगी।

डॉ. पूजा दुबे की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में भी इसका विशेष योगदान है। उनके शोध कार्य से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है।

महाविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उनकी सफलता से न केवल महाविद्यालय, बल्कि शिक्षा जगत को भी गर्व महसूस हो रहा है।

यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित सभी शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी और आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक शोध करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

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